मंगोलपुरी के संजय के आंसुओं को मिला संत रामपाल जी महाराज का सहारा – कलयुग में सतयुग का आगाज

मंगोलपुरी के संजय के आंसुओं को मिला संत रामपाल जी महाराज का सहारा – कलयुग में सतयुग का आगाज

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के मंगोलपुरी विधानसभा, एम ब्लॉक (M Block) में एक ऐसा वाक्या सामने आया है जिसने मानवता की एक नई मिसाल पेश की है। यहाँ रहने वाले एक बेबस और लाचार परिवार, जिसने बीमारी और गरीबी के चलते जीवन की सारी उम्मीदें खो दी थीं, के लिए संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ (Annapurna Muhim) जीवनदायिनी बनकर उभरी है। यह कहानी केवल एक परिवार की मदद की नहीं, बल्कि समाज में लुप्त हो रही संवेदनाओं और एक संत द्वारा शुरू की गई ऐतिहासिक पहल की है।

बीमारी और बेबसी का भयावह मंजर

मंगोलपुरी निवासी संजय, जो इस पीड़ित परिवार के मुखिया हैं, पिछले 5-6 वर्षों से एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उन्हें ‘यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर’ (Urethral Stricture) की समस्या है। सफदरजंग अस्पताल में लंबा इलाज चलने के बावजूद उन्हें आराम नहीं मिला। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि डॉक्टरों को उनके पेट में सुराख करके ‘यूरो बैग’ (Eurobag) लगाना पड़ा।

संजय की हालत इतनी नाजुक है कि वे बिस्तर से हिल भी नहीं पाते। जरा सी हरकत करने पर यूरो बैग में खून आने लगता है। घर का एकमात्र कमाने वाला सदस्य बिस्तर पर पड़ा है, जिससे आजीविका पूरी तरह ठप हो चुकी है। घर में उनकी पत्नी और एक बेटी है। बेटी ट्यूशन पढ़ाकर जैसे-तैसे घर का गुजारा चलाने की कोशिश करती है, लेकिन वह भी नाकाफी साबित होता है। उनका एक बेटा है जो शादीशुदा है और अपने परिवार के साथ अलग रहता है।

रिश्तों का कड़वा सच और कर्ज का बोझ

बीमारी और गरीबी ने न केवल शरीर तोड़ा, बल्कि समाज और रिश्तेदारों का असली चेहरा भी दिखा दिया। संजय बताते हैं कि मुसीबत के वक्त सभी सगे-संबंधियों ने मुंह फेर लिया। इलाज के चलते परिवार पर भारी कर्ज हो गया है। हालात ऐसे हो गए कि घर में खाने के लिए राशन तक नहीं बचा था और न ही दवाइयों के लिए पैसे थे।

संजय ने भावुक होकर बताया, “रिश्ते-नाते सब मतलब की दुनिया है। मदद के लिए किसी को फोन भी करते थे, तो लोग फोन उठाना बंद कर देते थे। वे पहले ही कह देते थे कि पैसों के लिए मत बोलना। हमारे पास कहीं जाने के लिए किराया तक नहीं था। हम रो-रोकर भगवान से बस मौत की भीख मांगते थे।”

मोबाइल स्क्रीन पर दिखी उम्मीद की किरण

घोर निराशा के अंधकार में, संजय को मोबाइल पर संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ का एक वीडियो दिखा। वीडियो में बताया गया था कि संत रामपाल जी महाराज के शिष्य गरीब और असहाय परिवारों को मुफ्त राशन और सहायता पहुँचा रहे हैं। इसे देखकर संजय के मन में जीने की एक आस जगी। उन्होंने वीडियो में दिए गए नंबरों पर संपर्क किया और अपनी व्यथा सुनाई।

Also Read: कांति नगर (दिल्ली) में हरिश्चंद्र के परिवार की ऐसी मदद से मिला संत रामपाल जी महाराज की दिव्य निस्वार्थ सेवा भाव का प्रमाण

संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों ने उनकी पुकार को अनसुना नहीं किया और तुरंत अपने गुरुदेव से प्रार्थना का आदेश मिलते ही आश्रम की टीम हरकत में आई। सबसे पहले कुछ सेवादारों ने उनके घर आकर स्थिति का जायजा लिया और उनकी जरूरतों को नोट किया।

फरिश्ते बनकर पहुँचे संत रामपाल जी के अनुयायी

जांच-पड़ताल के बाद, सतलोक आश्रम (मुंडका) की टीम संत रामपाल जी के आदेश अनुसार राशन और राहत सामग्री लेकर संजय के घर पहुँची। उन्होंने न केवल राशन दिया बल्कि परिवार को ढांढस भी बंधाया। विजय दास ने बताया कि वे सतगुरु रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट (Munindra Dharmarth Trust) के माध्यम से यह सेवा कर रहे हैं।

राहत सामग्री का विवरण: एक महीने का पूरा इंतजाम

अन्नपूर्णा मुहिम के तहत संजय के परिवार को उच्च गुणवत्ता वाली खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई गई, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें। प्रदान की गई सामग्री की सूची इस प्रकार है:

  • 15 किलो आटा
  • 5 किलो चावल (उच्च क्वालिटी)
  • 5 किलो आलू और 5 किलो प्याज
  • 1 किलो दाल और 1 लीटर तेल
  • 2 किलो चीनी
  • आधा किलो मिल्क पाउडर
  • नहाने और कपड़े धोने का साबुन, सर्फ
  • हल्दी, मिर्च, जीरा, चायपत्ती और आधा किलो अचार
  • एक भरा हुआ गैस सिलेंडर

इसके अलावा, सेवादारों ने यह भी आश्वासन दिया कि संजय की बीमारी के इलाज के लिए दवाइयों और अस्पताल की जाँच का खर्च भी संत रामपाल जी महाराज वहन करेंगे।

कलयुग में सतयुग का अहसास

राहत सामग्री पाकर संजय और उनकी पत्नी की आँखों में खुशी के आँसू छलक पड़े। संजय ने हाथ जोड़कर कहा, “मेरे लिए तो संत रामपाल जी महाराज ही भगवान हैं। जहाँ अपनों ने साथ छोड़ दिया, वहाँ गुरु जी ने हमें सहारा दिया। यह कलयुग में सतयुग की शुरुआत है। उन्होंने हमारे रसोई का खाली सिलेंडर भी भरवाया और राशन भी दिया। मैं उनका यह उपकार जीवन भर नहीं भूलूंगा।

उनकी पत्नी ने भी कहा, “हम बहुत दुखी और परेशान थे। दो रुपये भी नहीं होते थे हमारे पास। आज परमात्मा ने हमारी सुनी है और इतनी मदद भेजी है।

नशा मुक्ति और नैतिक उत्थान का संदेश

राहत सामग्री प्रदान करते समय सेवादार जगदीश दास ने इस मुहिम के एक महत्वपूर्ण नियम को भी स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि यह सहायता केवल उन्हीं लोगों को दी जाती है जो नशा नहीं करते और मांस-मदिरा का सेवन नहीं करते। संत रामपाल जी महाराज का उद्देश्य केवल पेट भरना नहीं, बल्कि समाज को बुराइयों से मुक्त करना भी है। यदि कोई लाभार्थी सहायता लेने के बाद नशा करता पाया जाता है, तो उसकी मदद तुरंत प्रभाव से बंद कर दी जाती है।

संत रामपाल जी अनुसार मानवता की सेवा ही परम धर्म

यह घटना इस बात का प्रमाण है कि इंसानियत आज भी जिंदा है। जहाँ सरकारें और रिश्तेदार भी लाचार हो जाते हैं, वहाँ संत रामपाल जी महाराज जैसे महापुरुषों की प्रेरणा से चलने वाली ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ अंधेरे में दीपक का काम कर रही है। संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित यह अभियान दिल्ली के हर कोने में जाकर जरूरतमंदों को ढूंढ रहा है और उन्हें नया जीवन दे रहा है।

संजय का परिवार अब भूखा नहीं सोएगा। उनके घर का चूल्हा फिर से जल उठा है। यह मुहिम समाज को यह संदेश देती है कि नर सेवा ही नारायण सेवा है।

2 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *