उत्तराखंड के बधानी ताल में गरीबी से जूझते सुरजन जी के परिवार तक पहुँची अन्नपूर्णा मुहिम मानवता की मिसाल बनकर उभरी संत रामपाल जी महाराज की पहल

उत्तराखंड के बधानी ताल में गरीबी से जूझते सुरजन जी के परिवार तक पहुँची अन्नपूर्णा मुहिम: मानवता की मिसाल बनकर उभरी संत रामपाल जी महाराज की पहल

बधानी ताल (उत्तराखंड) के पहाड़ी इलाकों की वास्तविक तस्वीर आज भी विकास की चमक से काफी दूर है। यहां ऐसे अनगिनत परिवार हैं जो दो वक्त की रोटी, पहनने के लिए कपड़ा और रहने के लिए एक सुरक्षित छत तक के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इन्हीं अनछुए गांवों में से एक है, बधानी ताल, जिला रुद्रप्रयाग, जहां सुरजन जी और उनके बेटे सूरज गरीबी, बीमारी और सुविधाओं की कमी से लड़ते हुए अपने जीवन को किसी तरह ढकेल रहे हैं।

ऐसे ही बेसहारा परिवारों की मदद के लिए संत रामपाल जी महाराज पहाड़ों में नई आशा का दीपक बनकर पहुंच रहे है। वे लगातार दूर-दराज के क्षेत्रों में उन लोगों तक राहत सामग्री पहुंचा रहे है जिनके पास न तो भोजन का साधन है, न शिक्षा की सुविधा और न ही बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की क्षमता।

गरीबी और बीमारी से घिरा सुरजन जी का परिवार

जब अन्नपूर्णा मुहिम की टीम सुरजन जी के घर पहुँची तो वहाँ का हाल देखकर यह समझना कठिन नहीं था कि यह परिवार किन परिस्थितियों में जीवन बिता रहा है।

सुरजन जी बताते हैं कि वे कई बीमारियों से जूझ रहे हैं 

  • पेट की समस्या
  • पाचन कमजोरी
  • मसूड़ों और दांतों में तेज दर्द

इलाज के लिए पैसे न होने की वजह से वे वर्षों से बेबसी में यह सब सह रहे हैं। घर का आर्थिक स्तंभ होने के बावजूद उनकी कमजोरी ने उन्हें लगभग काम करने लायक नहीं छोड़ा। उन्होंने बताया कि घर में गैस सिलेंडर तक नहीं है। खाना बनाने के लिए पत्थरों पर टिका चूल्हा और जंगल से लाई लकड़ियाँ ही उनका सहारा हैं। बारिश होने पर चूल्हा भी नहीं जल पाता और कई बार उन्हें भूखे पेट ही रात गुजारनी पड़ती है।

सूरज की टूटी पढ़ाई, संघर्षों से भरा बचपन

सुरजन जी का बेटा सूरज, जो केवल नौवीं तक पढ़ पाया, आज अपनी मां के साये के बिना, घर के सभी कामों और पिता की सेवा में लगा रहता है। सूरज का कहना है—

“फीस नहीं जमा हो पाई… किताबें नहीं मिल पाईं… ड्रेस नहीं थी, इसलिए स्कूल छोड़ना पड़ा।”

एक बच्चे के लिए शिक्षा उसका भविष्य होती है, लेकिन आर्थिक तंगी ने उसके सपनों को स्कूल की दहलीज पर ही रोक दिया। परिवार की जिम्मेदारियाँ और गरीबी दोनों मिलकर उसके बचपन को छीन चुकी हैं।

दूरस्थ गांवों तक क्यों नहीं पहुँच पाती सरकारी योजनाएँ?

भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी ऐसे अनगिनत परिवार हैं जो सरकारी सुविधाओं और योजनाओं तक नहीं पहुँच पाते।

  • कठिन पहाड़ी रास्ते
  • सीमित संसाधन
  • जानकारी का अभाव
  • और प्रशासनिक पहुंच की कमी

इन सब कारणों से उत्तराखंड के कई गांव पूरी तरह से उपेक्षित रह जाते हैं। सुरजन जी का परिवार भी इसी उपेक्षा की मार झेल रहा है।

अन्नपूर्णा मुहिम – भूख, बेरोजगारी और अभाव से लड़ने का प्रयास

संत रामपाल जी महाराज का नारा है,

“रोटी, कपड़ा और मकान, हर गरीब को देगा कबीर भगवान।”

इसी मिशन के तहत संत रामपाल जी महाराज हर उस जरूरतमंद तक पहुँच रहे है जो बीमारी, गरीबी या बेसहारा जीवन के कारण संघर्ष कर रहा है।

अन्नपूर्णा मुहिम टीम के सेवादार बताते हैं- “संत रामपाल जी महाराज का उद्देश्य यह है कि समाज का अंतिम व्यक्ति भी भूखा न सोए। हर परिवार को उसकी बुनियादी जरूरतें, भोजन, कपड़ा, घर की आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध हों।”

टीम ने बताया कि गांव में सुरजन जी की स्थिति की जानकारी उन्हें स्थानीय सूत्रों से मिली, जिसके बाद जाँच कर मामला संत रामपाल जी महाराज तक पहुंचाया गया। आदेश मिलते ही पूरी टीम तीन दिन के भीतर राहत सामग्री के साथ उनके घर पहुंच गई।

क्या-क्या सहायता पहुँचाई गई?

अन्नपूर्णा मुहिम के तहत सुरजन परिवार को बड़ी मात्रा में आवश्यक सामग्री दी गई, जिनमें शामिल हैं—

S.no.Item (सामग्री)Quantity (मात्रा)
1आटा 20 kg
2चावल 10 kg
3दाल 5 kg
4चीनी 5 kg
5तेल 2 ltr
6हल्दी1 पैकेट
7मिर्च 1 पैकेट
8धनिया 1 पैकेट
9चाय पत्ती 1 पैकेट
10नमक 1 पैकेट
11नहाने का साबुन 1 पैकेट
12कपड़े धोने का साबुन 1 पैकेट
13वाशिंग पाउडर 1 पैकेट
14चटाई1
15कपड़े आवश्यकता अनुसार
16स्कूल बैग आवश्यकता अनुसार
17किताबें, कॉपियां आवश्यकता अनुसार
18बच्चों की स्कूल ड्रेस आवश्यकता अनुसार

टीम ने आश्वासन दिया कि संत रामपाल जी महाज जी के आदेशानुसार जब तक यह परिवार अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो जाता, तब तक सहायता जारी रहेगी।आगे गैस सिलेंडर व अन्य घरेलू सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई जाएँगी।

सूरज और सुरजन जी की खुशी: ‘सतगुरु ने हम पर दया की’

राहत सामग्री पाकर सूरज कहता है- 

“मुझे किताबें, कॉपी, स्कूल ड्रेस, जूते… सब मिला है। अब मैं रोज स्कूल जाऊँगा।”

सुरजन जी भावुक होकर कहते हैं-

“हमारे सतगुरु ने हम पर दया की है…धन्यवाद।”

उनकी आँखों में वही चमक थी जो वर्षों बाद उजली हुई आशा से जन्म लेती है।

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संत रामपाल जी महाराज – सामाजिक सुधार की नई दिशा

संघर्षरत परिवारों को राहत पहुँचाना, बच्चों की शिक्षा का बोझ उठाना, गैस, भोजन, कपड़े तक की सुविधा देना, इन सब कार्यों ने संत रामपाल जी महाराज को करोड़ों गरीबों के लिए एक सहारा बना दिया है। उनकी सोच स्पष्ट है, -“समाज का अंतिम व्यक्ति भी सुकून से जी सके, यही सतयुग की शुरुआत है।”

आज जब दुनिया में स्वार्थ और दौड़ बढ़ रही है, ऐसे समय में अन्नपूर्णा मुहिम मानवता की मिसाल बनकर सामने आई है।

अन्नपूर्ण मुहिम: विशेष सूचना

अन्नपूर्णा मुहिम के तहत राहत सामग्री केवल उन्हीं जरूरतमंदों को दी जाती है जो—

  • पूर्णतः नशा मुक्त जीवन जीते हों
  • मांसाहार अथवा किसी भी अभक्ष वस्तु का सेवन न करते हों

यदि कोई लाभार्थी इन नियमों का उल्लंघन करता है तो सहायता तुरंत बंद कर दी जाएगी। संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा, 

  • मुफ्त खाद्य सामग्री
  • गैस सिलेंडर
  • स्कूल सामग्री
  • कपड़े
  • और अन्य आवश्यक वस्तुओं का वितरण लगातार किया जा रहा है।

बच्चों को किताबें, ड्रेस और बैग बिल्कुल निशुल्क दिए जाते हैं ताकि वे भी शिक्षा से वंचित न रहें। 

उत्तराखंड के बधानी ताल की यह कहानी सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि उन हजारों परिवारों का प्रतिनिधित्व करती है जो गरीबी, अभाव और असुरक्षा के बीच भी जीवन जीने की कोशिश करते हैं।

संत रामपाल जी महाराज बचा रहे हैं हर आग से

कहते हैं वन में लगने वाली आग सबसे भयानक और सबसे बड़ी होती है। तुलसीदास ने इन सभी की तुलना में पेट की आग को सबसे बड़ा बताया है और संत रामपाल जी महाराज ने इस आग से बचाया है। इस कलियुग में जहाँ धर्म मिटता जा रहा है, एक एक कथा करने के कथावाचक एक एक करोड़ रुपए ले रहे हैं! ऐसी स्थिति में संत रामपाल जी महाराज ने करोड़ों रुपए किसानों और गरीब, असहायों के लिए लुटा दिए हैं।

संत रामपाल जी महाराज ने शास्त्र आधारित सत्यभक्ति बताई है और इस तरह प्रेम, दया करुणा मानवता का संदेश सीखकर धर्म की पुनर्स्थापना इस कलियुग में की है। संत रामपाल जी महाराज ने पेट की आग और नरक की आग दोनों प्रकार की आगों से बचाया है और शास्त्रों को सरल करके बताते हुए, अपने निज घर सत्यालोक का ज्ञान दिया है।

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