मिल्कपुर भिवानी संत रामपाल जी महाराज बने अनाथ बेटियों का सहारा

हरियाणा के भिवानी जिले के मिल्कपुर गांव में अनाथ बेटियों के लिए मसीहा बनकर उभरे संत रामपाल जी महाराज

भिवानी/मिल्कपुर: समाज में परोपकार की भावना जब धरातल पर उतरती है, तो वह किसी चमत्कार से कम नहीं लगती। हरियाणा के भिवानी जिले के अंतर्गत आने वाले गांव मिल्कपुर में एक ऐसा ही भावुक और प्रेरणादायक वाकया सामने आया है। यहाँ एक जर्जर कच्चे मकान में जीवन व्यतीत कर रही दो अनाथ बहनों की सुध लेने वाला जब कोई नहीं था, तब संत रामपाल जी महाराज उनके लिए आशा की किरण बनकर सामने आए। संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत न केवल इन बच्चियों को महीनों का राशन उपलब्ध कराया गया, बल्कि उनकी शिक्षा और मकान की मरम्मत का भी पूर्ण दायित्व लिया गया।

संत रामपाल जी महाराज के आदेश से घर-घर जाकर जरूरतमंदों की खोज

अक्सर देखा जाता है कि जरूरतमंद मदद की गुहार लगाने के लिए कतारों में खड़े रहते हैं, लेकिन संत रामपाल जी महाराज की विचारधारा इससे बिल्कुल विपरीत और अद्वितीय है। मिल्कपुर गांव में सहायता पहुँचने का तरीका यह दर्शाता है कि संत रामपाल जी महाराज का उद्देश्य केवल दान देना नहीं, बल्कि वास्तविक जरूरतमंद को खोजकर उसे सशक्त बनाना है। संत रामपाल जी महाराज के शिष्य अपने गुरु के आदेश से गांव-गांव जाते हैं और ऐसे परिवारों की तलाश करते हैं जो वास्तव में असहाय हैं। मिल्कपुर के इस परिवार तक पहुँचने के लिए भी शिष्यों ने संत रामपाल जी के आदेश से पहल की। उन्होंने देखा कि मां-बाप के बिना ये दो बच्चियां किस तरह संघर्ष कर रही हैं और बिना किसी मांग के उनके दरवाजे पर मदद पहुँचाई।

अत्यंत दयनीय स्थिति में जीवन यापन कर रहा था परिवार

मिल्कपुर गांव स्थित जिस घर में ये दो बहनें रहती हैं, उसकी स्थिति देखकर किसी का भी हृदय द्रवित हो सकता है। घर के नाम पर केवल दो कच्चे कमरे हैं, जिनकी दीवारों पर प्लास्टर तक नहीं है। फर्श कच्चा है और जगह-जगह ईंटें टूटी हुई हैं। घर में बना बाथरूम बिना दरवाजे और चारदीवारी के है, जो सुरक्षा और निजता के लिए एक बड़ा खतरा था। रसोई घर में पकाने के लिए न तो पर्याप्त बर्तन थे और न ही अन्न का दाना।

पीड़ित बड़ी बहन ने बताया कि उनकी माता का देहांत 10 वर्ष पूर्व हो गया था और पिता का साया भी एक वर्ष पहले सिर से उठ गया। वह हासी में एक कपड़े की दुकान पर काम करके मात्र 5,000 रुपये मासिक कमाती हैं, जिससे घर का खर्च चलाना असंभव सा था। छोटी बहन, जो 9वीं कक्षा में पढ़ती है, पुलिस अफसर बनने का सपना देखती है, लेकिन अभावों के कारण उसका यह सपना धुंधला पड़ता जा रहा था। रिश्तेदारों और समाज की तरफ से भी उन्हें कोई विशेष सहायता प्राप्त नहीं हो रही थी।

संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई राहत सामग्री

संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार, शिष्यों ने परिवार को तत्काल प्रभाव से भारी मात्रा में खाद्य सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुएं उपलब्ध करवाईं। प्रदान की गई सामग्री का विवरण निम्नलिखित है:

क्रमांकसामग्री का नाममात्रा/विवरण
1आटा20 किलोग्राम
2चावल5 किलोग्राम
3चीनी2 किलोग्राम
4आलू5 किलोग्राम
5प्याज5 किलोग्राम
6सरसों का तेल1 लीटर (उच्च गुणवत्ता)
7देसी घी1 किलो
8दाल (मूंग और चना)1-1 किलोग्राम
9मसाले (हल्दी, मिर्च, जीरा)पूर्ण पैकेट
10चाय पत्ती1 किलो
11अमूल दूध (सूखा)1 किलो
12नमक1 किलो
13अचार500 ग्राम
14साबुन (नहाने और कपड़े धोने)4 नहाने की, 1 पैकेट कपड़े धोने का
15डिटर्जेंट पाउडरघड़ी (बड़ा पैकेट)
16त्रिपाल (Tarpaulin)छत को ढकने के लिए

भविष्य निर्माण और सुरक्षा का आश्वासन

संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सहायता केवल राशन तक सीमित नहीं है। उनके शिष्य संदीप दास ने बताया कि गुरु जी का नारा है, “रोटी, कपड़ा, शिक्षा और मकान, हर गरीब को देगा कबीर भगवान।” इसी उद्देश्य के तहत, संत रामपाल जी महाराज ने छोटी बहन की पढ़ाई का पूरा खर्च, जिसमें स्कूल की फीस, ड्रेस और किताबें शामिल हैं, उठाने का निर्णय लिया है।

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इसके अतिरिक्त, घर की टपकती छत को देखते हुए तत्काल राहत के रूप में एक मजबूत त्रिपाल प्रदान किया गया और घर की मरम्मत के लिए संत रामपाल जी महाराज से प्रार्थना कर आगे की कार्यवाही का आश्वासन दिया गया। शिष्यों ने परिवार को एक संपर्क कार्ड भी दिया है, ताकि राशन खत्म होने से दो दिन पहले सूचित करने पर पुनः सामग्री पहुंचाई जा सके। यह सहायता तब तक जारी रहेगी जब तक परिवार आत्मनिर्भर नहीं हो जाता।

संत रामपाल जी महाराज: समाज सुधार और जनकल्याण के पुरोधा

इस सहायता कार्य के दौरान मौजूद संत रामपाल जी महाराज के शिष्य संदीप दास ने स्पष्ट किया कि यह सारा कार्य संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा और आदेश से ही संभव हो पा रहा है। जेल में रहते हुए भी संत रामपाल जी महाराज समाज के कल्याण के लिए निरंतर सक्रिय हैं।

संत रामपाल जी महाराज द्वारा समाज सुधार के लिए कई अन्य मुहिमें भी चलाई जा रही हैं:

  1. दहेज मुक्त भारत: संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी बिना दहेज के सादगीपूर्ण विवाह (रमैणी) करते हैं। इन दोनों अनाथ बहनों के विवाह की जिम्मेदारी भी संत रामपाल जी महाराज द्वारा उठाने की बात कही गई है।
  2. नशा मुक्त समाज: उनकी पुस्तक ‘ज्ञान गंगा’ और ‘जीने की राह’ पढ़कर लाखों लोग नशा त्याग चुके हैं। राहत सामग्री भी केवल नशा न करने वाले परिवारों को ही दी जाती है ताकि सात्विक समाज का निर्माण हो।
  3. आपदा प्रबंधन: कोरोना काल हो या बाढ़ की विभिषिका, संत रामपाल जी महाराज के भंडारे और राहत सामग्री हमेशा जनता के लिए उपलब्ध रही है।
  4. चिकित्सा और देहदान: रक्तदान शिविर, नेत्र जांच शिविर और मृत्यु उपरांत देहदान जैसी पहलों से विज्ञान और समाज दोनों को लाभ पहुँचाया जा रहा है।

पड़ोस में रहने वाली महिला ने भी भावुक होकर कहा कि जहाँ सगे संबंधी और सरकार मदद नहीं कर पाई, वहां संत रामपाल जी महाराज ने इन अनाथ बच्चों की सुध ली है। यह कलयुग में सतयुग जैसा व्यवहार है।

मानवता के सच्चे रक्षक: संत रामपाल जी महाराज

अंत में, यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि संत रामपाल जी महाराज आज के दौर में मानवता के सच्चे रक्षक बनकर उभरे हैं। “तरवर सरवर संत जन, चौथा बरसे मेह, परमार्थ के कारण, चारों धारी देह” – यह कहावत संत रामपाल जी महाराज पर पूर्णतः चरितार्थ होती है। मिल्कपुर की घटना गवाह है कि संत रामपाल जी महाराज केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं दे रहे, बल्कि धरातल पर उतरकर गरीब, असहाय और अनाथों का सहारा भी बन रहे हैं। उनका यह प्रयास न केवल दो जिंदगियों को संवार रहा है, बल्कि पूरे समाज को निस्वार्थ सेवा की प्रेरणा दे रहा है। संत रामपाल जी महाराज का यह परोपकारी स्वरूप यह सिद्ध करता है कि सच्चा संत वही है जो दूसरों के दर्द को अपना समझे और उसे दूर करे।

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