आज हम आपको एक ऐसी मार्मिक कहानी से रू-बरू कराने जा रहे हैं, जो समाज की सच्चाई भी दिखाती है और इंसानियत की उम्मीद भी जगाती है। यह कहानी है पंजाब के जिला होशियारपुर के छोटे से गांव मुरादपुर में रहने वाले दो नन्हे बच्चों — शिव सुंदर और शिव कुमार परमार — की, जिनके सिर से बहुत छोटी उम्र में माता-पिता का साया उठ गया।
इन दोनों मासूमों की दुनिया अचानक उजड़ गई। न मां रही, न पिता। रिश्तेदारों ने किसी तरह जिम्मेदारी तो संभाली, लेकिन हालात इतने कठिन थे कि बच्चों का जीवन लगातार संघर्ष में बीत रहा था। ऐसे में जब कोई सहारा नहीं दिख रहा था, तब संत रामपाल जी महाराज स्वयं इन बच्चों के जीवन का आधार बने।
संत रामपाल जी महाराज ने थामा अनाथ बच्चों का हाथ
जब इन बच्चों की पीड़ा संत रामपाल जी महाराज तक पहुंची, तो उन्होंने तुरंत आदेश दिया कि इन बच्चों को कभी भूखा नहीं सोने दिया जाएगा। उनके निर्देश पर अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से लगातार इन बच्चों तक राशन और आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाई जाने लगी।
यह सहायता किसी एक दिन या एक महीने की नहीं है, बल्कि यह तब तक जारी रहेगी जब तक ये बच्चे स्वयं कमाने योग्य नहीं हो जाते — यह संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट आदेश है।
कैसी है बच्चों की स्थिति
इन बच्चों का संसार एक साधारण-सा कमरा, सीमित संसाधन, गर्मी में केवल एक पंखा है — लेकिन इन सबके बीच जो सबसे महत्वपूर्ण है, वह है अब भूख का डर नहीं।
संत रामपाल जी महाराज की कृपा से इन बच्चों के लिए हर महीने राशन की पूरी व्यवस्था की जाती है, जिससे उनके खाने-पीने की चिंता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।
बच्चों की जुबानी सच्चाई
जब शिव सुंदर और शिव कुमार से बात की गई, तो उन्होंने बताया:
- वे स्कूल में पढ़ते हैं
- उन्हें यूनिफॉर्म, फीस या किताबों की कोई समस्या नहीं आती
- पिछले दो सालों से संत रामपाल जी महाराज की ओर से उन्हें नियमित सहायता मिल रही है
जब उनसे पूछा गया कि वे संत रामपाल जी महाराज को क्या कहना चाहेंगे, तो बच्चों ने सादगी से कहा:
“हम संत रामपाल जी महाराज का धन्यवाद करते हैं।”
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मुरादपुर गांव के सरपंच ने क्या कहा
गांव के सरपंच अमनदीप सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि:
- इन बच्चों के माता-पिता दोनों का निधन हो चुका है
- यदि संत रामपाल जी महाराज की सहायता न होती, तो इन बच्चों का जीवन अत्यंत कठिन हो जाता
- आज के समय में कोई 10 रुपये देने को तैयार नहीं, लेकिन संत रामपाल जी महाराज हर महीने हजारों रुपये की सामग्री इन बच्चों तक पहुंचवा रहे हैं
सरपंच ने यह भी कहा कि संत रामपाल जी महाराज न केवल राशन देते हैं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, समय पर भोजन और जीवन की गरिमा का भी पूरा ध्यान रखते हैं।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सहायता सामग्री
संत रामपाल जी महाराज के आदेश से बच्चों को जो राहत सामग्री नियमित रूप से दी जाती है, उसमें शामिल है:
| क्रमांक | सहायता श्रेणी | सामग्री / सुविधा | मात्रा / विवरण |
| 1 | खाद्य सामग्री | गेहूं का आटा | 25 किलो (मासिक) |
| 2 | खाद्य सामग्री | चावल | 5 किलो (मासिक) |
| 3 | खाद्य सामग्री | आलू | 5 किलो |
| 4 | खाद्य सामग्री | प्याज | 5 किलो |
| 5 | खाद्य सामग्री | दाल | 2 किलो |
| 6 | खाद्य सामग्री | चीनी | 2 किलो |
| 7 | खाद्य सामग्री | सरसों का तेल | 1 लीटर |
| 8 | खाद्य सामग्री | Amul दूध पाउडर | 1 किलो |
| 9 | खाद्य सामग्री | नमक | आवश्यक मात्रा |
| 10 | खाद्य सामग्री | हल्दी पाउडर | आवश्यक मात्रा |
| 11 | खाद्य सामग्री | लाल मिर्च पाउडर | आवश्यक मात्रा |
| 12 | खाद्य सामग्री | चाय पत्ती | आवश्यक मात्रा |
| 13 | स्वच्छता सामग्री | नहाने का साबुन | आवश्यक मात्रा |
| 14 | स्वच्छता सामग्री | कपड़े धोने का साबुन | आवश्यक मात्रा |
| 15 | शिक्षा सहायता | स्कूल फीस | आवश्यकता अनुसार |
| 16 | शिक्षा सहायता | स्कूल ड्रेस | आवश्यकता अनुसार |
| 17 | शिक्षा सहायता | किताबें व कॉपियाँ | आवश्यकता अनुसार |
इसके अतिरिक्त, यदि बच्चों को कपड़े, स्कूल की किताबें, ड्रेस या कोई अन्य जरूरत होती है, तो वह भी संत रामपाल जी महाराज के आदेश से तुरंत उपलब्ध कराई जाती है।
सहायता कब तक मिलेगी?
सेवकों ने स्पष्ट कहा:
“संत रामपाल जी महाराज का आदेश है कि जब तक इन बच्चों के घर में कोई सदस्य कमाने योग्य नहीं हो जाता, तब तक इन्हें पूरी सहायता मिलती रहेगी — चाहे 10 साल लगें या 15 साल।”
समाज के लिए संदेश
आज समाज में अक्सर कहा जाता है कि संत केवल मांगते हैं, लेकिन संत रामपाल जी महाराज एक ऐसे संत हैं जो घर-घर जाकर जरूरतमंदों को खोजते हैं और उन्हें देते हैं।
वे न केवल राशन उपलब्ध कराते हैं, बल्कि:
- अनाथ बच्चों की परवरिश
- गरीबों के लिए मकान
- दहेज-मुक्त विवाह
- रक्तदान शिविर
- आपदा में भोजन व्यवस्था
जैसे कार्य भी स्वयं अपने मार्गदर्शन में करवा रहे हैं।
मुरादपुर गांव के ये दो बच्चे केवल एक उदाहरण हैं। ऐसे सैकड़ों नहीं, हजारों परिवार हैं, जिनके जीवन में संत रामपाल जी महाराज ने आशा की रोशनी जलाई है। जहां दुनिया मदद से पहले सवाल पूछती है, वहीं संत रामपाल जी महाराज पहले पेट भरते हैं, फिर भविष्य संवारते हैं। यही कारण है कि आज जरूरतमंद उन्हें केवल संत नहीं, गरीबों का सच्चा मसीहा कहते हैं।

