हरियाणा के जिला जींद अंतर्गत सफीदों शहर में मानवता की एक अनूठी सेवा देखने को मिली है। यहाँ संत रामपाल जी महाराज ने एक अत्यंत संकटग्रस्त परिवार को सहायता प्रदान की।
यह सहायता मात्र एक औपचारिक वितरण नहीं, बल्कि उस समय दी गई संजीवनी है जब एक परिवार भुखमरी और बेसहारी की कगार पर खड़ा था। संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम के तहत समाज के उन अंतिम व्यक्तियों तक पहुँचा जा रहा है, जिनकी सुध लेने वाला शासन या समाज में कोई अन्य नहीं है। यह मुहिम आज के इस कठिन दौर में पीड़ित मानवता के लिए एक सशक्त आधार बनकर उभरी है।
मीना बहन का सात वर्षों का निरंतर संघर्ष
सफीदों की रहने वाली मीना बहन की कहानी अत्यंत हृदयविदारक है। उनके पति पिछले सात वर्षों से उन्हें और उनके तीन बच्चों को छोड़कर अज्ञात स्थान पर चले गए हैं। तब से मीना बहन अकेले ही अपने दो बेटियों और एक बेटे की जिम्मेदारी उठा रही हैं।
परिवार के पास अपना कोई निजी घर या भूमि नहीं है; वे पिछले डेढ़ वर्ष से एक छोटे से किराए के कमरे में रहने को विवश हैं। आर्थिक स्थिति इतनी विकट है कि मीना को समय-समय पर किराए के कारण मकान भी बदलना पड़ता है। जीवन यापन के लिए वे दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा करने का कठिन कार्य करती हैं, ताकि उनके बच्चों को दो वक्त की रोटी और शिक्षा मिल सके।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई व्यापक खाद्य सहायता
परिवार की इस दयनीय स्थिति का संज्ञान लेते हुए संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार उनके शिष्य अनिल दास और उनकी टीम राहत सामग्री लेकर उनके द्वार पहुँची और परिवार को खाद्य सामग्री प्रदान कि गई जो इस प्रकार है।
| क्र.सं. | सामग्री का नाम | मात्रा/विवरण |
| 1 | आटा | 20 किलो |
| 2 | चावल | 5 किलो |
| 3 | आलू | 5 किलो |
| 4 | प्याज | 5 किलो |
| 5 | चीनी | 2 किलो |
| 6 | नमक (टाटा) | 1 किलो |
| 7 | तेल | 1 लीटर |
| 8 | अमूल दूध (सूखा) | 1 किलो |
| 9 | मूंग दाल | 1 किलो |
| 10 | चना दाल | 1 किलो |
| 11 | नहाने का साबुन | 1 सेट (4 टिक्की) |
| 12 | चना | 500 ग्राम |
| 13 | चाय पत्ती (टाटा) | 250 ग्राम |
| 14 | मिर्च पाउडर | 100 ग्राम |
| 15 | हल्दी पाउडर | 150 ग्राम |
| 16 | जीरा | 150 ग्राम |
| 17 | आचार | 1 पैकेट |
| 18 | कपड़े धोने का साबुन | 1 सेट ( 4 टिक्की) |
| 19 | घड़ी डिटर्जेंट पाउडर (सर्फ) | 500 ग्राम |
शिक्षा और आवास के लिए महाराज का संरक्षण
मीना बहन की दोनों बेटियाँ 12वीं कक्षा उत्तीर्ण कर चुकी हैं, परंतु आर्थिक अभाव के कारण आगे की शिक्षा अधर में थी। संत रामपाल जी महाराज के शिष्य ने स्पष्ट किया कि संत रामपाल जी महाराज की मुहिम ‘रोटी, कपड़ा, शिक्षा और मकान’ के सिद्धांत पर आधारित है।
संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार ट्रस्ट ने बच्चों की आगे की पढ़ाई के लिए किताबें, स्टेशनरी और ड्रेस का पूरा खर्च उठाने का उत्तरदायित्व लिया है। इसके अतिरिक्त, परिवार की सबसे बड़ी चिंता उनके सिर पर अपनी छत न होना है। महाराज के निर्देशों के अनुसार, भविष्य में परिवार के लिए स्थाई आवास की व्यवस्था करने हेतु भी विचार किया जा रहा है, ताकि उन्हें बार-बार किराए के घरों में न भटकना पड़े।
सहायता हेतु जारी किया गया राशन कार्ड
यह सहायता केवल एक बार की मदद तक सीमित नहीं है। संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार ट्रस्ट ने मीना बहन को एक विशेष संपर्क कार्ड प्रदान किया है। इस कार्ड के माध्यम से परिवार को निर्देशित किया गया है कि राशन समाप्त होने से दो दिन पूर्व वे मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट के हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें।
इसके पश्चात, आजीवन उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति महाराज की ओर से की जाएगी। संत रामपाल जी महाराज जेल में रहते हुए भी अपनी आध्यात्मिक शक्ति और संगठित तंत्र के माध्यम से हजारों ऐसे परिवारों का भरण-पोषण कर रहे हैं। उनका यह कार्य सिद्ध करता है कि एक पूर्ण संत का उद्देश्य केवल उपदेश देना नहीं, बल्कि समाज के कष्टों को व्यवहारिक रूप से दूर करना है।
सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध महाराज का अभियान
संत रामपाल जी महाराज केवल अन्न सेवा ही नहीं कर रहे, बल्कि वे समाज से नशा, मांसाहार और दहेज जैसी कुरीतियों को जड़ से मिटा रहे हैं। संत रामपाल जी के कुछ नियमों को ट्रस्ट की ओर से स्पष्ट किया गया है कि सहायता के पात्र वही व्यक्ति हैं जो पूर्णतः नशामुक्त और शाकाहारी जीवन जीते हैं। संत रामपाल जी महाराज के प्रयासों से आज लाखों परिवार दहेज मुक्त विवाह और बुराई रहित जीवन अपना रहे हैं।
सहायता मिलने के उपरांत मीना जी के विचार
मीना बहन ने इस सहायता के लिए संत रामपाल जी महाराज का कोटि-कोटि धन्यवाद किया और कहा कि आज के युग में जहाँ कोई किसी की सुध नहीं लेता, वहां महाराज जी ने एक पिता और संरक्षक की भूमिका निभाकर उनके परिवार को टूटने से बचा लिया है।
संत रामपाल जी महाराज: अंधेरे में आशा की किरण
संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित अन्नपूर्णा मुहिम सफीदों के इस परिवार के लिए अंधेरे में उजाले की किरण साबित हुई है। मीना बहन के संघर्षपूर्ण जीवन में अब स्थिरता आने की उम्मीद जगी है।
यह स्पष्ट है कि जब सरकारी तंत्र और व्यक्तिगत प्रयास विफल हो जाते हैं, तब संत रामपाल जी महाराज जैसे महापुरुष की मानवीय नीतियां समाज का कल्याण करती हैं। यह सेवा कार्य न केवल एक परिवार की भूख मिटा रहा है, बल्कि बच्चों के भविष्य को शिक्षित कर राष्ट्र निर्माण में भी अतुलनीय योगदान दे रहा है।

