रोहतक, हरियाणा: आधुनिक युग की भागदौड़ और स्वार्थ के बीच मानवता की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने समाज के सामने एक नया आदर्श प्रस्तुत किया है। रोहतक जिले के गांव आसन में दो छोटे बच्चे, जो नियति की क्रूर मार के कारण बहुत दुखी हो गए थे, उनके जीवन में संत रामपाल जी महाराज एक आशा की किरण बनकर आए हैं। अपनी ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के माध्यम से संत जी ने न केवल इन बच्चों की भूख मिटाने का संकल्प लिया है, बल्कि उनके भविष्य को सुरक्षित करने की जिम्मेदारी भी उठाई है।
सूनी आँखों में हज़ारों सवाल: परिवार की मार्मिक स्थिति
गांव आसन के एक छोटे से घर में रहने वाले 15 वर्षीय देव और उनके 14 वर्षीय छोटे भाई की कहानी किसी का भी दिल दहला सकती है। इन मासूम बच्चों के सिर से बड़ों का साया पूरी तरह उठ चुका है।
- माता-पिता: पिता का निधन 5 वर्ष पहले हुआ और माता का साया भी 9 महीने पहले सिर से उठ गया।
- दादा-दादी: वे माता-पिता के जाने से पहले ही इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे।
घर में कमाने वाला कोई सदस्य नहीं है। अब तक उनके ताऊ, रोहतास जी, अपनी कठिन परिस्थितियों के बावजूद बच्चों को खाना दे रहे थे, लेकिन बच्चों का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा था। इन बच्चों के पास रहने को टूटा हुआ घर और आँखों में अनगिनत सवाल थे कि आखिर उनका जीवन कैसे कटेगा।
संत रामपाल जी महाराज ने थामा हाथ: अन्नपूर्णा मुहिम के तहत लिया गोद
जब इन बच्चों की दयनीय स्थिति की सूचना संत रामपाल जी महाराज तक पहुँची, तो उन्होंने तुरंत ‘मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट’ के माध्यम से सहायता भेजने का आदेश दिया। संत जी ने इस परिवार को गोद लेते हुए सुनिश्चित किया कि अब ये बच्चे कभी भूखे नहीं सोएंगे।
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राहत सामग्री की विस्तृत सूची:

संत रामपाल जी महाराज ने बच्चों की रसोई के लिए वह हर जरूरी सामान भेजा है, जिसकी उन्हें आवश्यकता थी:
| क्र.सं. | सामग्री का नाम | मात्रा |
| 1 | आटा | 15 किलो |
| 2 | चावल | 5 किलो |
| 3 | चीनी | 2 किलो |
| 4 | आचार | ½ किलो |
| 5 | लाल चने दाल | 1 किलो |
| 6 | हरी मूंग दाल | 1 किलो |
| 7 | कपड़े धोने का साबुन | 1 किलो |
| 8 | आलू | 5 किलो |
| 9 | प्याज | 5 किलो |
| 10 | हल्दी | 150 ग्राम |
| 11 | जीरा | 150 ग्राम |
| 12 | लाल मिर्च | 100 ग्राम |
| 13 | टाटा नमक | 1 किलो |
| 14 | टाटा चाय | 250 ग्राम |
| 15 | नहाने का साबुन | 4 पीस |
| 16 | सूखा दूध (Milk Powder) | ½ किलो |
| 17 | कपड़े धोने का सर्फ | ½ किलो |
| 18 | सरसों का तेल | 1 लीटर |
शिक्षा और अन्य सुविधाओं का बड़ा संकल्प
संत रामपाल जी महाराज की यह सेवा केवल राशन तक सीमित नहीं है। बच्चों की जरूरतों को देखते हुए संत जी ने निम्नलिखित अतिरिक्त सहायता का संकल्प लिया है:
- शिक्षा का खर्च: जो बच्चा पढ़ाई छोड़ चुका है, संत जी उसकी पढ़ाई दोबारा शुरू करवाएंगे और स्कूल का पूरा खर्च उठाएंगे।
- स्कूल किट: बच्चों को स्कूल ड्रेस, जूते और किताबें निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।
- गैस सिलेंडर: बच्चों की माँग पर संत रामपाल जी महाराज जी से जल्द ही प्रार्थना करके उनके घर तक गैस सिलेंडर पहुंचाई जाएगी।
- स्वास्थ्य सेवा: यदि परिवार में कोई बीमार होता है, तो उसके इलाज की पूरी जिम्मेदारी और उसका खर्च भी संत रामपाल जी महाराज जी के आदेशों पर ट्रस्ट द्वारा वहन किया जाएगा।
ग्रामीणों और परिजनों ने जताया आभार
बच्चों के ताऊ, रोहतास जी ने भावुक होते हुए कहा,
“हम हृदय से संत रामपाल जी महाराज का धन्यवाद करते हैं। वे एक महान संत हैं जो इस संसार में निस्वार्थ भाव से परोपकार कर रहे हैं। आज के समय में प्रचार करने वाले तो बहुत हैं, लेकिन ऐसी वास्तविक मदद करने वाला मैंने आज तक कोई नहीं देखा। कई संस्थाएँ दान माँगने या पर्चियाँ काटने आती हैं, लेकिन यहाँ स्थिति बिल्कुल उलट है। संत रामपाल जी महाराज ने इस राशन और सहायता के बदले कोई चार्ज नहीं लिया है। उन्होंने यह सारा सामान पूर्णतः निशुल्क भेजा है।।”
वहीं नन्हे देव ने हाथ जोड़कर संत रामपाल जी महाराज के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। अब इन बच्चों के मन से राशन खत्म होने का भय पूरी तरह समाप्त हो चुका है। संत जी ने उन्हें कुछ विशेष हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध कराए हैं, जिन पर राशन समाप्त होने से मात्र दो दिन पूर्व सूचित करने का निर्देश दिया गया है। संत रामपाल जी महाराज ने ऐसी सुदृढ़ व्यवस्था की है कि सूचना मिलते ही नया राशन बच्चों के घर के द्वार पर पहुँचा दिया जाएगा, ताकि उनकी रसोई में कभी अभाव की स्थिति न आए।
कलयुग में सतयुग का शंखनाद: संत रामपाल जी महाराज की दिव्य लोक-कल्याणकारी मुहिमें
आज के दौर में जहां मानवता केवल कागजी नारों और विज्ञापनों तक सिमट कर रह गई है, वहीं संत रामपाल जी महाराज अपने अद्वितीय कार्यों के माध्यम से धरातल पर वास्तविक परिवर्तन ला रहे हैं। संत जी का स्पष्ट उद्घोष है-
“रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान, हर जरूरतमंद को दे रहा कबीर भगवान”
संत जी इस पृथ्वी को स्वर्ग समान बनाने के संकल्प के साथ कलयुग के भीतर ही ‘सतयुग’ का आगाज़ कर चुके हैं। उनके मार्गदर्शन में चल रही मुहिमें न केवल अभावों को दूर कर रही हैं, बल्कि समाज में एक नई चेतना का संचार कर रही हैं।
धरातल पर फलती-फूलती जनकल्याणकारी योजनाएँ
संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित मुहिमें समाज के हर वर्ग को सुरक्षा और स्वावलंबन प्रदान कर रही हैं:
- अन्नपूर्णा मुहिम: यह मुहिम न केवल अनाथ बच्चों का पेट भर रही है, बल्कि असहाय परिवारों के लिए एक अभिभावक की भूमिका निभा रही है।
- निशुल्क चिकित्सा एवं सुरक्षा: धनाना धाम और आसपास के क्षेत्रों में 24 घंटे निशुल्क एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध है, जो आपातकालीन स्थिति में जीवन रक्षक सिद्ध हो रही हैं।
- शिक्षा और महिला सशक्तिकरण: गांव में बेटियों की शिक्षा हेतु निशुल्क बस सेवा और एक गांव की प्रार्थना पर गांव के अंदर आधुनिक लाइब्रेरी का निर्माण कर संत जी ने ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ और उच्चतम शिक्षा को गांव के अंदर पहुंचाने के कार्य को सफल बना रहे हैं।
- जीव दया: ग्रामीणों की प्रार्थना पर गौशालाओं का निर्माण कर उन्होंने जीव-जंतुओं के संरक्षण का भी अनूठा उदाहरण पेश किया है।
- बाढ़ राहत सेवा: संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के तहत कई गांवों में आवश्यकतानुसार पाइप और मोटर उपलब्ध कराकर बड़े स्तर पर बाढ़ का पानी निकालने का लोक-कल्याणकारी कार्य किया है।
आध्यात्मिक क्रांति: नशा मुक्त और रोग मुक्त समाज
संत रामपाल जी महाराज केवल भौतिक अभावों को ही दूर नहीं कर रहे, बल्कि शास्त्र-प्रमाणित भक्ति के माध्यम से एक नैतिक समाज का निर्माण कर रहे हैं। उनके ज्ञान से जुड़कर लाखों लोग नशा, मांस और अन्य सामाजिक बुराइयों को त्याग कर एक शुद्ध जीवन जी रहे हैं।
विशेष सूचना:
संत रामपाल जी महाराज के सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा संचालित अन्नपूर्णा मुहिम पूर्णतः निःशुल्क सेवा योजना है। इस योजना के अंतर्गत सहायता केवल उन पात्र एवं जरूरतमंद परिवारों को प्रदान की जाती है जो पूर्ण रूप से नशामुक्त हों तथा मांस एवं मदिरा का सेवन न करते हों। यदि सेवन करते हैं तो राहत सामग्री प्राप्त होने से पहले उन्हे इन बुराईयों का परित्याग करना होगा।
यदि आपके ज्ञान या संपर्क में कोई ऐसा योग्य परिवार हो जो उपर्युक्त शर्तों का पालन करता हो, तो कृपया उन्हें सहायता प्राप्त करने हेतु मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट से संपर्क करने के लिए प्रेरित करें।
संपर्क सूत्र: 9992800455, 999260771, 9992600161, 9992600162

