सोनीपत शहर की लहरारा कॉलोनी में रहने वाले एक छोटे से परिवार की कहानी आज समाज के सामने उम्मीद और मानवता का जीवंत उदाहरण बनकर उभरी है। यह कहानी है मंजू और उनके नाबालिग बेटे की, जिनके जीवन में पिता का साया अब नहीं रहा। कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे इस परिवार तक संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत सहायता पहुँची, जिसने उनके जीवन में नई रोशनी का संचार किया।
परिवार की वास्तविक स्थिति: अभावों में बीतता जीवन
मंजू अपने बेटे के साथ एक साधारण मकान में रहती हैं, जिसकी संरचना अभी अधूरी है। घर के मुख्य द्वार और दीवारों पर प्लास्टर का कार्य अधूरा है, छत अस्थायी है और बरसात में पानी टपकता है। मकान के आसपास खुले हिस्सों के कारण सांप निकलने जैसी समस्याएं भी बनी रहती हैं। परिवार में केवल मां और बेटा हैं। मंजू के पति का निधन लगभग एक वर्ष पूर्व हुआ, जिसके बाद से परिवार का आर्थिक और सामाजिक सहारा समाप्त हो गया।
आजीविका की चुनौतियां और सीमित साधन
पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी पूरी तरह मंजू पर आ गई। वर्तमान में उनका भाई ही कुछ हद तक आर्थिक सहायता कर रहा है, लेकिन बढ़ती महंगाई और दैनिक जरूरतों के सामने यह सहायता अपर्याप्त साबित हो रही है। बेटा छठी कक्षा में पढ़ता है और उसकी शिक्षा, भोजन, कपड़े तथा अन्य आवश्यकताओं को पूरा करना मंजू के लिए निरंतर संघर्ष का कारण बना हुआ है।
सरकारी स्तर पर परिवार के पास बीपीएल श्रेणी का पीला राशन कार्ड है, जिससे सीमित मात्रा में गेहूं उपलब्ध हो पाता है, परंतु इससे परिवार की समस्त आवश्यकताएं पूरी नहीं हो पातीं।
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अन्नपूर्णा मुहिम के तहत सहायता की पहल

संत रामपाल जी महाराज द्वारा आरंभ की गई अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत मुनिंदर धर्मार्थ ट्रस्ट के सेवादारों ने इस परिवार तक सहायता पहुँचाई। यह मुहिम उन परिवारों को चिन्हित करती है, जिनका कोई स्थायी सहारा नहीं है और जो रोजमर्रा की जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। लहरारा कॉलोनी में सेवादारों द्वारा पहुंचाई गई सहायता सामग्री ने इस परिवार को तत्काल राहत प्रदान की।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा मंजू के परिवार को निम्न सामग्री प्रदान की गई:-
| क्रम | सामग्री | छोटा परिवार (1-3 सदस्य) |
| 1 | आटा | 15 किलो |
| 2 | चावल | 5 किलो |
| 3 | चीनी | 2 किलो |
| 4 | सरसों तेल | 1 लीटर |
| 5 | चना दाल | 1 किलो |
| 6 | मूंग दाल | 1 किलो |
| 7 | हल्दी | 150 ग्राम |
| 8 | जीरा | 150 ग्राम |
| 9 | लाल मिर्च | 100 ग्राम |
| 10 | नहाने का साबुन | 4 टिक्की |
| 11 | कपड़े धोने का साबुन | 1 पैकेट |
| 12 | टाटा नमक | 1 पैकेट |
| 13 | अमूल सूखा दूध | 1 किलो |
| 14 | आलू | 5 किलो |
| 15 | प्याज | 5 किलो |
| 16 | अचार | 1 पैकेट |
| 17 | कपड़े धोने का सर्फ | 1 पैकेट |
| 18 | टाटा अग्नि चाय पत्ती | 1 पैकेट |
यह सामग्री परिवार की दैनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर प्रदान की गई।
निरंतर सहयोग का भरोसा
सेवादारों ने स्पष्ट किया कि यह सहायता केवल एक बार की नहीं है। संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार, यह परिवार तब तक अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत सहायता प्राप्त करता रहेगा, जब तक बच्चा आत्मनिर्भर होकर कमाने योग्य नहीं हो जाता। परिवार को एक विशेष संपर्क कार्ड दिया जाएगा, जिसके माध्यम से राशन समाप्त होने से दो दिन पूर्व सूचना देने पर नई सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
आवास से जुड़ी समस्याएं और समाधान की दिशा
मंजू ने मकान की जर्जर स्थिति और छत से पानी टपकने की समस्या का उल्लेख किया। सेवादारों ने आश्वासन दिया कि इस विषय में संत रामपाल जी महाराज के चरणों में प्रार्थना भेजी जाएगी और आदेश प्राप्त होने पर मकान की मरम्मत की व्यवस्था भी की जाएगी। यह पहल दर्शाती है कि मुहिम केवल खाद्य सामग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि समग्र जीवन सुधार का प्रयास है।
संत रामपाल जी महाराज की समाज सुधार योजनाएं
अन्नपूर्णा मुहिम के अतिरिक्त संत रामपाल जी महाराज द्वारा समाज कल्याण हेतु अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें दहेज मुक्त विवाह, निःशुल्क एंबुलेंस सेवाएं, रक्तदान शिविर, गंभीर रोगियों के इलाज में सहायता, तथा सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को ड्रेस, किताबें और जूते उपलब्ध कराना शामिल है। इन पहलों ने समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए हैं।
नियमों के साथ सेवा का संदेश
अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत राहत सामग्री केवल उन्हीं जरूरतमंदों को दी जाती है, जो नशा मुक्त जीवन जीते हैं और मांस अथवा अन्य अभक्ष पदार्थों का सेवन नहीं करते। यदि कोई लाभार्थी इन शर्तों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसकी सहायता तत्काल प्रभाव से बंद कर दी जाती है। यह नियम सामाजिक सुधार और नैतिक जीवन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लागू किया गया है।
सेवा से सशक्त होता समाज
संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम ने सोनीपत की लहरारा कॉलोनी में मंजू के परिवार को केवल राशन नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और भविष्य की उम्मीद दी है। यह पहल दर्शाती है कि संगठित सेवा और करुणा के माध्यम से समाज के सबसे कमजोर वर्गों को भी सशक्त बनाया जा सकता है।
