संत रामपाल जी महाराज ने बहू-जमालपुर (भिवानी) के बीमार माँ और भूखे बच्चों को दिया का सहारा

संत रामपाल जी महाराज ने भिवानी के बीमार माँ और भूखे बच्चों को दिया ‘रोटी, कपड़ा और मकान’ का सहारा

बहू-जमालपुर (हरियाणा): करुणा और मानवता की एक अद्भुत मिसाल कायम करते हुए, संत रामपाल जी महाराज ने अपनी परोपकारी पहल “अन्नपूर्णा मुहिम” के माध्यम से हरियाणा के भिवानी जिले के बहू-जमालपुर गांव में एक बेसहारा परिवार को तत्काल राहत और एक स्थायी जीवन का सहारा प्रदान किया है। संत जी का यह मिशन लाखों लोगों के लिए आशा की किरण बन रहा है।

टूटी छत, टीबी की बीमारी और जीवन का संघर्ष

बहू-जमालपुर गांव में यह परिवार एक महिला और उनके छोटे बेटे का है। परिवार की स्थिति हृदय विदारक है:

  • गंभीर बीमारी: परिवार की मुखिया टीबी (Tuberculosis) जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं और उनकी हालत काफी नाजुक है, जिससे वे कोई काम करने में सक्षम नहीं हैं। उनके पति का निधन हो चुका है।
  • जर्जर आवास: उनका घर पूरी तरह से टूटा-फूटा है, जिसके नाम पर एक छोटा सा कच्चा कमरा है। बारिश के मौसम में छत टपकती है और आंगन पानी से भर जाता है।
  • बुनियादी सुविधाओं का अभाव: घर में बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएँ भी नहीं हैं, जिससे जीवनयापन अत्यंत कठिन हो गया है।

गांव के लोगों ने भी बताया कि इतनी दयनीय स्थिति के बावजूद, पहले कभी किसी ने इस परिवार की सुध नहीं ली।

संत रामपाल जी महाराज की दया और तत्काल सहायता

परिवार की खोज मुनिंदर धर्मार्थ ट्रस्ट (कुरुक्षेत्र, हरियाणा) की टीम ने की। संत रामपाल जी महाराज को स्थिति की जानकारी मिलते ही, उनके आदेश पर तुरंत व्यापक सहायता सामग्री परिवार के घर तक पहुंचाई गई जिसमे शामिल है 

क्रमसामग्रीमात्रा 
1आटा 15 किलो
2चावल 5 किलो चावल
3चीनी2 किलो
4सरसों तेल2 लीटर
5चना दाल½ किलो
6काले चने½ किलो
7हरी मूंग दाल½ किलो
8पीली मूंग दाल½ किलो
9हल्दी150 ग्राम
10जीरा150 ग्राम
11लाल मिर्च100 ग्राम
12नहाने का साबुन4 पीस
13कपड़े धोने का साबुन1 किलो
14टाटा नमक1 किलो
15टाटा चाय250 ग्राम 
16सूखा दूध½ किलो 
17आलू5 किलो
18प्याज5 किलो
19अचार1 किलो
20कपड़े धोने का सर्फ½ किलो
21धनिया पाउडर100 ग्राम 
22बेसन½ किलो
23दलिया 1 किलो

रोटी, कपड़ा और मकान का स्थायी समाधान

जो बात संत रामपाल जी महाराज के मानवीय कार्य को अद्वितीय बनाती है, वह है उनकी दीर्घकालिक सहायता। उन्होंने परिवार को आश्वासन दिया कि यह सहायता तब तक जारी रहेगी, जब तक परिवार का बच्चा बड़ा होकर कमाने लायक नहीं हो जाता।

शिष्यों ने बताया कि उनके गुरु जी का नारा है:

“रोटी कपड़ा और मकान, सबको देंगे कबीर भगवान।”

इस नारे के तहत, राशन के अलावा, परिवार को घर की मरम्मत, नए मकान का निर्माण (शौचालय/बाथरूम सहित), बच्चों के लिए स्कूल ड्रेस, किताबें, और बीमार महिला के इलाज (दवाइयों का खर्च) की भी हर संभव व्यवस्था की जाएगी।

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परिवार को मिला नवजीवन 

परिवार को आश्रम के हेल्पलाइन नंबरों वाला एक संपर्क कार्ड दिया गया है। उन्हें निर्देश दिया कि राशन या अन्य सामग्री समाप्त होने से दो दिन पहले कॉल करें, जिसके बाद सामग्री तुरंत उनके दरवाजे पर पहुंचा दी जाएगी।

संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा से संचालित यह ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ न केवल भूख मिटा रही है, बल्कि असहाय और बीमार लोगों को गरिमा, सुरक्षा और जीवन का एक नया मौका दे रही है। यह कार्य इस बात का प्रमाण है कि सच्चे संत से ही धरती पर मानवता की भलाई होती हैं।

यह राहत सामग्री केवल उन्हीं व्यक्तियों को दी जाती है जो पूर्ण रूप से नशा मुक्त जीवन जीते हैं और मांसाहार का सेवन नहीं करते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि परिवार सामाजिक बुराइयों से मुक्त होकर सम्मानजनक जीवन जी सके।

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