हरियाणा के रोहतक जिले के गांव भालोट में रहने वाले एक साधारण परिवार की स्थिति आज भी उन सैकड़ों परिवारों की सच्चाई को सामने लाती है, जो बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस परिवार के पास न पर्याप्त राशन है, न सुरक्षित आवास और न ही स्थायी आय का कोई साधन। बुजुर्ग पिता आंखों की गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, जबकि बेटी आर्थिक तंगी के कारण अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पा रही है। ऐसे हालात में संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम इस परिवार के लिए राहत की किरण बनकर सामने आई।
गांव भालोट में अन्नपूर्णा मुहिम के तहत मदद
गांव भालोट, जिला रोहतक में मुनिंदर धर्मार्थ ट्रस्ट, कुरुक्षेत्र के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज के शिष्य अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचाने पहुंचे। इस मुहिम के तहत संत रामपाल जी महाराज की ओर से गांव-गांव और शहर-शहर जाकर ऐसे परिवारों को चिन्हित किया जाता है, जिनके पास जीवन यापन के पर्याप्त साधन नहीं हैं। इस पहल का उद्देश्य केवल राशन देना नहीं, बल्कि परिवारों को सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर करना है।
खंडहर हो रहे जर्जर ढांचे में खतरे से भरी जिंदगी
जिस परिवार के लिए सहायता पहुंची, उसका मकान बेहद जर्जर स्थिति में है। घर का प्रवेश द्वार लकड़ी का है, जो टूट चुका है। मकान में नीचे दो कमरे और ऊपर एक कमरा है। छत कच्ची मिट्टी की बनी हुई है, जिसमें दरारें स्पष्ट दिखाई देती हैं। कुछ स्थानों पर लकड़ी की कड़ियां टूट चुकी हैं और छत को सहारा देने के लिए अस्थायी सपोर्ट लगाए गए हैं। दीवारों में भी दरारें हैं, जिससे यह मकान परिवार के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है।
बहुत ही खराब परिवार की आर्थिक हालात
परिवार के मुखिया सत्यवान हैं, जिनके साथ उनकी पत्नी और बेटी रहती हैं। सत्यवान किसी नियमित रोजगार में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने बताया कि आंखों की बीमारी के कारण काम करना मुश्किल हो गया है। पहले इलाज कराया गया, लेकिन समस्या पूरी तरह ठीक नहीं हुई। आय का कोई स्थायी स्रोत न होने के कारण परिवार का गुजारा बेहद कठिन हो गया है। कई बार केवल एक समय का भोजन ही संभव हो पाता है।
बुजुर्ग की बीमारी और रोजाना का संघर्ष

सत्यवान की आंखों में लगातार पानी आता है, जिससे उनकी दृष्टि प्रभावित हो चुकी है। इस कारण वे दिहाड़ी मजदूरी भी नहीं कर पाते। उनकी पत्नी ने बताया कि कभी-कभी अगर कहीं से थोड़ी दिहाड़ी मिल जाए तो उसी से घर का खर्च चलता है। सरकार द्वारा पीला राशन कार्ड बनाया गया है, लेकिन उससे मिलने वाला राशन परिवार की सभी जरूरतें पूरी करने में सक्षम नहीं है।
बेटी की शिक्षा पर आर्थिक संकट
परिवार की बेटी गंगा कंप्यूटर कोर्स के लिए रोहतक जाती थी। हालांकि, बस किराया न होने के कारण अब उसे पढ़ाई छोड़नी पड़ी है। गंगा ने बताया कि पढ़ाई जारी रखने की इच्छा तो है, लेकिन आर्थिक तंगी सबसे बड़ी बाधा बन गई है। इस स्थिति ने परिवार की चिंता और बढ़ा दी है, क्योंकि शिक्षा के बिना भविष्य और अधिक असुरक्षित हो सकता है।
भालोट गांव के जरूरतमंद परिवार को दी गई राहत सामग्री की सूची:
| क्रम | सामग्री | छोटा परिवार (1-3 सदस्य) |
| 1 | आटा | 25 किलो |
| 2 | चावल | 5 किलो |
| 3 | चीनी | 2 किलो |
| 4 | सरसों तेल | 1 लीटर |
| 5 | चना दाल | 1 किलो |
| 6 | मूंग दाल | 1 किलो |
| 7 | हल्दी | 150 ग्राम |
| 8 | जीरा | 150 ग्राम |
| 9 | लाल मिर्च | 100 ग्राम |
| 10 | नहाने का साबुन | 4 टिक्की |
| 11 | कपड़े धोने का साबुन | 1 पैकेट |
| 12 | टाटा नमक | 1 पैकेट |
| 13 | अमूल सूखा दूध | 1 किलो |
| 14 | आलू | 5 किलो |
| 15 | प्याज | 5 किलो |
| 16 | अचार | 1 पैकेट |
| 17 | कपड़े धोने का सर्फ | 1 पैकेट |
| 18 | टाटा अग्नि चाय पत्ती | 1 पैकेट |
यह सारी सामग्री संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई है। यह सामग्री परिवार की बुनियादी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर दी गई। यह सहायता तब तक जारी रहेगी जब तक कि परिवार की आर्थिक स्थिति सुधर नहीं जाती और वे कमाने योग्य नहीं हो जाते।
निरंतर सहायता का प्रावधान
मुनिंदर धर्मार्थ ट्रस्ट के सेवादार भगत बिजेंद्र दास ने बताया कि यह सहायता केवल एक बार की नहीं है। संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार, जब तक परिवार आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हो जाता, तब तक यह सहायता निरंतर मिलती रहेगी। परिवार को एक संपर्क कार्ड दिया गया है, जिस पर अंकित नंबरों पर राशन समाप्त होने से पहले संपर्क करने पर दोबारा सामग्री उपलब्ध करा दी जाएगी।
सरकारी सहायता और अन्नपूर्णा मुहिम का अंतर
सेवादारों ने बताया कि सरकार द्वारा पीले और गुलाबी कार्ड के माध्यम से सहायता दी जाती है, लेकिन कई परिवार ऐसे हैं जिनका जीवन स्तर फिर भी नहीं सुधर पाता। संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम ऐसे परिवारों को लक्षित करती है, जो बीमारी, दुर्घटना या अन्य कारणों से पूर्ण रूप से असहाय हो चुके हैं, ताकि वे भूखे न रहें और अपनी मूलभूत जरूरतें पूरी कर सकें।
बेटियों के लिए विशेष व्यवस्था
सेवादारों ने जानकारी दी कि संत रामपाल जी महाराज द्वारा धनाना धाम के आसपास के गांवों में बेटियों के लिए निःशुल्क बस सेवा चलाई जा रही है, जिससे छात्राओं को स्कूल और कॉलेज तक आने-जाने में कोई बाधा न हो। यह व्यवस्था भविष्य में अन्य क्षेत्रों तक विस्तार की योजना में है।
अनुशासन और नियम
अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत राहत सामग्री केवल उन्हीं जरूरतमंदों को दी जाती है, जो नशामुक्त जीवन जीते हैं और मांस अथवा किसी भी प्रकार की अभक्ष वस्तुओं का सेवन नहीं करते। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सहायता तुरंत बंद कर दी जाती है।
सेवा से बदली जीवन की दिशा
रोहतक के गांव भालोट में सत्यवान के परिवार को मिली सहायता इस बात का प्रमाण है कि संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम केवल राहत नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन की दिशा में एक ठोस कदम है। यह पहल समाज के सबसे कमजोर वर्गों को सहारा देकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य कर रही है।

