जब एक भूखा बच्चा रात में सो नहीं पाता, तो केवल उसका पेट खाली नहीं होता, बल्कि समाज की संवेदनाएं भी मौन हो जाती हैं। राजस्थान के पाली जिले के सीसरवाड़ा गांव में रहने वाला एक परिवार वर्षों से इसी पीड़ा को झेल रहा था। बीमारी, गरीबी और मजबूरी ने उनके जीवन को इस कदर जकड़ लिया था कि दो वक्त की रोटी भी एक सपना बन गई थी।
इस परिवार के मुखिया चेतन जी पिछले करीब नौ वर्षों से लकवे से पीड़ित हैं। उनके हाथ-पैर काम नहीं करते। कभी जो व्यक्ति निजी स्कूल में बच्चों को पढ़ाकर समाज को दिशा देता था, वही आज स्वयं दूसरों पर निर्भर हो गया। घर में उनकी बुजुर्ग मां, मेहनत-मजदूरी करके सब्जी बेचने वाली पत्नी और तीन छोटे बच्चे हैं, जिनकी आंखों में सपने हैं लेकिन हालात उन्हें बार-बार तोड़ देते हैं।
सरकारी पेंशन और दिन-रात की मेहनत भी परिवार के लिए पर्याप्त नहीं थी। कई बार ऐसा भी हुआ जब बच्चों को आधा पेट या खाली पेट सोना पड़ा। अधूरा मकान, बिना दरवाजों के कमरे, असुविधाजनक शौचालय और टूटी-फूटी छत इस परिवार की रोजमर्रा की सच्चाई बन चुकी थी।
जब पीड़ा संत रामपाल जी महाराज तक पहुँची
जहाँ इंसान हार मान लेता है, वहीं करुणा का मार्ग खुलता है। जैसे ही इस परिवार की वास्तविक स्थिति संत रामपाल जी महाराज तक पहुँची, उन्होंने बिना किसी विलंब के सहायता का आदेश दिया। उनका स्पष्ट संदेश है कि कोई भी गरीब, कोई भी बच्चा भूखा न सोए, चाहे इसके लिए स्वयं एक रोटी कम क्यों न खानी पड़े।
इसी आदेश के अंतर्गत अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से यह परिवार सहायता के दायरे में आया। यह मुहिम केवल भोजन वितरण का कार्य नहीं करती, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का आधार तैयार करती है।
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परिवार की वास्तविक स्थिति
चेतन जी की बीमारी के कारण परिवार में कोई स्थायी कमाई का साधन नहीं बचा था। पत्नी मजदूरी करके बच्चों का पेट भरने का प्रयास करती थी, लेकिन हालात अक्सर उसके बस से बाहर हो जाते थे। इनका परिवार जिस मकान में रह रहा है, वह अधूरा है।
छत पूरी नहीं, खिड़कियों और दरवाजों का अभाव है। स्नानघर और शौचालय अस्थायी हैं। दो छोटे कमरों में पूरा परिवार रहने को मजबूर है।
अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत सीसरवाड़ा में दी गई सहायता
संत रामपाल जी महाराज के आदेश और मार्गदर्शन से इस परिवार को पूरी तरह निशुल्क आवश्यक राशन सामग्री उपलब्ध कराई गई, जिसमें शामिल है—
| क्रमांक | सामग्री का नाम | मात्रा / विवरण |
| 1 | गेहूं का आटा | 25 किलो |
| 2 | चावल | 5 किलो |
| 3 | चीनी | 4 किलो |
| 4 | आलू | 5 किलो |
| 5 | प्याज | 5 किलो |
| 6 | चना | आवश्यक मात्रा |
| 7 | चना दाल | आवश्यक मात्रा |
| 8 | मूंग दाल | आवश्यक मात्रा |
| 9 | खाद्य तेल | 2 लीटर |
| 10 | नमक | आवश्यक मात्रा |
| 11 | हल्दी पाउडर | आवश्यक मात्रा |
| 12 | लाल मिर्च पाउडर | आवश्यक मात्रा |
| 13 | जीरा | आवश्यक मात्रा |
| 14 | चाय पत्ती | आवश्यक मात्रा |
| 15 | सूखा दूध | आवश्यक मात्रा |
| 16 | नहाने का साबुन | आवश्यक मात्रा |
| 17 | कपड़े धोने का साबुन/डिटर्जेंट | आवश्यक मात्रा |
यह सहायता किसी दया या दिखावे के लिए नहीं, बल्कि गुरुजी के आदेशित कर्तव्य के रूप में दी गई, ताकि परिवार की रसोई में चूल्हा लगातार जलता रहे।
“अब भूख की चिंता नहीं” – परिवार की भावनाएँ
राशन मिलने के बाद परिवार की आंखों में आंसू थे, लेकिन यह आंसू राहत और सुकून के थे। परिवार का कहना था कि अब कम से कम बच्चों को भूखे सोने की चिंता नहीं है। उन्हें यह भरोसा मिल गया है कि वे अकेले नहीं हैं।
यह सहायता एक बार की नहीं है
परिवार को यह स्पष्ट रूप से बताया गया कि अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत सहायता निरंतर जारी रहेगी। इसके लिए उन्हें आश्रम का संपर्क कार्ड दिया गया है। निर्देश है कि जब भी राशन समाप्त होने लगे, दो-चार दिन पहले सूचना देने पर नई सामग्री फिर से घर तक पहुँचा दी जाएगी। यह सहायता तब तक चलती रहेगी, जब तक परिवार की स्थिति में स्थायी सुधार नहीं हो जाता।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
गांव के लोगों, शिक्षकों और पड़ोसियों ने इस सेवा को अभूतपूर्व बताया। उनका कहना है कि आज तक उन्होंने किसी ऐसे संत को नहीं देखा जो मांगने नहीं, बल्कि खोज-खोजकर जरूरतमंदों तक सहायता पहुँचाता हो। सभी का मानना है कि यह कार्य किसी साधारण इंसान के बस का नहीं, बल्कि एक दिव्य करुणा का परिणाम है।
संत रामपाल जी महाराज की व्यापक सोच
अन्नपूर्णा मुहिम के साथ-साथ संत रामपाल जी महाराज द्वारा नशा मुक्त समाज, दहेज रहित विवाह, निशुल्क शिक्षा सामग्री वितरण, रक्तदान शिविर और गरीबों के लिए आवास जैसी अनेक जनकल्याणकारी योजनाएँ देशभर में संचालित की जा रही हैं।
पाली जिले का यह परिवार अकेला नहीं है। ऐसे हजारों परिवार आज संत रामपाल जी महाराज की करुणा और मार्गदर्शन से सम्मानपूर्वक जीवन जी रहे हैं। यह मुहिम केवल पेट भरने की नहीं, बल्कि टूटते जीवन को फिर से जोड़ने की पहल है।
जहाँ समाज सवाल पूछता है,
वहाँ संत रामपाल जी महाराज पहले भूख मिटाते हैं, फिर भविष्य संवारते हैं।

