माली गांव के सोनू जी को संत रामपाल जी महाराज से मिला जीवन का सहारा

बारिश में टपकती छत और भूख से जूझता इंसान — संत रामपाल जी महाराज ने बदली सोनू जी की किस्मत

आज हम आपको एक ऐसे व्यक्ति की कहानी बता रहे हैं, जो हरियाणा के माली गांव में एक छोटे से जर्जर घर में बिल्कुल अकेला जीवन जी रहा था। यह कहानी है सोनू जी की। न कोई परिवार पास, न कोई सहारा और न ही ऐसा कोई अपना, जो मुश्किल समय में उनके साथ खड़ा हो सके। लेकिन जब हर ओर से रास्ते बंद नजर आए, तब संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से उनके जीवन में उम्मीद की रोशनी पहुंचाई

मदद से पहले सोनू जी की हालत

सोनू जी जिस घर में रहते थे, वह घर कहलाने लायक भी नहीं रह गया था। बाहर से ही दीवारों में गहरी दरारें साफ नजर आती थीं। लकड़ी का पुराना दरवाजा जगह-जगह से टूटा हुआ था। जैसे ही अंदर कदम रखते, डर लगने लगता था। छत पूरी तरह कमजोर हो चुकी थी। लकड़ी की कड़ियां सड़ चुकी थीं और ऊपर की मिट्टी साफ दिखाई देती थी।

बारिश के समय पानी सीधे घर के अंदर आ जाता था। फर्श पर पानी भर जाता और छत से टपकती बूंदें हर पल खतरे का एहसास कराती थीं। घर के एक कमरे में तो नीचे से ही आसमान नजर आता था। वहां खड़ा होना भी जोखिम भरा था। यही कारण था कि हालात देखने पहुंचे लोग भी अंदर जाने से घबरा रहे थे।

सोनू जी ने स्वयं बताया कि यह घर अब सुरक्षित नहीं है, लेकिन मजबूरी में उन्हें यहीं रहना पड़ता है। न कहीं और जाने की जगह है, न ही कोई साधन।

अकेलापन और लगातार संघर्ष

सोनू जी पूरी तरह अकेले रहते हैं। उनका परिवार अलग-अलग स्थानों पर है—कोई ससुराल में, कोई दूसरे शहर में। लेकिन कठिन समय में कोई भी उनके साथ खड़ा नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि जब अपने ही मदद नहीं करते, तो इंसान अंदर से टूट जाता है।

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कभी दिहाड़ी का काम मिल जाता तो दो वक्त की रोटी चल जाती। कभी पड़ोसी थोड़ी मदद कर देता, तो दिन कट जाता। लेकिन यह सब अस्थायी था। कई बार काम नहीं मिलता था तो हालात और बिगड़ जाते थे। सबसे बड़ा डर छत को लेकर था। सोनू जी ने कहा कि कई बार लगता था कि कहीं छत गिर न जाए और दबकर जान ही न चली जाए। हर रात इसी डर के साये में गुजरती थी।

जब संत रामपाल जी महाराज की सहायता पहुंची

इसी अंधेरे और निराशा के बीच संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से सोनू जी की सहायता की। जब उनके हालात की जानकारी संत रामपाल जी महाराज तक पहुंची, तो उन्होंने तुरंत राहत सामग्री भिजवाने के निर्देश दिए।

यह सहायता किसी पहचान, सिफारिश या स्वार्थ के कारण नहीं थी। यह मदद केवल मानवता के नाते थी, ताकि कोई भी जरूरतमंद भूखा न रहे। संत रामपाल जी महाराज ने अपने शिष्यों के माध्यम से सोनू जी तक यह सहायता पहुंचवाई।

संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सहायता

संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत सोनू जी को रोजमर्रा के जीवन के लिए आवश्यक पूरा राशन और घरेलू सामान दिया गया, जिससे उनकी सबसे बड़ी चिंता—भोजन—दूर हो सके।

क्रमांकसामग्री का नाममात्रा
1आटा20 किलोग्राम
2चावल5 किलोग्राम
3आलू5 किलोग्राम
4प्याज5 किलोग्राम
5चीनी2 किलोग्राम
6चना दाल1 किलोग्राम
7मूंग दाल1 किलोग्राम
8सरसों का तेल1 लीटर
9सूखा दूध1 पैकेट
10चाय पत्ती1 पैकेट
11नमक1 पैकेट
12अचारआधा किलोग्राम
13हल्दी, मिर्च, जीरापूरा पैकेट
14नहाने का साबुन4 टिकिया
15कपड़े धोने का साबुन1 पैकेट
16कपड़े धोने का पाउडर1 पैकेट

यह सामान मिलते ही सोनू जी के चेहरे पर राहत साफ दिखाई देने लगी। अब उन्हें यह डर नहीं सताता था कि आज क्या खाएंगे या कल चूल्हा जलेगा या नहीं।

आगे भी मदद का भरोसा

सोनू जी को यह भी बताया गया कि संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी जा रही यह सहायता एक बार की नहीं है। राशन खत्म होने से पहले सूचना देने पर फिर से सहायता पहुंचाई जाएगी। उन्हें संपर्क के लिए एक कार्ड भी दिया गया, ताकि जरूरत पड़ने पर आसानी से मदद मिल सके। यह भरोसा उनके लिए बहुत बड़ा सहारा बन गया। अब वे खुद को पूरी तरह अकेला महसूस नहीं करते।

सोनू जी की जुबानी

सहायता मिलने के बाद सोनू जी भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि जब किसी अपने ने मदद नहीं की, तब संत रामपाल जी महाराज ने उनकी सुध ली। उन्होंने बताया कि यह सहायता सिर्फ खाने की नहीं है, बल्कि उस भरोसे की है, जिससे इंसान फिर से जीने की ताकत जुटा पाता है।

गांव वालों की प्रतिक्रिया

गांव के लोगों ने भी इस सहायता को देखा और सराहा। ग्रामीणों का कहना था कि आज के समय में निस्वार्थ भाव से किसी भूखे को भोजन देना बहुत बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि इस तरह की मदद समाज में इंसानियत को जीवित रखती है।

संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम का असर

संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित अन्नपूर्णा मुहिम ने सोनू जी की समस्या को केवल अस्थायी रूप से नहीं, बल्कि मूल रूप से हल करने का प्रयास किया है। भोजन और आवश्यक सामान मिलने से उनके जीवन में स्थिरता आई है। अब वे हर दिन भूख और डर के साथ नहीं जीते।

यह कहानी केवल सोनू जी की नहीं है, बल्कि उन सभी जरूरतमंद लोगों की है, जिनकी जिंदगी में संत रामपाल जी महाराज अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से सहारा और सम्मान लेकर पहुंच रहे हैं। यह उदाहरण दिखाता है कि सही समय पर दी गई सच्ची मदद किसी की पूरी जिंदगी बदल सकती है।

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