अहमदाबाद: हीरापुर में संत रामपाल जी महाराज बने सहारा

गुजरात/अहमदाबाद: हीरापुर गांव में संत रामपाल जी महाराज के आशीर्वाद से खोड़ा भाई ठाकुर के परिवार को मिला ‘जीवनदान’ और आजीवन राशन का सहारा

भारत जैसे विशाल देश में जहां प्रतिदिन करोड़ों लोग भूख के साये में सोने को मजबूर हैं, वहीं गुजरात राज्य के अहमदाबाद जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली परिस्थितियों के बीच एक उम्मीद की किरण जागी है। अहमदाबाद जिले के दसक्रोई (Daskroi) तालुका के छोटे से गांव हीरापुर में एक ऐसा परिवार रहता है, जो अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष कर रहा था। खोड़ा भाई ठाकुर और उनकी धर्मपत्नी भावना बहन ठाकुर का यह परिवार अत्यंत दयनीय स्थिति में जीवन यापन कर रहा था। लेकिन, जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की असीम कृपा और उनकी अनूठी ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के माध्यम से इस परिवार की सुध ली गई है और उन्हें जीवन भर के लिए राशन की चिंता से मुक्त कर दिया गया है।

ग्रामीण संत रामपाल जी महाराज से मदद के लिए कैसे संपर्क साधते हैं

हीरापुर गांव में संत रामपाल जी महाराज के आदेश से अनुयायियों द्वारा घर-घर जाकर जरूरतमंदों की पहचान की जा रही है। संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार, उनके शिष्य पूरे भारतवर्ष में ऐसे असहाय परिवारों को खोज रहे हैं जो वास्तव में मदद के पात्र हैं। खोड़ा भाई ठाकुर के मामले में, शिष्यों को जानकारी मिली थी कि यह परिवार अत्यंत संकट में है। 

​खोड़ा भाई ठाकुर की दर्दनाक दास्तां और संघर्ष

हीरापुर गांव के खोडियार माता वास (Khodiyar Mata Vas) में रहने वाले खोड़ा भाई ठाकुर की स्थिति अत्यंत पीड़ादायक है। उनके घर की छत पक्की नहीं है, बल्कि लोहे के शेड से ढकी हुई है। घर के मुख्य दरवाजे की हालत जर्जर है, जिसमें न तो ठीक से कुंडी है और न ही लॉक लगाने की व्यवस्था। घर के अंदर की दीवारों पर प्लास्टर तक नहीं है और ईंटें दिखाई देती हैं।

​खोड़ा भाई ठाकुर पिछले लगभग 3 से 4 वर्षों से लकवा (paralysis) की बीमारी से ग्रसित हैं और पूरी तरह से बिस्तर पर आश्रित हैं। उनके शरीर का आधा हिस्सा काम नहीं करता। परिवार में उनकी देखभाल के लिए केवल उनकी धर्मपत्नी भावना बहन ठाकुर हैं। दंपति की कोई संतान नहीं है, जो बुढ़ापे में उनका सहारा बन सके। आर्थिक तंगी का आलम यह था कि अपना पेट भरने और इलाज के लिए उन्हें अपना ही घर बेचना पड़ा। भावना बहन ने बताया कि उन्होंने अपना मकान मात्र 1,70,000 रुपये में कुछ वर्ष पूर्व बेच दिया था। उन्होंने खरीदार से यह शर्त रखी थी कि जब तक वे और उनके पति जीवित हैं, उन्हें इसी घर में रहने दिया जाए। 

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बिजली का बिल भरने में असमर्थता के कारण वे अंधेरे में रहने को मजबूर हो सकते थे, और अक्सर ईंधन (गैस) खत्म होने पर भावना बहन को लकड़ी के चूल्हे पर खाना पकाना पड़ता था, जिससे बीमार पति को धुएं में परेशानी होती थी।

​संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ का आगमन

इस घोर संकट की घड़ी में संत रामपाल जी महाराज भगवान के रूप में इस परिवार के लिए उभरे हैं। संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट के सेवादार राशन सामग्री लेकर खोड़ा भाई के घर पहुंचे। संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट आदेश है कि उनका कोई भी बच्चा भूखा नहीं सोना चाहिए। इस अभियान का उद्देश्य “रोटी, कपड़ा, शिक्षा और मकान” हर जरूरतमंद को उपलब्ध कराना है।

​संत रामपाल जी महाराज ने खोड़ा भाई को राशन सामग्री की एक बड़ी खेप सौंपी। यह सहायता केवल एक दिन के लिए नहीं, बल्कि आजीवन देने का वचन दिया गया है।

वितरित की गई सामग्री का विवरण

संत रामपाल जी महाराज की ओर से खोड़ा भाई ठाकुर के परिवार को एक महीने के लिए पर्याप्त राशन सामग्री प्रदान की गई। इसमें लगभग 15 से 20 प्रकार की वस्तुएं शामिल हैं, जो एक परिवार के भरण-पोषण के लिए आवश्यक हैं।

क्र.सं.सामग्री का नाममात्रा/विवरण
1आटा15 किलो
2चावल5 किलो
3आलू5 किलो
4प्याज5 किलो
5चीनी2 किलो
6नमक (टाटा)1 किलो
7तेल1 लीटर
8घी/सूखा दूध500 ग्राम (दूध बनाने हेतु)
9तूर/मूंग दाल (हरी)500 ग्राम
10चना दाल500 ग्राम
11मूंग दाल (पीली)500 ग्राम
12चना500 ग्राम
13चाय पत्ती (टाटा)250 ग्राम
14मिर्च पाउडर100 ग्राम
15हल्दी पाउडर100 ग्राम
16जीरा100 ग्राम
17आचार400 ग्राम
18कपड़े धोने का साबुन1 किलो
19डिटर्जेंट पाउडर (सर्फ)500 ग्राम
20नहाने का साबुन4 पीस

इसके अतिरिक्त, गैस सिलेंडर की व्यवस्था भी संत रामपाल जी महाराज के ट्रस्ट द्वारा की जाएगी यदि परिवार के पास ईंधन समाप्त होता है।

आजीवन सेवा का संकल्प और समाज सुधार

संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी ने बताया कि यह सेवा केवल राशन वितरण तक सीमित नहीं है। संत रामपाल जी महाराज समाज सुधार के अन्य कार्यों जैसे दहेज मुक्त विवाह, नशा मुक्ति और बाढ़ राहत कार्यों में भी अग्रणी हैं। खोड़ा भाई को एक ‘राशन कार्ड’ दिया गया है, जिसके माध्यम से वे आजीवन सेवा प्राप्त कर सकेंगे।

​इस अवसर पर खोड़ा भाई के पड़ोसी कांति भाई और संजय भाई भी उपस्थित थे। कांति भाई ने बताया कि खोड़ा भाई पिछले 4 साल से बीमार हैं और गांव में कोई उनकी सुध लेने वाला नहीं था। सरपंच या प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली। उन्होंने कहा, “संत रामपाल जी का मिशन बहुत अच्छा है, उन्होंने जो किया वह कोई सगा संबंधी भी नहीं कर पाता।”

​भावना बहन ठाकुर ने गुजराती भाषा में अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके पास संत रामपाल जी महाराज का धन्यवाद करने के लिए शब्द नहीं हैं। उन्होंने माना कि इस कलयुग में भगवान ही गरीबों की सुनते हैं और संत रामपाल जी महाराज उनके लिए भगवान बनकर आए हैं।

धरा पर भगवान का साक्षात स्वरूप – संत रामपाल जी महाराज

अंततः, यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि संत रामपाल जी महाराज आज के दौर में मानवता के सच्चे रक्षक हैं। खोड़ा भाई ठाकुर जैसे असहाय लोगों के लिए संत रामपाल जी महाराज केवल एक संत नहीं, बल्कि पालनहार हैं। उनकी यह ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ न केवल भूख मिटा रही है, बल्कि समाज में निस्वार्थ सेवा और प्रेम का दीपक भी जला रही है। संत रामपाल जी महाराज का यह प्रयास सिद्ध करता है कि वे ही वास्तव में जगतगुरु और गरीबों के मसीहा हैं।

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