झज्जर (हरियाणा): अक्सर कहा जाता है कि जब इंसान के पास शब्द खत्म हो जाते हैं और सामर्थ्य जवाब दे जाता है, तब परमात्मा का सहारा ही शेष बचता है। हरियाणा के झज्जर जिले के गाँव दुजाना में ऐसा ही एक दृश्य देखने को मिला। जहाँ प्रशासन और समाज की नजरें नहीं पहुँच पाईं, वहाँ जेल में रहते हुए भी संत रामपाल जी महाराज ने अपनी करुणा का हाथ बढ़ाया।
खामोशी और तंगहाली में गुजरता जीवन
यह व्यथा है दुजाना गाँव के रहने वाले 55 वर्षीय महेंद्र सिंह और उनकी धर्मपत्नी गुड्डी बहन की। नियति का खेल देखिए कि महेंद्र सिंह बोलने में असमर्थ (मूक) हैं और शारीरिक रूप से भी कमजोर हो चुके हैं। वे कभी दिहाड़ी मजदूरी कर घर चलाते थे, लेकिन उम्र और बीमारी ने उन्हें लाचार बना दिया।
गुड्डी बहन बताती हैं कि उनकी चार बेटियाँ थीं, जिनकी शादी हो चुकी है और अब वे अपने घर की हैं। घर में केवल वे दोनों बुजुर्ग रहते हैं। एक भतीजी की छोटी सी सहायता या कभी-कभार मिलने वाले सरकारी कोटे से जैसे-तैसे इनका चूल्हा जल रहा था। कई बार ऐसी नौबत आती थी कि पेट भरने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था।
संत रामपाल जी महाराज ने भेजा ‘स्नेह और सुरक्षा’ का उपहार
जब इस दंपति की दयनीय स्थिति की सूचना संत रामपाल जी महाराज के संज्ञान में आई, तो उन्होंने तुरंत इस परिवार को ‘गोद लेने’ का निर्णय लिया। संत रामपाल जी महाराज का संकल्प है— “रोटी, कपड़ा, शिक्षा और मकान, हर गरीब को देगा कबीर भगवान।”
इसी संकल्प को पूरा करने के लिए संत रामपाल जी महाराज ने अपने अनुयायियों के माध्यम से महेंद्र जी के घर राशन का पूरा भंडार भिजवाया।
गुणवत्ता ऐसी कि रईस भी रश्क करें: प्राप्त सामग्री का विवरण
संत रामपाल जी महाराज द्वारा भिजवाई गई सामग्री की गुणवत्ता यह दर्शाती है कि उनके लिए हर गरीब ‘विशिष्ट’ (VIP) है। महेंद्र और गुड्डी को जो राशन मिला, उसमें ब्रांडेड और उच्च गुणवत्ता की वस्तुएं शामिल थीं।
दी गई राशन सामग्री की सूची इस प्रकार है:
| क्र.सं. | सामग्री | मात्रा |
| 1 | आटा | 15 किलो |
| 2 | चावल | 5 किलो |
| 3 | चीनी | 2 किलो |
| 4 | सरसों का तेल | 1 लीटर |
| 5 | चना दाल | 1 किलो |
| 6 | हरी मूंग दाल | 1 किलो |
| 7 | हल्दी | 150 ग्राम |
| 8 | जीरा | 150 ग्राम |
| 9 | लाल मिर्च | 100 ग्राम |
| 10 | नहाने का साबुन | 4 पीस |
| 11 | कपड़े धोने का साबुन | 1 किलो |
| 12 | टाटा नमक | 1 किलो |
| 13 | टाटा चाय | 250 ग्राम |
| 14 | मिल्क पाउडर (सूखा दूध) | 1 किलो |
| 15 | आलू | 5 किलो |
| 16 | प्याज | 5 किलो |
| 17 | अचार | ½ किलो |
| 18 | वाशिंग पाउडर | ½ किलो |
| 19 | धनिया पाउडर | 100 ग्राम |
| 20 | बेसन | 0.5 किलो |
| 21 | दलिया | 1 किलो |
जब तक सांस, तब तक साथ: आजीवन मदद का वचन
इस मुहिम की सबसे विशेष बात यह है कि संत रामपाल जी महाराज ने इस मदद को केवल एक बार तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने गुड्डी बहन को आश्वस्त किया है कि जब तक इस परिवार में कोई कमाने लायक सदस्य नहीं हो जाता (जो कि उनकी उम्र को देखते हुए संभव नहीं है), तब तक आजीवन हर महीने उनके घर राशन पहुँचता रहेगा।
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जैसे ही राशन खत्म होने वाला होगा, परिवार को केवल दिए गए नंबर पर सूचित करना होगा, और संत रामपाल जी महाराज की व्यवस्था से राशन उनके द्वार पर उपलब्ध हो जाएगा।
पुलिसकर्मी ने कहा- “ऐसी निस्वार्थ सेवा कहीं नहीं देखी”
गाँव के ही निवासी और हरियाणा पुलिस में कार्यरत संजय सिंह जी ने इस पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा की। संजय जी ने ही इस परिवार की स्थिति से संत रामपाल जी के शिष्यों को अवगत कराया था।
संजय जी ने कहा, “मैं हरियाणा पुलिस में हूँ और समाज को करीब से देखता हूँ। आज तक मैंने किसी भी सामाजिक संस्था या एनजीओ को इस तरह घर-घर जाकर, इतनी अच्छी गुणवत्ता का सामान देते हुए और परिवार को गोद लेते हुए नहीं देखा। संत रामपाल जी महाराज ने इंसानियत की जो मिसाल पेश की है, वह अतुलनीय है।”
पड़ोसी लक्ष्मण जी ने भी भावुक होते हुए कहा कि जो गरीबों की सुनता है, भगवान उसकी जरूर सुनता है। ऐसे महापुरुष को तो भगवान की तरह पूजा जाना चाहिए।
जेल की सलाखें नहीं रोक पाईं परोपकार
एक प्रश्न जो अक्सर उठता है कि संत रामपाल जी महाराज स्वयं जेल में हैं, फिर यह विशाल व्यवस्था कैसे चल रही है? इस पर उनके अनुयायियों का कहना है कि यह संत रामपाल जी महाराज की ‘शब्द शक्ति’ और आध्यात्मिक प्रेरणा है। जिस प्रकार एक टॉवर दूर रहकर भी मोबाइल को नेटवर्क देता है, उसी प्रकार संत रामपाल जी महाराज के आध्यात्मिक आदेशों से उनके लाखों अनुयायी समाज सेवा में दिन-रात जुटे हैं। उनके मार्गदर्शन में आज हजारों परिवार नशामुक्त हो रहे हैं और भूखे पेटों को भोजन मिल रहा है।
मूलभूत परिवर्तन
सामग्री प्राप्त करते समय महेंद्र जी भले ही कुछ बोल न सके, लेकिन उनकी आँखों की चमक और गुड्डी बहन के संतोष ने सब कुछ बयां कर दिया। गुड्डी बहन ने कहा, “जिसने हमारी सुध ली, वही हमारे लिए भगवान है। अब हमें बुढ़ापे की चिंता नहीं रही।”
संत रामपाल जी महाराज की यह ‘अन्नपूर्णा मुहिम‘ केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि समाज में गिरते मानवीय मूल्यों को पुनर्जीवित करने का एक महायज्ञ है।
महत्वपूर्ण सूचना: संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित यह सेवा पूर्णतः निःशुल्क है। इसके लिए लाभार्थी का नशामुक्त होना और मांस-मदिरा का त्याग करना अनिवार्य है।

