रोहतक के बाबरा मोहल्ला में संत रामपाल जी महाराज बने गरीब परिवार का सहारा

हरियाणा/रोहतक – बाबरा मोहल्ला: जब दो वक्त की रोटी और बच्चों की शिक्षा बनी पहाड़, तो संत रामपाल जी महाराज बने इस परिवार का एकमात्र सहारा

रोहतक: जीवन की अनिश्चितताएं कब किसके सामने पहाड़ बनकर खड़ी हो जाएं, यह कोई नहीं जानता। हरियाणा के रोहतक जिले के बाबरा मोहल्ला में एक ऐसा ही परिवार रहता है, जिसके लिए खुशियों के रंग बहुत पहले ही फीके पड़ चुके थे। एक घर, जिसकी छत ही मानो उजड़ गई हो, जहाँ पिता का साया बच्चों के सिर से उठ चुका हो, उस दहलीज पर हर पल कितना भारी गुजरता होगा, इसकी कल्पना करना भी सिहरन पैदा कर देता है।

जिस परिवार में मां की दिहाड़ी मजदूरी ही एकमात्र सहारा हो और जहाँ दो वक्त की रोटी के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतें भी पूरी करना असंभव प्रतीत हो रहा हो, वहां उम्मीद की कोई किरण नजर नहीं आती। लेकिन कलयुग के इस दौर में, जब अपने भी साथ छोड़ देते हैं, तब पूर्ण परमात्मा के प्रतिनिधि के रूप में संत रामपाल जी महाराज ऐसे परिवारों के लिए तारणहार बनकर सामने आते हैं।

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ग्रामीणों की मदद के लिए संत रामपाल जी महाराज से संपर्क

​जब इस परिवार की दयनीय स्थिति के बारे में जानकारी मिली, तो यह बात सामने आई कि सरकारी दावों और कागजी योजनाओं के बीच एक विधवा महिला अपने तीन बच्चों को पालने के लिए संघर्ष कर रही थी। डेढ़ साल पहले पूनम नाम की इस महिला के पति का हार्ट अटैक से निधन हो गया था, जिसके बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। एक बेटा और दो बेटियां, जो अभी पढ़ाई कर रही हैं, उनका भविष्य अंधकारमय दिख रहा था। ऐसे में, जहाँ दुनियावी रिश्तेदार और सरकारी तंत्र मदद करने में विफल रहे, वहां संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा और उनके द्वारा सिखाई गई परोपकार की भावना ने इस परिवार तक पहुंच बनाई। 

संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार अनुयायियों ने जब इस परिवार की सुध ली, तो यह स्पष्ट हो गया कि संत जी का उद्देश्य नाम कमाना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक राहत पहुंचाना है। ग्रामीणों और पड़ोसियों ने देखा कि कैसे संत रामपाल जी महाराज के आदेश पर बिना किसी दिखावे के, इस परिवार की हर छोटी-बड़ी जरूरत को पूरा करने का बीड़ा उठाया गया।

संत रामपाल जी महाराज द्वारा बाबरा मोहल्ला में प्रदान की गई सहायता

​संत रामपाल जी महाराज के शिष्य ने बताया कि उनके गुरुदेव का स्पष्ट आदेश है कि कोई भी गरीब परिवार भूखा न सोए। संत जी का नारा है – “रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान, सबको देगा कबीर भगवान।” इसी आदेश का पालन करते हुए, संत रामपाल जी महाराज की ओर से इस परिवार को न केवल राशन सामग्री उपलब्ध कराई गई, बल्कि यह आश्वासन भी दिया गया कि जब तक यह परिवार अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो जाता, तब तक यह सहायता निरंतर जारी रहेगी।

​संत रामपाल जी महाराज द्वारा भिजवाई गई राशन सामग्री का विवरण इस प्रकार है:

क्रमांकसामग्री का नाममात्रा/विवरण
1आटा15-20 किलोग्राम
2चावल5 किलोग्राम
3चीनी2 किलोग्राम
4दाल2 प्रकार की
5आलू5 किलोग्राम
6प्याज5 किलोग्राम
7सरसों का तेल1 लीटर
8दूध का पाउडरअमूल मिल्क बॉक्स
9चाय पत्ती1 पैकेट
10नमक1 थैली
11मसाले3 प्रकार के
12अचार1 डिब्बा
13नहाने का साबुनउपलब्ध
14कपड़े धोने का साबुनउपलब्ध
15डिटर्जेंटघड़ी सर्फ

इसके अतिरिक्त, संत रामपाल जी महाराज ने यह भी सुनिश्चित किया है कि यदि परिवार का गैस सिलेंडर खाली होता है, तो उसे भरवा कर दिया जाएगा। बच्चों की शिक्षा में कोई बाधा न आए, इसके लिए स्कूल की फीस, किताबें, कॉपियां, पेन, स्कूल ड्रेस और जूते आदि का भी पूरा खर्च संत रामपाल जी महाराज द्वारा उठाया जाएगा। यह सहायता तब तक जारी रहेगी जब तक बच्चे सक्षम नहीं हो जाते और परिवार आत्मनिर्भर नहीं हो जाता।

समाज सुधार और मानवता की अलख जगाते संत रामपाल जी महाराज

​पड़ोसी तुषार, जो 24 वर्ष के युवा हैं, ने इस दृश्य को देखकर अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाए। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा संत पहली बार देखा है। तुषार का कहना था कि सरकार भी निचले स्तर के लोगों को सुविधाएं देना चाहती है, लेकिन भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के कारण वह सहायता जरूरतमंदों तक पहुंच ही नहीं पाती। अक्सर सुविधाएँ ऊपर वाले ही ले जाते हैं।

लेकिन संत रामपाल जी महाराज की यह मुहिम सीधे जरूरतमंद के घर तक पहुंचती है। यहाँ कोई बिचौलिया नहीं है, सीधे संत जी का आशीर्वाद सामग्री के रूप में गरीब की रसोई तक पहुंचता है। पड़ोसी ने संत रामपाल जी महाराज का कोटि-कोटि धन्यवाद करते हुए कहा कि जो कार्य सरकार नहीं कर पाई, वह संत जी ने कर दिखाया है।

​संत रामपाल जी महाराज के समाज सुधार के कार्य केवल राशन वितरण तक सीमित नहीं हैं। उनके अनुयायी बताते हैं कि संत जी ने समाज से दहेज प्रथा जैसी कुरीति को समाप्त करने के लिए दहेज मुक्त विवाह (रमैणी) की अनूठी प्रथा चलाई है। इसके अलावा, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान, जाट आरक्षण आंदोलन के समय और कोरोना काल की विभीषिका के बीच भी संत रामपाल जी महाराज ने बढ़-चढ़कर मानवता की सेवा की है। उनका उद्देश्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जहाँ कोई दुखी न हो और सभी विकार मुक्त जीवन जिएं।

सहायता प्राप्ति के लिए अनिवार्य नियम

​संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी जाने वाली इस सहायता की एक विशेष और महत्वपूर्ण शर्त यह है कि लाभार्थी परिवार को पूर्ण रूप से नशा मुक्त होना चाहिए। संत जी का मानना है कि नशा ही विनाश की जड़ है। इसलिए, यह सामग्री केवल उन्हीं लोगों को दी जाती है जो मांस, शराब, तंबाकू या किसी भी प्रकार के अभक्ष पदार्थों का सेवन नहीं करते। यदि कोई लाभार्थी सहायता प्राप्त करने के बाद नशा करता हुआ पाया जाता है, तो उसकी सहायता तुरंत प्रभाव से बंद कर दी जाती है। यह नियम समाज को न केवल आर्थिक रूप से मदद करता है, बल्कि नैतिक और शारीरिक रूप से भी शुद्ध करता है।

बंदी छोड़ जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज की अपार करुणा

​यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि कलयुग के इस घोर अंधकार में संत रामपाल जी महाराज मानवता के लिए एक प्रकाश स्तंभ के रूप में खड़े हैं। रोहतक के बाबरा मोहल्ला का यह परिवार तो केवल एक उदाहरण है; ऐसे हजारों परिवारों के घर का चूल्हा आज संत रामपाल जी महाराज की दया से जल रहा है। जहाँ एक ओर दुनिया स्वार्थ में लिप्त है, वहीं संत रामपाल जी महाराज जन-जन का कल्याण कर रहे हैं।

धन्य हैं संत रामपाल जी महाराज, जिनकी अपार करुणा ने एक विधवा मां के आंसुओं को पोंछकर उसके बच्चों के भविष्य को सुरक्षित किया है। ऐसे परम संत के चरणों में कोटि-कोटि नमन है, जो न केवल अध्यात्म का ज्ञान दे रहे हैं, बल्कि मानव सेवा का सर्वोच्च उदाहरण भी प्रस्तुत कर रहे हैं।

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