गया जिले के परैया में संत रामपाल जी ने मोहम्मद सिराज के परिवार को दिया सहारा

बिहार के गया जिले में मानवता की मिसाल: मोहम्मद सिराज के घर पहुँची संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम

बिहार के गया जिले का परैया प्रखंड हाल ही में एक ऐसी हृदयस्पर्शी घटना का साक्षी बना, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि इंसानियत आज भी जीवित है। यहाँ के एक किराए के मकान में रहने वाले राजमिस्त्री मोहम्मद सिराज का परिवार जब बेबसी के सबसे गहरे अंधेरे में था, तब संत रामपाल जी महाराज उनके जीवन में उम्मीद की एक नई किरण बनकर प्रकट हुए।

एक झटके में बिखरा हँसता-खेलता परिवार

मोहम्मद सिराज एक र राजमिस्त्री हैं, जो दिन-रात पसीना बहाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। परिवार में उनकी पत्नी शफीहा परवीन और दो छोटे बच्चे साथ रहते हैं (कुल 4 सदस्य), जो अभी स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं। दो बड़े बेटों का निकाह हो चुका है और वे अलग रहते हैं।

सब कुछ सामान्य चल रहा था कि तभी तीन महीने पहले काम के दौरान एक हादसा हुआ। पाड़ (बांस का अस्थायी ढांचा) टूटने से सिराज ऊँचाई से गिर पड़े और उनका पैर बुरी तरह फ्रैक्चर हो गया। इस एक दुर्घटना ने उनका पैर ही नहीं तोड़ा, बल्कि घर की आर्थिक स्थिति और परिवार की उम्मीदों को भी गहरी चोट पहुँचा दी। हादसे को अब तीन महीने बीत चुके हैं। पहले डेढ़ महीने तक पैर के ऊपरी हिस्से तक प्लास्टर चढ़ा रहा। उसके बाद अगले डेढ़ महीने तक नीचे के हिस्से में प्लास्टर रखा गया।

अब डॉक्टर ने पैर के काला पड़ने के कारण प्लास्टर हटा दिया है। हालांकि डॉक्टर ने साफ शब्दों में बताया है कि पूरी तरह स्वस्थ होने में अभी छह महीने और लगेंगे। एक दिहाड़ी मजदूर के लिए बिस्तर पर पड़ जाना किसी आपदा से कम नहीं था। धीरे-धीरे जमा पूँजी इलाज में खत्म हो गई, बच्चों की ट्यूशन छूट गई और नौबत यहाँ तक आ गई कि घर में दो वक्त की रोटी के लाले पड़ गए।

जब अल्लाह ने सुनी पुकार: संत रामपाल जी महाराज बने सहारा

मोहम्मद सिराज बताते हैं कि उन्होंने अपनी बेबसी में खुदा से मदद की गुहार लगाई थी। इसी बीच उन्होंने सोशल मीडिया पर संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के बारे में जाना और मदद के लिए संपर्क किया। संत रामपाल जी महाराज के सेवादारों ने पीड़ित परिवार के घर पहुँचकर उनकी दयनीय स्थिति का जायजा लिया और समस्त विवरण सतलोक आश्रम के माध्यम से महाराज जी के समक्ष प्रस्तुत कर सहायता की करुण पुकार लगाई।

पीड़ित परिवार की दयनीय स्थिति का संज्ञान लेते हुए संत रामपाल जी महाराज ने सहृदयता पूर्वक यह आदेश दिया कि अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से उस परिवार की मदद की जाए।

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परिवार को प्राप्त हुई व्यापक सहायता

गया जिले के परैया में संत रामपाल जी ने मोहम्मद सिराज के परिवार को दिया सहारा

संत रामपाल जी महाराज ने केवल अनाज ही नहीं, बल्कि एक पूरी रसोई की रौनक सिराज के घर लौटा दी। संत रामपाल जी महाराज जी के आदेश का पालन करते हुए परिवार को निम्नलिखित सामग्री प्रदान की गई:

क्र.सं.सामग्री का नाममात्रा
1आशीर्वाद आटा15 किलो
2बासमती चावल15 किलो
3आलू5 किलो
4प्याज5 किलो
5चीनी2 किलो
6हरी मूंग दाल1 किलो
मूंग दाल1 किलो
8चना दाल1 किलो
9काले चने1 किलो
10पीली मूंग दाल1 किलो 
11सरसों का तेल2 लीटर
12सूखा दूध (Milk Powder)1 किलो
13हल्दी200 ग्राम
14लाल मिर्च100 ग्राम
15जीरा150 ग्राम
16टाटा चाय पत्ती250 ग्राम
17टाटा नमक1 किलो
18अचार1 किलो
19नहाने का साबुन1 किलो
20कपड़े धोने का साबुन1 किलो
21घड़ी सर्फ1 किलो
22गैस सिलेंडर1 नग (भरा हुआ)
23विशेष सहायतामकान का ₹1000 किराया और दवाइयों हेतु नगद राशि

इस राहत सामग्री को प्राप्त करने के पश्चात मोहम्मद सिराज की आँखों में आँसू भर आए। उस दिन बिस्तर पर पड़े उस असहाय पिता की आँखें नम थीं, परंतु ये आँसू बेबसी के नहीं, बल्कि कृतज्ञता के थे। उन्होंने भावुक होकर कहा “हमारी पुकार अल्लाह ने सुन ली। संत रामपाल जी महाराज ने हमारी आवाज़ सुन ली।”

ग्रामीणों और पड़ोसियों के खिले चेहरे

इस मानवीय कार्य को देखकर पड़ोस में रहने वाले ग्रामीण भी अचंभित हैं।

पड़ोसी राजेश कुमार जी ने बताया, “51 साल की उम्र में मैंने पहली बार ऐसा संत देखा है, इस संत ने अन्नपूर्णा मुहिम के तहत नमक से लेकर तेल तक हर ज़रूरी सामान इस गरीब परिवार को दिया। संत रामपाल जी महाराज जी ने परैया ज़िले में आकर राशन दिया, मकान का किराया भी चुकाया और पैसों की कमी से रुकी बच्चों की पढ़ाई दोबारा शुरू करवाई है। मैं उन्हें सौ सौ बार नमन करता हूँ।”

धर्मेंद्र दास जी ने दुख जताते हुए कहा,“सिराज जी पहले मेहनत करके घर चला रहे थे, लेकिन इस दुर्घटना के बाद परिवार खाने तक को तरस गया। हम रोज इनकी हालत देखते थे, पर कोई मदद के लिए आगे नहीं आया। मैंने पहली बार इतना दयालु संत देखा है। संत रामपाल जी महाराज ने इस गरीब परिवार को नई उम्मीद दी है। मैं उनका बार-बार धन्यवाद करता हूँ।”

निरंतर सेवा का संकल्प

संत रामपाल जी महाराज की यह मुहिम केवल एक बार की सहायता नहीं है। टीम ने सिराज को एक ‘सेवा कार्ड’ प्रदान किया है और आश्वस्त किया है कि:

  • राशन खत्म होने से दो दिन पूर्व सूचना देने पर सामग्री पुनः पहुँचा दी जाएगी।
  • जब तक सिराज पूर्णतः स्वस्थ होकर काम पर नहीं लौटते, तब तक मकान का किराया महाराज जी द्वारा दिया जाएगा।
  • बच्चों की पढ़ाई का खर्च, स्कूल ड्रेस और किताबों की जिम्मेदारी भी महाराज जी ने उठाई है।

मानवता ही सर्वोपरि धर्म

संत रामपाल जी महाराज का यह कार्य सिद्ध करता है कि

“जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा।

हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।।”

यह कोई साधारण पंक्तियां नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए एक जीवन-दर्शन है जिसे संत रामपाल जी महाराज अपने शिष्यों को उनके जीवन में उतारने के लिए निरंतर प्रेरित करते हैं। उनके अनुसार, मानव सेवा ही परम धर्म है, और रक्तदान और देहदान इसकी एक श्रेष्ठतम अभिव्यक्ति है।

उन्होंने जात-पात और मजहब की दीवारों को तोड़कर केवल पीड़ित की पीड़ा को प्राथमिकता दी है। उनकी यह ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ आज बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश में उन लोगों के लिए ढाल बन रही है जिनका समाज में कोई सहारा नहीं है।

विशेष सूचना:

अन्नपूर्णा मुहिम के तहत सहायता केवल उन जरूरतमंदों को दी जाती है जो पूर्णतः नशामुक्त और शाकाहारी जीवन जीने का संकल्प लेते हैं। 

यह सेवा मुनींद्र धर्मार्थ ट्रस्ट के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज के निर्देशन में निःशुल्क संचालित है। यदि आपके आसपास कोई ऐसा जरूरतमंद परिवार है जो इन शर्तों को पूरा करता हो, तो सहायता के लिए मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट से संपर्क किया जा सकता है।

संपर्क सूत्र: 7759004111, 7759004222

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