यह कहानी है पंजाब के फाजिल्का जिले के अबोहर शहर की इंद्र नगरी में रहने वाली शारदा देवी और उनके परिवार की, जो लंबे समय से बेहद कठिन हालात में जीवन बिता रहा था। छह सदस्यों का यह परिवार उस समय पूरी तरह संकट में आ गया, जब परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य सुनील जी को दो बार दिल का दौरा पड़ा। इस गंभीर बीमारी के बाद सुनील जी काम करने की स्थिति में नहीं रहे।
इलाज में परिवार की सारी जमा पूंजी खत्म हो गई। आमदनी का कोई स्रोत न बचने के कारण घर चलाना मुश्किल हो गया। घर की हालत भी उनकी पीड़ा को और बढ़ा रही थी। छत जगह-जगह से टूटी हुई थी, बारिश में पानी टपकता था। शौचालय और स्नानघर की हालत बहुत खराब थी, ऊपर छत नहीं थी और दरवाजे टूटे हुए थे। घर के भीतर भी कई जरूरी सुविधाओं का अभाव था। राशन और रोजमर्रा की जरूरतों के बिना परिवार का गुजारा मुश्किल हो चुका था। हर दिन यही चिंता रहती थी कि आज चूल्हा जलेगा या नहीं।
जब संत रामपाल जी महाराज तक पहुंची पीड़ा
जब शारदा देवी के परिवार की यह स्थिति संत रामपाल जी महाराज तक पहुंची, तो उन्होंने तुरंत अन्नपूर्णा मुहिम के तहत इस परिवार की सहायता का निर्णय लिया। संत रामपाल जी महाराज का उद्देश्य स्पष्ट है कि कोई भी गरीब परिवार भूख, बीमारी और मजबूरी के कारण टूट न जाए।
इसी भावना के साथ संत रामपाल जी महाराज के शिष्य इंद्र नगरी, अबोहर पहुंचे और परिवार की वास्तविक स्थिति को देखा।
अन्नपूर्णा मुहिम के तहत दी गई सहायता सामग्री
संत रामपाल जी महाराज द्वारा शारदा देवी के परिवार को पूरी तरह निशुल्क आवश्यक सामग्री प्रदान की गई, ताकि उनका दैनिक जीवन कुछ आसान हो सके।
| क्रमांक | सामग्री का नाम | मात्रा / विवरण |
| 1 | आटा | 25 किलोग्राम |
| 2 | चावल | 5 किलोग्राम |
| 3 | चीनी | 2 किलोग्राम |
| 4 | आलू | 5 किलोग्राम |
| 5 | प्याज | 5 किलोग्राम |
| 6 | सरसों का तेल | 1 लीटर |
| 7 | दाल (मूंग और चना) | 1–1 किलोग्राम |
| 8 | सूखा दूध | 1 किलोग्राम |
| 9 | चाय पत्ती | 1 पैकेट |
| 10 | मसाले (हल्दी, मिर्च, जीरा) | पूरा पैकेट |
| 11 | नमक | 1 पैकेट |
| 12 | अचार | 500 ग्राम |
| 13 | कपड़े धोने का पाउडर | बड़ा पैकेट |
| 14 | साबुन (नहाने व कपड़े धोने) | 4 नहाने के, 1 कपड़े धोने का |
इसके साथ परिवार को यह आश्वासन भी दिया गया कि जब तक हालात ठीक नहीं होते, तब तक आवश्यकता अनुसार राशन और अन्य जरूरी सामग्री आगे भी घर तक पहुंचाई जाती रहेगी।
घर की मरम्मत का भरोसा
राशन देने के साथ-साथ शारदा देवी ने अपने घर की अन्य समस्याएं भी बताईं। उन्होंने टूटी छत, खराब शौचालय और जर्जर दरवाजों की स्थिति सामने रखी। संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों ने बताया कि यह बात गुरुजी तक पहुंचाई जाएगी और आदेश मिलते ही घर की मरम्मत, शौचालय की छत और दरवाजों का कार्य कराया जाएगा।
परिवार की भावनाएं
मदद मिलने के बाद शारदा देवी और सुनील जी की आंखों में आंसू थे, लेकिन ये आंसू दर्द के नहीं, राहत के थे। सुनील जी ने कहा कि बीमारी के बाद उन्हें लगा था कि अब सब खत्म हो गया है, लेकिन आज उन्हें फिर से जीने की उम्मीद मिली है।
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शारदा देवी ने बताया कि अब कम से कम बच्चों के लिए रोज भोजन की चिंता नहीं रहेगी। बच्चों के चेहरे पर सुकून साफ नजर आ रहा था।
पड़ोसियों की प्रतिक्रिया
मोहल्ले के लोगों ने भी इस सेवा की सराहना की। पड़ोसियों का कहना था कि बीमारी के बाद यह परिवार पूरी तरह अकेला पड़ गया था, लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने उन्हें फिर से संभलने का सहारा दिया। लोगों ने संत रामपाल जी महाराज के इस कार्य को सच्ची मानवता की मिसाल बताया।
अन्नपूर्णा मुहिम का उद्देश्य
संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही अन्नपूर्णा मुहिम का उद्देश्य केवल राशन देना नहीं है। इसका मकसद है कि गरीब और असहाय परिवार सम्मान के साथ जीवन जिएं, नशा और बुरी आदतों से दूर रहें और धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनें। साथ ही बच्चों की पढ़ाई और परिवार की बुनियादी जरूरतों का भी पूरा ध्यान रखा जाता है।
एक नई शुरुआत की उम्मीद
अन्नपूर्णा मुहिम ने शारदा देवी के परिवार की समस्या को अस्थायी रूप से नहीं, बल्कि जड़ से हल किया है। भोजन, आवश्यक सामग्री और आवास संबंधी समस्याओं का समाधान होने के बाद यह परिवार अब सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन जी रहा है।
यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही अन्नपूर्णा मुहिम केवल सहायता नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों के जीवन को स्थायी रूप से संभालने और संवारने का कार्य कर रही है।

