गरीबी और बीमारी जब एक साथ किसी परिवार के जीवन में आती हैं, तब परिस्थितियां बेहद कठिन हो जाती हैं। गुजरात के नर्मदा जिले के झरिया गांव में रहने वाली भावना बेन का परिवार भी पिछले कई वर्षों से ऐसे ही संघर्ष का सामना कर रहा था। परिवार के मुखिया कमलेश भाई कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, जिसके कारण घर की आर्थिक स्थिति पूरी तरह प्रभावित हो गई। ऐसे समय में संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम इस परिवार के लिए राहत बनकर पहुंची।
बीमारी ने बदल दी परिवार की स्थिति
कमलेश भाई पहले दर्जी का काम करते थे। सिलाई करके वे अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। लगभग तीन साल पहले उन्हें दांतों में कैंसर की बीमारी हुई। धीरे-धीरे बीमारी बढ़ती गई और वे काम करने में असमर्थ हो गए। घर की आय लगभग बंद हो गई। परिवार में चार सदस्य हैं। घर की जिम्मेदारी भावना बेन पर आ गई, जो मजदूरी करके किसी तरह परिवार चला रही थीं। पति के इलाज, बच्चों की जरूरतों और रोजमर्रा के खर्चों के बीच परिवार लगातार आर्थिक संकट से गुजर रहा था।
जर्जर घर में गुजर रहा था जीवन
भावना बेन का घर काफी जर्जर स्थिति में था। दीवारें टूटी हुई थीं और बारिश के समय छत से पानी टपकता था। घर का फर्श भी खराब हो चुका था। परिवार के पास इतनी आर्थिक क्षमता नहीं थी कि वे घर की मरम्मत करवा सकें। कमलेश भाई की सिलाई मशीन आज भी घर में रखी हुई है, लेकिन बीमारी के कारण वह अब उसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। रसोई की स्थिति भी कमजोर थी। कई बार गैस सिलेंडर भरवाना संभव नहीं हो पाता था, इसलिए मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनाना पड़ता था।
अन्नपूर्णा मुहिम के तहत मिली सहायता
संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में चल रही अन्नपूर्णा मुहिम के सेवादार जब इस परिवार तक पहुंचे, तब उन्होंने परिवार की वास्तविक स्थिति को समझा। परिवार को तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध करवाई गई। परिवार को आटा, चावल, चीनी, दालें, तेल, मसाले, चाय, नमक, सूखा दूध, आलू, प्याज और अन्य आवश्यक खाद्य सामग्री दी गई। इसके अलावा नहाने और कपड़े धोने के साबुन, वॉशिंग पाउडर, कपड़े और चप्पल भी उपलब्ध कराए गए।
राहत सामग्री में शामिल प्रमुख वस्तुएं:
| क्रम संख्या | सामग्री | मात्रा / विवरण |
| 1 | आटा | 15 किलोग्राम |
| 2 | चावल | 5 किलोग्राम |
| 3 | चीनी | 2 किलोग्राम |
| 4 | आलू | 5 किलोग्राम |
| 5 | प्याज | 5 किलोग्राम |
| 6 | चना दाल | 500 ग्राम |
| 7 | पीली मूंग दाल | 500 ग्राम |
| 8 | हरी मूंग दाल | 500 ग्राम |
| 9 | काले चने | 500 ग्राम |
| 10 | सरसों का तेल | 1 लीटर |
| 11 | सूखा दूध | 500 ग्राम |
| 12 | टाटा चाय | 250 ग्राम |
| 13 | टाटा नमक | 1 किलोग्राम |
| 14 | अचार | 500 ग्राम |
| 15 | हल्दी, जीरा, लाल मिर्च | 150-150 ग्राम |
| 16 | कपड़े धोने का साबुन | 1 किलोग्राम |
| 17 | सर्फ | 500 ग्राम |
| 18 | नहाने का साबुन | 4 पैकेट |
लगातार जारी रहेगी सहायता
अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत यह सहायता केवल एक बार के लिए नहीं दी जाती। परिवार को एक संपर्क कार्ड भी दिया गया, जिसमें स्थानीय सेवादारों के नंबर दर्ज थे। परिवार को बताया गया कि राशन समाप्त होने से दो दिन पहले संपर्क करने पर दोबारा राहत सामग्री उपलब्ध करवाई जाएगी। सेवादारों ने स्पष्ट किया कि यह सहायता तब तक जारी रहेगी जब तक परिवार में कोई सदस्य दोबारा कमाने योग्य नहीं हो जाता।
गांव के लोगों ने भी की सराहना
गांव के लोगों ने भी इस पहल की सराहना की। स्थानीय लोगों का कहना है कि परिवार काफी लंबे समय से कठिन परिस्थितियों में जीवन जी रहा था। बीमारी और आर्थिक तंगी के कारण परिवार लगातार परेशान था। ग्रामीणों ने कहा कि इस प्रकार घर-घर जाकर जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचाना एक सराहनीय प्रयास है। इससे ऐसे परिवारों को राहत मिलती है जो अपनी स्थिति के कारण मदद मांग भी नहीं पाते।
मानवता और सहयोग का संदेश
अन्नपूर्णा मुहिम का उद्देश्य केवल खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि जरूरतमंद परिवारों को यह विश्वास दिलाना भी है कि वे अकेले नहीं हैं। “रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान हर गरीब को देगा कबीर भगवान” के संकल्प के साथ यह मुहिम जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचा रही है। संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में चल रही यह पहल समाज में सहयोग, सेवा और मानवता की भावना को मजबूत करने का कार्य कर रही है। कठिन परिस्थितियों में रह रहे परिवारों के लिए यह मुहिम एक सहारे के रूप में सामने आ रही है।
