भारत जैसे देश में आज भी कई परिवार गरीबी, बीमारी और असहायता के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ ब्लॉक के बरनाराकला गांव की रहने वाली केकती बाई जी भी उन्हीं में से एक हैं। शारीरिक कमजोरी और विकलांगता के कारण वे काम करने में असमर्थ हैं और उनका जीवन केवल ₹500 की पेंशन और 10 किलो राशन पर निर्भर है—जो उनकी आवश्यकताओं के लिए अत्यंत अपर्याप्त है।
ऐसे हालात में उनका हर दिन संघर्ष से भरा हुआ है—न पक्का घर, न पर्याप्त भोजन और न ही स्वास्थ्य सुविधाएं। उनका कच्चा मकान कभी भी गिर सकता है। इसी कठिन परिस्थिति में संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन और उनके आदेशानुसार चलाई जा रही अन्नपूर्णा मुहिम उनके जीवन में उम्मीद की किरण बनकर सामने आई।
गरीबी की सच्चाई: एक दर्दनाक तस्वीर
केकती बाई जी के जीवन की वास्तविकता अत्यंत पीड़ादायक है। उनके पास न तो सुरक्षित रहने के लिए पक्का घर है, न ही पर्याप्त भोजन और न ही स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी सुविधाएं। कई बार उनका चूल्हा ठंडा रह जाता है, क्योंकि घर में खाने के लिए पर्याप्त राशन उपलब्ध नहीं होता।
उनके घर में न पंखा है, न चारपाई और न ही सुरक्षित छत। बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब पानी सीधे घर के अंदर प्रवेश कर जाता है। केकती बाई जी अकेली रहती हैं और लकवा (पैरालिसिस) से पीड़ित हैं। उनकी स्थिति इतनी गंभीर है कि वे अपनी पीड़ा को ठीक से व्यक्त भी नहीं कर पातीं—उनकी आंखों की खामोशी ही उनके दर्द को बयान करती है।
अन्नपूर्णा मुहिम: मानवता की सच्ची सेवा

इसी कठिन परिस्थिति में संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन और उनके आदेशानुसार संचालित अन्नपूर्णा मुहिम उनके जीवन में सहारा बनकर आई है। यह एक व्यापक सामाजिक सेवा अभियान है, जिसका उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़ा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
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इस मुहिम के अंतर्गत संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी, उनके आदेशानुसार, गांव-गांव जाकर जरूरतमंद परिवारों की पहचान करते हैं और उन्हें सहायता प्रदान करते हैं। इसी क्रम में केकती बाई जी के घर पहुंचकर उन्हें आवश्यक राशन सामग्री उपलब्ध कराई गई।
यह सहायता पूर्णतः निःशुल्क थी और बिना किसी भेदभाव के संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार प्रदान की गई।
अन्नपूर्णा मुहिम: राशन सामग्री किट
| क्रम संख्या | सामग्री का नाम | विवरण / मात्रा |
| 1 | अनाज | चावल 15 किलो, आटा 5 किलो |
| 2 | सब्जियां | आलू 2.5 किलो, प्याज 2.5 किलो |
| 3 | दालें | हरी मूंग दाल 500 ग्राम, पीली मूंग दाल 500 ग्राम, चना दाल 500 ग्राम, काले चने 500 ग्राम |
| 4 | रसोई सामग्री | नमक 1 किलो, हल्दी पाउडर 150 ग्राम, लाल मिर्च पाउडर 100 ग्राम, जीरा 150 ग्राम |
| 5 | मिठास व अन्य सामग्री | चीनी 2 किलो, अचार 500 ग्राम |
| 6 | पेय सामग्री | चाय पत्ती 250 ग्राम, दूध पाउडर 500 ग्राम |
| 7 | खाद्य तेल | 1 लीटर |
विशेष नोट: यह सहायता संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार पूरी तरह निःशुल्क है और केवल जरूरतमंद परिवारों के लिए समर्पित है।
सेवा का अनोखा रूप
अन्नपूर्णा मुहिम की सबसे विशेष बात यह है कि यह केवल एक बार की सहायता तक सीमित नहीं है। संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में यह सुनिश्चित किया जाता है कि जरूरतमंद व्यक्ति को तब तक सहायता मिलती रहे जब तक वह स्वयं सक्षम न हो जाए या उसकी स्थिति में सुधार न हो।
लाभार्थियों को एक संपर्क कार्ड भी प्रदान किया जाता है, जिससे वे आवश्यकता पड़ने पर दोबारा सहायता प्राप्त कर सकें। यह पूरी व्यवस्था संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार संचालित होती है, जिसका उद्देश्य है—
“कोई भी गरीब भूखा न सोए।”
इस मुहिम के तहत देशभर में हजारों परिवारों को नियमित रूप से सहायता प्रदान की जा रही है।
समाज के लिए एक संदेश
केकती बाई जी की कहानी केवल एक व्यक्ति की नहीं है, बल्कि यह समाज के उस वर्ग की सच्चाई को उजागर करती है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। यह घटना हमें सिखाती है कि सच्चा धर्म और भक्ति वही है, जो जरूरतमंद की सहायता में प्रकट हो।
संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन और उनके आदेशानुसार की जा रही यह सेवा मानवता का जीवंत उदाहरण है। जब ऐसे परोपकारी कार्य समाज में होते हैं, तब यह सिद्ध होता है कि मानवता अभी भी जीवित है और सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
अन्नपूर्णा मुहिम न केवल सहायता का माध्यम है, बल्कि यह एक प्रेरणा है—एक ऐसे समाज के निर्माण की, जहां कोई भी व्यक्ति भूखा, बेसहारा या असहाय न रहे।

