हरियाणा के झज्जर जिले के दुल्हेड़ा गांव में रहने वाली वीरमती ताई का जीवन पिछले कुछ वर्षों में गहरे दुखों से गुजर चुका है। उनके दोनों बेटों का निधन हो चुका है और अब वे अपने चार पोते-पोतियों के साथ एक छोटे से किराए के कमरे में जीवनयापन कर रही हैं। परिवार की आय का एकमात्र साधन ₹3000 की वृद्धावस्था पेंशन है, जिससे किराया, बिजली-पानी और भोजन जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी बेहद कठिन हो गया था।
ऐसी कठिन परिस्थितियों में जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित अन्नपूर्णा मुहिम इस परिवार के लिए आशा की किरण बनकर सामने आई। इस सेवा अभियान के अंतर्गत संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी वीरमती ताई के परिवार तक पहुंचे और उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान की।
किराए के कमरे में गुजर रहा था जीवन
वीरमती ताई लगभग ₹2500 किराए वाले एक छोटे से कमरे में चार बच्चों के साथ रहती हैं। यही कमरा उनका रसोईघर, सोने का स्थान और पूरा घर है। महंगाई के इस दौर में बच्चों की पढ़ाई, भोजन और दैनिक खर्चों को संभालना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया था। कई बार परिवार को भोजन की कमी का सामना करना पड़ता था। बेटों के निधन के बाद चारों बच्चों की जिम्मेदारी पूरी तरह उनके कंधों पर आ गई थी।
अन्नपूर्णा मुहिम से मिली राहत
जब इस परिवार की स्थिति की जानकारी संत रामपाल जी महाराज तक पहुंची, तो अन्नपूर्णा मुहिम के तहत तुरंत सहायता पहुंचाई गई। सबसे पहले परिवार को एक माह की खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई गई ताकि बच्चों को भोजन की कमी न हो।
परिवार को प्रदान की गई राहत सामग्री
| क्रमांक | सामग्री | मात्रा / विवरण |
| 1 | आटा | 20 किलोग्राम |
| 2 | चावल | 5 किलोग्राम |
| 3 | मूंग दाल | 1 किलोग्राम |
| 4 | चीनी | 2 किलोग्राम |
| 5 | सरसों का तेल | 2 किलोग्राम |
| 6 | पाउडर दूध | 1 किलोग्राम |
| 7 | मसाले | नमक, हल्दी, जीरा, लाल मिर्च |
| 8 | अचार | 2 पैकेट |
| 9 | चाय पत्ती | दैनिक उपयोग के लिए |
| 10 | साबुन | नहाने और कपड़े धोने के लिए |
| 11 | आलू | 5 किलोग्राम |
इसके अतिरिक्त परिवार को नया गैस चूल्हा, गैस सिलेंडर, पाइप और रेगुलेटर भी दिया गया, जिससे उन्हें भोजन बनाने में सुविधा हो सके।
बच्चों की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए उन्हें स्कूल यूनिफॉर्म, जूते, शर्ट, पैंट और अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री भी प्रदान की गई। वीरमती ताई के लिए भी कपड़े दिए गए, ताकि उनके जीवन में थोड़ी सहजता आ सके।
जल्द बनेगा अपना घर
परिवार की सबसे बड़ी समस्या केवल भोजन नहीं, बल्कि अपना घर न होना थी। इस स्थिति को समझते हुए संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों ने उनके पैतृक प्लॉट का निरीक्षण किया। सर्वे में लगभग 50–60 वर्ग गज जमीन चिन्हित की गई, जिस पर परिवार के लिए नया घर बनाने की योजना बनाई जा रही है।
परिवार के अन्य सदस्यों और गांव के लोगों ने भी इस कार्य के लिए सहमति जताई है। गांव के सरपंच ने इस पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि किसी गरीब परिवार को सिर पर छत देना सबसे बड़ा पुण्य का कार्य है।
गांववासियों ने की पहल की सराहना
दुल्हेड़ा गांव के लोगों ने संत रामपाल जी महाराज की इस सेवा भावना की प्रशंसा की। ग्रामीणों का कहना है कि उनके अनुयायी गांव-गांव जाकर जरूरतमंद परिवारों की सहायता कर रहे हैं, जिससे कई गरीब और बेसहारा लोगों को राहत मिल रही है।
वीरमती ताई और उनके पोते-पोतियों के लिए यह सहायता केवल राशन तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके जीवन में नई उम्मीद लेकर आई है।
नई शुरुआत की ओर बढ़ता परिवार
आज वीरमती ताई और उनके पोते-पोतियों के चेहरे पर आशा दिखाई देती है। जो बच्चे कभी भूखे रहकर दिन बिताते थे, अब उन्हें नियमित भोजन और पढ़ाई के लिए जरूरी साधन मिल रहे हैं।
परिवार को विश्वास है कि जल्द ही उनका अपना घर बनेगा और वे सुरक्षित वातावरण में जीवन की नई शुरुआत कर सकेंगे।
वास्तव में संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा से चल रही अन्नपूर्णा मुहिम केवल भोजन बांटने की सेवा नहीं है, बल्कि यह उन परिवारों के जीवन में नई शुरुआत का अवसर है जो कठिन परिस्थितियों में संघर्ष कर रहे हैं। ऐसी पहल समाज में मानवता, करुणा और सहयोग की भावना को मजबूत बनाती है।

