हरियाणा के जिला हिसार से एक ऐसी मर्मस्पर्शी कहानी सामने आई है, जो समाज में टूटती उम्मीदों के बीच मानवता की एक नई मिसाल पेश करती है। जहाँ आर्थिक तंगी और अपनों के बिछड़ने का गम एक परिवार को अंधकार की ओर धकेल रहा था, वहीं जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज अपनी ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के माध्यम से इस बेबस परिवार के लिए एक मसीहा बनकर प्रकट हुए हैं। संत जी ने न केवल इस परिवार की सुध ली, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि अब इस घर में कोई भी अभाव के कारण दुखी नहीं रहेगा।
संकट और लाचारी: परिवार की हृदय विदारक स्थिति
हिसार शहर के एक किराए के मकान में रह रहे इस परिवार पर दुखों का पहाड़ तब टूटा, जब दो साल पहले घर के इकलौते कमाने वाले सदस्य (महिला के पति) की मृत्यु हो गई। पति के जाने के बाद परिवार पूरी तरह बिखर गया। परिवार में वर्तमान में केवल दो सदस्य हैं:
- माता: जो पति के निधन के बाद जैसे-तैसे उधार लेकर घर का गुजारा कर रही थीं।
- बेटा (अमन): पिता की मृत्यु के सदमे के कारण अमन गहरे मानसिक तनाव (डिप्रेशन) में चला गया, जिससे परिवार की स्थिति और भी गंभीर हो गई।
घर में न तो पर्याप्त राशन था और न ही सोने के लिए जरूरी दो चारपाइयाँ। परिस्थिति ऐसी थी कि जब माँ चारपाई पर सोती थी, तब बेटा जमीन पर सोने को मजबूर था।
संत रामपाल जी महाराज ने थामा हाथ
माता जी ने बताया कि जब वे अत्यंत विषम परिस्थितियों से जूझ रही थीं, तब आश्रम की एक गुरु बहन ने उनका ढाँढस बांधते हुए कहा था कि गुरुजी पूरी दुनिया की मदद कर रहे हैं, तो वे उनकी सहायता भी अवश्य करेंगे। गुरु बहन की सलाह मानकर माता जी ने आश्रम जाकर संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों को अपनी परिस्थिति से अवगत कराया और संत जी से सहायता हेतु प्रार्थना की।

जैसे ही इस परिवार की व्यथा संत रामपाल जी महाराज तक पहुँची, उन्होंने बिना विलंब किए सहायता का आदेश दिया। मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट के माध्यम से सेवादार सभी आवश्यक राहत सामग्री लेकर परिवार के द्वार पर पहुँचे। संत जी ने न केवल परिवार के लिए राशन और घरेलू सामान की व्यवस्था की, बल्कि बीमार बेटे के इलाज और उसके उज्जवल भविष्य की संपूर्ण जिम्मेदारी भी अपने कंधों पर ले ली है।
प्रदान की गई राहत सामग्री की सूची:
| क्र.सं. | सामग्री का नाम | मात्रा |
| 1 | आटा | 15 किलो |
| 2 | चावल | 5 किलो |
| 3 | चीनी | 2 किलो |
| 4 | चना दाल | ½ किलो |
| 5 | काले चने | ½ किलो |
| 6 | हरी मूंग दाल | ½ किलो |
| 7 | पीली मूंग दाल | ½ किलो |
| 8 | आलू | 2.5 किलो |
| 9 | प्याज | 2.5 किलो |
| 10 | हल्दी | 150 ग्राम |
| 11 | लाल मिर्च | 100 ग्राम |
| 12 | टाटा नमक | 1 किलो |
| 13 | जीरा | 150 ग्राम |
| 14 | सरसों तेल | 1 लीटर |
| 15 | सूखा दूध | ½ किलो |
| 16 | टाटा चाय | 250 ग्राम |
| 17 | नहाने का साबुन | 2 पीस |
| 18 | कपड़े धोने का साबुन | 1 किलो |
| 19 | गैस सिलेंडर | 1 नग भरा हुआ |
| 20 | कपड़े धोने का सर्फ | ½ किलो |
| 21 | फोल्डिंग चारपाई | 1 नग |
| 22 | अचार | ½ किलो |
प्रत्यक्षदर्शियों और लाभार्थियों के विचार
राहत सामग्री पाकर परिवार की आँखों में खुशी के आँसू छलक आए। लाभार्थी महिला और उनके बेटे ने अपनी भावनाएं कुछ इस प्रकार व्यक्त कीं:
महिला (माता): “अब सब ठीक हो जाएगा, सब परमात्मा ही करेंगे। गुरुजी ने खुद आदेश दिया है कि हमें जिस भी चीज़ की ज़रूरत हो, वह सब हमें उपलब्ध कराई जाए। संत जी के सेवादार भी बता रहे थे कि महाराज जी के निर्देशानुसार हमारे लिए कपड़ों आदि की व्यवस्था भी की जा रही है। मालिक जो भी दया करेंगे, वह हमें स्वीकार है; अब सब उन्हीं की कृपा से पूरा होगा।
सेवादार जी ने भरोसा दिलाया है कि अब मेरे बच्चे का इलाज भी होगा और कपड़ों का प्रबंध भी किया जाएगा। हमें चारपाई और गैस सिलेंडर जैसी ज़रूरत की सभी चीज़ें मिल गई हैं। सचमुच, इस कलयुग के समय में भी हमारे लिए सतयुग जैसा माहौल बना दिया गया है। मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी में ऐसी निस्वार्थ मदद पहले कभी न देखी है और न ही कहीं सुनी है।”
अमन (बेटा): “संत रामपाल जी महाराज जी की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ उन सभी के लिए एक महान सहारा है जो किसी भी संकट या गरीबी से जूझ रहे हैं। हमारे परिवार के लिए तो यह मदद किसी ‘संजीवन बूटी‘ के समान है, क्योंकि इस कलयुग के समय में जहाँ कोई किसी का हाल नहीं पूछता, वहाँ महाराज जी ने भगवान का अवतार बनकर हमारा हाथ थामा है। मुझे वर्तमान में कुछ मानसिक और शारीरिक समस्याएँ हैं, जिसके कारण मैं अभी काम नहीं कर पा रहा हूँ, लेकिन आश्रम की ओर से यह भरोसा दिया गया है कि जब तक मैं आत्मनिर्भर होकर कमाने लायक नहीं हो जाता, तब तक यह सहायता निरंतर जारी रहेगी।”
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स्वावलंबन तक सहायता और संपर्क व्यवस्था
संत रामपाल जी महाराज की यह सेवा कोई एक बार का दान नहीं है। संत जी ने परिवार को संपर्क सूत्र प्रदान किए हैं। जिससे राशन समाप्त होने से दो दिन पहले परिवार फोन कर सकेंगे और सेवादार तुरंत नई सामग्री लेकर पहुँच जाएंगे। यह सहायता तब तक जारी रहेगी जब तक बेटा पूर्णतः स्वस्थ होकर कमाने योग्य नहीं हो जाता।
लोक कल्याण का संकल्प: मर्यादित भक्ति से संकटों का अंत और नि:शुल्क चिकित्सा सेवा
प्रतिकूल परिस्थितियों और प्रत्यक्ष दूरी के बावजूद, संत रामपाल जी महाराज जिस प्रकार हज़ारों गरीब परिवारों की निरंतर सुध ले रहे हैं, वह सामान्य बुद्धि के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं है। जब सेवादार राजेंद्र जी से पूछा गया कि यह सब कैसे संभव हो रहा है, तो उन्होंने बड़े विश्वास के साथ बताया:
“यह सामर्थ्य केवल एक पूर्ण संत में ही हो सकता है। वास्तव में, संत रामपाल जी महाराज स्वयं कबीर साहिब का ही स्वरूप हैं। इतिहास गवाह है कि 600 साल पहले काशी में कबीर साहिब ने एक छोटी सी झोपड़ी में रहते हुए 18 लाख साधु-संतों को तीन दिनों तक भोजन कराया था और सबको प्रत्येक भोजन के पश्चात् एक दोहर (ओढ़ने का कीमती वस्त्र) तथा एक मोहर (10 ग्राम) सोना दक्षिणा में दिए थे। जो असंख्य ब्रह्मांडों के स्वामी हैं, उनके लिए कुछ भी असंभव नहीं है। यदि पूरी पृथ्वी को भी घर बैठे सँभालना पड़ जाए, तो वे उसे भी सहज ही कर सकते हैं।”
संत रामपाल जी महाराज द्वारा बताई गई मर्यादित सतभक्ति का ही यह प्रभाव है कि साधक के जीवन में ऐसे घोर संकट आने ही बंद हो जाते हैं। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो सांसारिक सुख तो सतभक्ति के साथ मिलने वाले ‘रूँगे’ (अतिरिक्त लाभ) के समान हैं। भक्त का असली लक्ष्य तो मोक्ष प्राप्त करना है, जो दैनिक कार्य के साथ भक्ति करते हुए सहज ही प्राप्त हो जाता है।
कबीर साहिब की एक अमर वाणी यहाँ बिल्कुल सटीक बैठती है:
“सिद्ध तारै पिंड आपना, साधु तारै खंड।
उसको सतगुरु जानियो, जो तार देवै ब्रह्मांड।।”
अर्थात्, जो केवल स्वयं का कल्याण करे वह सिद्ध है और जो किसी क्षेत्र विशेष का भला करे वह साधु, लेकिन सच्चा सतगुरु वही है जो संपूर्ण ब्रह्मांड का उद्धार करने की शक्ति रखता हो। संत रामपाल जी महाराज जी आज उसी सच्चे सतगुरु की भूमिका निभा रहे हैं। संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में मानवता की सेवा के लिए केवल अन्नपूर्णा मुहिम ही नहीं, बल्कि समाज सुधार की अनेकों अन्य सेवाएँ भी निरंतर जारी हैं। विशेष रूप से उन गरीब बच्चों के लिए जिनकी आँखें कमजोर हैं, महाराज जी की ओर से निशुल्क नेत्र चिकित्सा की व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त, समय-समय पर रक्तदान शिविर और दंत चिकित्सा शिविर भी लगाए जाते हैं।
संत जी द्वारा चलाई गई ये सभी समाज सुधारक मुहिम समाज के हर वर्ग के लिए पूरी तरह निशुल्क हैं, ताकि कोई भी आर्थिक तंगी के कारण बेहतर स्वास्थ्य और उपचार से वंचित न रहे। अधिक जानकारी के लिए संत रामपाल जी महाराज ऐप प्लेस्टोर से डाउनलोड करें।
कलयुग में सतयुग का आगमन
संत रामपाल जी महाराज का संकल्प है कि समाज में कोई भी व्यक्ति भूख, बीमारी या अभाव के कारण न तड़पे। उनका नारा है:
“रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान।
हर जरुरतमन्द को दे रहा कबीर भगवान।।”
यह आज धरातल पर सच होता दिख रहा है।
विशेष शर्त: यह सहायता केवल उन्हीं को दी जाती है जो पूर्णतः नशामुक्त हैं और मांसाहार का त्याग कर चुके हैं। यदि आपके परिचित में कोई ऐसा परिवार हो, जिसे सहायता की आवश्यकता हो तो नीचे दिए नंबरों पर संपर्क करें।
संपर्क सूत्र: 9992800455, 9992600771, 9992600161, 9992600162
