सोनीपत, खरखौदा: नसीरपुर छोलका में विधवा रेखा के बेबस परिवार के मसीहा बने संत रामपाल जी महाराज

मानवता की मिसाल: सोनीपत के नसीरपुर छोलका गांव में विधवा रेखा के बेबस परिवार का सहारा बने संत रामपाल जी महाराज

हरियाणा के जिला सोनीपत, तहसील खरखौदा के छोटे से गांव नसीरपुर छोलका से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो गरीबी और लाचारी की पराकाष्ठा को दर्शाती है। जहाँ एक ओर समाज की चकाचौंध में अक्सर निर्धन परिवारों की सिसकियां दब जाती हैं, वहीं जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज अपनी ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के माध्यम से अंधेरे में डूबे इन घरों के लिए आशा की किरण बनकर प्रकट हो रहे हैं। संत जी ने न केवल इस परिवार की सुध ली, बल्कि यह सुनिश्चित किया कि अब कोई भी सदस्य भूखा न सोए।

जर्जर दीवारें और लाचारी: परिवार की हृदय विदारक स्थिति

गांव नसीरपुर छोलका की तंग गलियों में स्थित रेखा जी का घर उनकी बदहाली की गवाही खुद दे रहा है। परिवार की स्थिति अत्यंत दयनीय है:

  • रेखा (मुखिया): पति के निधन के बाद घर की जिम्मेदारी इनके कंधों पर आई, लेकिन हाथों की बीमारी के कारण वे मेहनत-मजदूरी करने में असमर्थ हैं।
  • बच्चे: बेटा प्रिंस (10वीं कक्षा) और बेटी रिया (9वीं कक्षा) पढ़ रहे हैं, जिनका भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा था।
  • बुजुर्ग सास और देवर: परिवार में एक वृद्ध सास और देवर भी हैं, जिनका भरण-पोषण केवल सरकार से मिलने वाली नाममात्र की पेंशन पर निर्भर था।

घर की स्थिति को नीचे दी गई तालिका से समझें: 

विषयवर्तमान दयनीय स्थिति
मुख्य द्वार (Main Gate)दरवाजा पूरी तरह टूटा हुआ है, जिसे रस्सियों के सहारे अटकाया गया है। किवाड़ की जगह मात्र दो लकड़ी के फट्टे लगे हैं।
रसोई घर (Kitchen)बिना छत की रसोई, जिसकी दीवारें मिट्टी की चिनाई से बनी हैं और अत्यंत जर्जर हालत में हैं। जर्जर दीवारें जिनसे थोड़ी मिट्टी निकल चुकी है। 
शौचालय व स्नानघरकोई दरवाजा नहीं है, केवल एक पुराना कपड़ा पर्दे के रूप में लटका है।
रहने की व्यवस्थापूरा परिवार एक छोटे से कमरे में रहने को मजबूर है, जिसकी दीवारें सिमेंटेड और छत पत्थर के लेंटर वाली है।
बर्तन व घरेलू सामानघर में भोजन बनाने और खाने के लिए बहुत ही गिने-चुने और सीमित बर्तन उपलब्ध हैं।
शिक्षापति के निधन के बाद बच्चों की पढ़ाई, स्कूल ड्रेस और जूतों के लिए परिवार दूसरों की मदद पर निर्भर था।

मसीहा का आगमन: संत रामपाल जी महाराज जी ने थामा हाथ

जब संत रामपाल जी महाराज को इस परिवार की पीड़ा का आभास हुआ, तो उन्होंने अपनी शब्द शक्ति और करुणा से तुरंत सहायता भेजने का आदेश दिया। जिस प्रकार मोबाइल टावर हर दिशा से सिग्नल पकड़ता है, वैसे ही एक पूर्ण संत अपने बच्चों की तकलीफ को दूर बैठे भी पहचान लेते हैं। इसी उद्देश्य के साथ संत जी ने मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट के माध्यम से राहत सामग्री भिजवाई।

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प्रदान की गई राहत सामग्री की सूची:

क्र.सं.सामग्री का नाममात्रा
1आटा15 किलो
2चावल5 किलो
3चीनी2 किलो
4आलू5 किलो
5प्याज5 किलो
6कपड़े धोने का सर्फ½ किलो
7चना दाल½ किलो
8हरी मूंग दाल½ किलो
9काले चने½ किलो
10अचार½ किलो
11लाल मिर्च100 ग्राम
12हल्दी150 ग्राम
13जीरा150 ग्राम
14टाटा नमक1 किलो
15कपड़े धोने का साबुन1 किलो
16सरसों तेल1 लीटर
17टाटा चाय250 ग्राम
18सूखा दूध½ किलो
19नहाने का साबुन2 पीस
20पीली मूंग दाल½ किलो
21स्कूली शिक्षा सामग्रीस्कूल ड्रेस, जूते, जुराबें (दोनों बच्चों हेतु)
22वस्त्र2 सूट और चप्पल (रेखा जी हेतु)

आभार और भविष्य का संकल्प: ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ से मिली नई उम्मीद और आजीवन सहायता का वचन

राहत सामग्री प्राप्त करने के बाद रेखा जी और उनके बच्चों के चेहरों पर एक नई उम्मीद दिखाई दी। उन्होंने संत रामपाल जी महाराज जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा:

“संत रामपाल जी महाराज का बहुत-बहुत धन्यवाद, जिन्होंने हमें यह सामान भेजकर सहारा दिया।”

यह परिवार बार-बार संत रामपाल जी महाराज जी का धन्यवाद कर रहा है कि राहत सामग्री उनके परिवार के लिए एक तरह से वरदान के रूप में रहेगी। उनके बच्चों ने भी अपनी नई स्कूल ड्रेस और जूते प्राप्त कर खुशी जाहिर की है।

“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” के संकल्प को किया साकार

संत रामपाल जी महाराज केवल भोजन ही नहीं, बल्कि बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए शिक्षा पर भी विशेष बल दे रहे हैं। रेखा जी की बेटी और बेटे के लिए संत जी ने नई स्कूल ड्रेस और जूते उपलब्ध कराए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि संत जी सरकार के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान को धरातल पर वास्तविक रूप दे रहे हैं। 

आजीवन सहायता का वचन और संपर्क कार्ड

संत रामपाल जी महाराज की यह सेवा केवल एक बार के लिए नहीं है। संत जी ने इस परिवार को एक ‘संपर्क कार्ड’ प्रदान किया है। जब भी घर का राशन या आवश्यक सामग्री समाप्त होने वाली होगी, रेखा जी कार्ड पर दिए गए नंबरों पर फोन करेंगी और संत जी तुरंत नया राशन उनके घर पहुंचा देंगे। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक परिवार आत्मनिर्भर नहीं हो जाता।

ग्रामीणों की राय: “ऐसा परोपकार पहले कभी नहीं देखा”

पड़ोस में रहने वाली राजवंती (उम्र:50 वर्ष) ने बताया, “यह परिवार घने (बहुत) दिनों से बहुत ज्यादा तकलीफ और दुख में जी रहा था। रेखा के पति का पैर कट गया था, जिससे उन्हें बहुत ज्यादा ‘चीस-भड़कन’ (असहनीय शारीरिक पीड़ा और दर्द) रहती थी। उन्होंने बहुत बुरा समय देखा है, बेचारे चाह कर भी लाचार थे और फिर अंत में उनकी मृत्यु हो गई। रेखा भी अपने हाथों से लाचार है, इसलिए उसे कोई काम पर भी नहीं ले जा सकता।

परमात्मा ने तो बहुत सहारा दे दिया है, अब इनका गुजारा अच्छे से हो जाएगा। मैंने अपनी 50 साल की उम्र में आज तक ऐसा कोई संत नहीं देखा जो इस तरह घर-घर जाकर मदद करे। इस परमात्मा का बहुत-बहुत धन्यवाद है, यह तो इन्होंने पता नहीं क्या (असाधारण कार्य) कर दिया।”

एक नए युग की शुरुआत

संत रामपाल जी महाराज का मूल नारा है: 

“रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान, 

हर गरीब को देगा कबीर भगवान।”

इस मुहिम के माध्यम से संत जी समाज में आपसी प्रेम और सेवा की भावना जागृत कर रहे हैं। वे बिना किसी दान-दक्षिणा के केवल निस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा में जुटे हैं।

संत रामपाल जी महाराज की यह सहायता केवल उन परिवारों के लिए है जो पूर्णतः नशामुक्त हैं और मांस का सेवन नहीं करते। यदि कोई व्यक्ति इन बुराइयों को त्यागने का संकल्प लेता है, तो संत जी उसका हाथ थामने के लिए सदैव तत्पर हैं।

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