नर्मदा, गुजरात: आज के स्वार्थपरक युग में, जहां लोग अपनों से मुख मोड़ लेते हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज एक ऐसे मसीहा बनकर उभरे हैं, जो समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझते हैं। गुजरात के नर्मदा जिले के धामद्रा गांव (स्टैचू ऑफ यूनिटी के समीप) से एक ऐसी ही हृदयस्पर्शी घटना सामने आई है, जहां संत रामपाल जी महाराज ने एक अत्यंत निर्धन और बेसहारा परिवार को नया जीवन प्रदान किया है।
टूटी छत और सूनी आँखें: विक्रम भाई के परिवार की व्यथा
धामद्रा गांव में रहने वाले विक्रम भाई तड़वी का जीवन किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं था। उनका परिवार केवल दो सदस्यों का है: वे स्वयं और उनका पोता। नियति ने इस परिवार पर दोहरी मार की है:
- विक्रम भाई की स्थिति: उनकी दृष्टि (आँखों की रोशनी) बहुत कमजोर हो चुकी है और रीढ़ की हड्डी की बीमारी के कारण उनका चलना-फिरना भी दूभर है।
- पोते की स्थिति: विक्रम भाई का पोता मानसिक रूप से अस्वस्थ है, जिसके कारण वह अपनी और अपने दादा की देखभाल करने में असमर्थ है। उनसे बात कर पाना कठिन पड़ता है।
- घर की दुर्दशा: जिस घर में वे रह रहे थे, उसकी हालत किसी खंडहर जैसी थी। घर का दरवाज़ा टूटा हुआ था, जिससे जंगली जानवरों का डर बना रहता था। छत पूरी तरह ढह चुकी थी, जिसके कारण अंदर पेड़-पौधे और झाड़ियाँ उग आई थीं। वर्षा से बचने के लिए उन्होंने केवल पतरे की चादरें और फटे हुए कपड़े लगाए हुए थे। घर में शौचालय और स्नानघर जैसी बुनियादी सुविधाओं का नामोनिशान तक नहीं था। उनके पास बर्तनों का भी अभाव था। घर के पीछे वनस्पति और कई पेड़ पौधे उग गए, जिससे विषैले जंगली जानवरों का डर बना रहता है।
ऐसी दयनीय स्थिति में, जहां सरकारी लाभ पहुंचने में भी दस्तावेज़ी बाधाएं आ रही थीं, वहां संत रामपाल जी महाराज की करुणा ने प्रवेश किया।
संत रामपाल जी महाराज ने पहुंचाई राहत सामग्री
जब इस परिवार की जानकारी संत रामपाल जी महाराज तक पहुंची, तो उन्होंने तुरंत अपनी ‘अन्नपूर्णा मुहिम‘ के अंतर्गत मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट के माध्यम से सहायता भेजने का आदेश दिया। संत जी ने सुनिश्चित किया कि विक्रम भाई के घर की रसोई फिर से प्रज्ज्वलित हो और उनके पास सम्मानजनक जीवन जीने के साधन हों।
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प्रदान की गई सामग्री की सूची:

| क्र. सं. | सामग्री | मात्रा |
| 1 | आटा | 15 किलो |
| 2 | चावल | 5 किलो |
| 3 | आलू | 5 किलो |
| 4 | प्याज | 5 किलो |
| 5 | चना दाल | ½ किलो |
| 6 | मूंग दाल | ½ किलो |
| 7 | काले चने | ½ किलो |
| 8 | हल्दी | 150 ग्राम |
| 9 | लाल मिर्च पाउडर | 150 ग्राम |
| 10 | टाटा नमक | 1 किलो |
| 11 | जीरा | 150 ग्राम |
| 12 | कपड़े धोने का साबुन | 1 किलो |
| 13 | नहाने का साबुन | 4 पीस |
| 14 | सर्फ पाउडर | ½ किलो |
| 15 | सूखा दूध (Milk Powder) | ½ किलो |
| 16 | अचार | ½ किलो |
| 17 | सरसों तेल | 1 लीटर |
| 18 | चीनी | 2 किलो |
| 19 | बर्तन सेट | एक बाल्टी, थाली, प्लेट, जग, दो कटोरी, दो गिलास और दो स्टेनलेस स्टील हांडा (कलसी) |
| 20 | बिस्तर और अन्य | चारपाई (खाट), गद्दा और पहनने के लिए दो जोड़ी चप्पल |
“जिसका कोई नहीं, उसका खुदा है”: मुखिया और ग्रामीणों की प्रतिक्रिया
गांव के मुखिया भानु प्रसाद चंदू भाई तड़वी ने संत रामपाल जी महाराज के इस कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा:
“विक्रम भाई की हालत बहुत खराब थी, वे काम करने की स्थिति में भी नहीं थे। हमने सरकारी लाभ दिलवाने की कोशिश करी थी लेकिन दस्तावेज़ों की कमी के कारण नहीं मिल पा रहा था। ऐसे में संत रामपाल जी महाराज की यह मुहिम किसी ‘जीवनदान’ से कम नहीं है। यह बहुत ही नेक कार्य है और समाज में ऐसे ही कार्यों की आवश्यकता है।”
ग्रामीणों ने आश्चर्य और प्रसन्नता व्यक्त की कि कैसे एक संत, जो स्वयं भौतिक रूप से दूर हैं, देश के कोने-कोने में जरूरतमंदों की सुध ले रहे हैं।
आजीवन सहायता का संकल्प
संत रामपाल जी महाराज ने केवल एक बार की सहायता नहीं, बल्कि आजीवन सहयोग का वचन दिया है। संत जी ने विशेष ‘राहत कार्ड’ और हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। जैसे ही राशन समाप्त होने वाला होगा, सूचना मिलते ही संत जी के मार्गदर्शन में नया राशन सीधे उनके घर पहुंचा दिया जाएगा। विक्रम भाई को कहीं भी चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं होगी।
कलयुग में सतयुग का संचार: संत जी की मर्यादा
संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट संदेश है कि भक्ति और समाज सेवा साथ-साथ चलते हैं। इस अन्नपूर्णा मुहिम का लाभ प्राप्त करने के लिए संत जी ने कुछ कल्याणकारी शर्तें रखी हैं:
- लाभार्थी पूर्णतः नशामुक्त होना चाहिए।
- वह किसी भी प्रकार से मांस का सेवन नहीं करेगा।
संत जी का उद्देश्य न केवल भूख मिटाना है, बल्कि एक चरित्रवान और व्यसनमुक्त समाज का निर्माण करना भी है। संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा बताए गए तत्वज्ञान को सुनकर जीवन में उतारने से नशे जैसी अन्य बुराईयां आसानी से त्यागी जा सकती हैं।
विशेष सूचना एवं संपर्क सूत्र
संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा असहायों को भोजन, गैस सिलेंडर, बीमारों को उपचार और गरीब बच्चों को शिक्षा हेतु ड्रेस, किताबें व अन्य सामग्री निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। यदि कोई लाभार्थी नशा करता है या मांसाहार करता है तो उसे राहत सामग्री प्राप्त करने से पूर्व इन सभी बुराइयों को पूर्ण रूप से त्यागना अनिवार्य होगा। यदि आपके आसपास कोई ऐसा जरूरतमंद परिवार है, जो नशामुक्त और मांस आहार ना करता हो, तो आप निम्नलिखित नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं: संपर्क सूत्र (गुजरात): 9725088322, 7203000125

