हरियाणा के झज्जर जिले के बहादुरगढ़ तहसील में स्थित खेड़का गुर्जर गांव पहली नजर में किसी भी सामान्य ग्रामीण बस्ती जैसा दिखता है कच्ची-पक्की गलियां, धूल उड़ाते रास्ते, खेतों की हरियाली और रोजमर्रा की जिंदगी में उलझे लोग। लेकिन इसी गांव के एक छोटे से कोने में दो जिंदगियां ऐसी हैं, जिनकी कहानी सिर्फ गरीबी की नहीं, बल्कि टूटे हुए सपनों, अकेलेपन और अंतहीन संघर्ष की भी है।
यह कहानी है राजवीर और उनकी 80 वर्षीय मां गंगा देवी की। एक बेटा जो मानसिक रूप से अस्वस्थ है और एक बूढ़ी मां जो चल-फिर भी नहीं सकती। न घर में कमाने वाला कोई है, न खेत, न पशु, न पेंशन का सहारा बस एक टूटी-फूटी झोपड़ी और हर रोज भूख से जूझती जिंदगी।
इसी निराशा के बीच जब सब दरवाजे बंद हो चुके थे, तब उनके जीवन में एक उम्मीद आई संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम। यह सिर्फ राशन वितरण नहीं था; यह दो भूखे चेहरों पर लौटी मुस्कान थी, दो टूटे दिलों में जगी नई आस थी।
खेड़का गुर्जर में अन्नपूर्णा मुहिम की दस्तक
एसए न्यूज़ की टीम जब दोबारा खेड़का गुर्जर पहुंची, तो गांव में एक अलग ही माहौल था। संत रामपाल जी महाराज के शिष्य, राहत सामग्री लेकर इस परिवार तक पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि संत रामपाल जी महाराज ने यह मुहिम गरीब और असहाय परिवारों के लिए शुरू की है। उनका उद्देश्य सिर्फ पेट भरना नहीं, बल्कि गरीबों को सम्मान के साथ जीने का हक देना है।
उन्होंने कहा, “संत रामपाल जी महाराज कहते हैं, गरीब हमारे भाई हैं। रोटी, कपड़ा, चिकित्सा और मकान हर गरीब को देगा कबीर भगवान।” इसी विचारधारा के साथ आश्रम से खाद्य सामग्री लेकर शिष्य गांव-गांव जाते हैं, जरूरतमंद परिवारों का सर्वे करते हैं और बिना किसी भेदभाव के मदद पहुंचाते हैं।
कैसे हुआ इस परिवार का चयन? – जमीन से जुड़ा सर्वे
यह मदद अचानक नहीं आई थी। इसके पीछे गांव-स्तरीय गहन सर्वे था। गांव के चौकीदार, जो स्वयं संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी हैं, उन्होंने इस परिवार की स्थिति के बारे में जानकारी दी। उनके साथ अन्य भक्तों ने भी पुष्टि की कि राजवीर और उनकी मां सचमुच अत्यंत दयनीय स्थिति में हैं। जगबीर दास ने बताया कि जब उन्होंने यह मामला संत रामपाल जी महाराज तक पहुंचाया, तो तुरंत आदेश मिला: “जाओ, उस परिवार की पूरी रसोई का सामान पहुंचाओ।” यह बात दर्शाती है कि मुहिम केवल बातों पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सक्रिय और मानवीय है।
राहत सामग्री का पूरा विवरण – एक महीने का राशन
इस परिवार को दिया गया राशन किसी औपचारिक मदद जैसा नहीं था, बल्कि पूरी सोच-समझ के साथ तैयार किया गया पैकेज था। इसमें शामिल था:
| क्र. सं. (S. No.) | सामान (Item) | मात्रा (Quantity) |
| 1 | आटा | 15 किलो |
| 2 | चावल | 5 किलो |
| 3 | आलू | 5 किलो |
| 4 | प्याज | 5 किलो |
| 5 | चीनी | 2 किलो |
| 6 | चना दाल | 1 किलो |
| 7 | मूंग दाल | 1 किलो |
| 8 | सरसों का तेल | 1.25 लीटर (सवा लीटर) |
| 9 | दूध | 0.5 लीटर (आधा लीटर) |
| 10 | सर्फ | 0.5 किलो (आधा किलो) |
| 11 | कपड़े धोने का साबुन | 1 पैकेट |
| 12 | नहाने का साबुन | 4 बट्टी |
| 13 | नमक | 1 पैकेट |
| 14 | चायपत्ती | 1 पैकेट |
| 15 | हल्दी | 1 पैकेट |
| 16 | लाल मिर्च | 1 पैकेट |
| 17 | धनिया पाउडर | 1 पैकेट |
| 18 | जीरा | 1 पैकेट |
| 19 | अचार | 1 पैकेट |
यह पैकेज लगभग पूरे महीने की रसोई के लिए पर्याप्त था। यह सिर्फ खाना नहीं था, यह सुरक्षा, भरोसा और आत्मसम्मान था। और यह मुहिम एक माह तक ही सीमित नहीं थी बल्कि हमेशा के लिए संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई है। उन्हें एक सहायता कार्ड दिया गया जिसमें वह किसी भी सामग्री की आवश्यकता पड़ने पर या वर्तमान राशन ख़त्म होने पर कॉल करके सहायता मंगवा सकते हैं।
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राजवीर और गंगा देवी की भावनात्मक प्रतिक्रिया
जब राजवीर ने यह राशन देखा, तो वह जैसे बच्चा बन गया। उसने खुशी से कहा, “अब रोज सब्जी बनेगी, अचार मिलेगा, मिर्च है, सब है।” उसके चेहरे पर वह मुस्कान थी जो शायद महीनों से गायब थी। गंगा देवी, जिनकी आंखों में हमेशा थकान और दुख झलकता था, भावुक होकर बोलीं: “इतनी उम्र में ऐसी सेवा मैंने पहले कभी नहीं देखी। संत रामपाल जी महाराज ने सच में हम जैसे गरीबों की सुध ली है।” उनके लिए यह सिर्फ राहत नहीं थी, यह जीवनदान जैसा था।
गरीबी का दर्द: टूटी झोपड़ी में जीवन
राजवीर के घर की तस्वीर बेहद हृदयविदारक थी। एक छोटी, जर्जर झोपड़ी, जिसकी छत से धूप छनकर आती है। दीवारों पर दरारें, फर्श पर मिट्टी, न बिजली की व्यवस्था, न साफ पानी। गर्मी में रहना मुश्किल, बारिश में तो और भी ज्यादा खतरनाक। यही वह घर है जिसमें 80 साल की गंगा देवी और उनका मानसिक रूप से अस्वस्थ बेटा रहते हैं। यह सिर्फ मकान नहीं, गरीबी की जीती-जागती तस्वीर है।
अन्नपूर्णा मुहिम का व्यापक सामाजिक प्रभाव
अन्नपूर्णा मुहिम सिर्फ राशन बांटने तक सीमित नहीं है। यह एक व्यापक समाज-सुधार अभियान है।
इसके तहत:
- गरीबों को मुफ्त राशन दिया जाता है
- जरूरत पड़ने पर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जाता है
- स्कूली बच्चों को यूनिफॉर्म, किताबें और स्टेशनरी दी जाती है
- असहाय परिवारों की नियमित निगरानी की जाती है
- जरूरत पड़ने पर कपड़े, जूते और दवाइयां भी दी जाती हैं
यह मुहिम दान नहीं, बल्कि मानवता का धर्म मानती है।
नैतिक शर्तें और अनुशासन: नशामुक्त जीवन की अपील
अन्नपूर्णा मुहिम के तहत राहत पाने वालों के लिए कुछ नियम भी तय किए गए हैं:
- लाभार्थी को पूरी तरह नशामुक्त जीवन जीना होगा
- मांसाहार या किसी अभक्ष वस्तु का सेवन नहीं करना होगा
- अगर कोई व्यक्ति सहायता लेने के बाद नशा करता पाया गया, तो मदद रोक दी जाएगी
यह शर्तें सख्ती के लिए नहीं, बल्कि समाज को स्वस्थ बनाने के लिए हैं। संत रामपाल जी महाराज ने एक नए समाज की स्थापना की है और ख़त्म होती मानवता को पुनर्जीवन दिया है।
संत रामपाल जी महाराज परमेश्वर का अवतार
संत रामपाल जी महाराज केवल एक धार्मिक नेता नहीं, बल्कि आधुनिक समाज के लिए करुणा, सेवा और अनुशासन के प्रतीक हैं। जेल में रहते हुए भी उन्होंने अपने शिष्यों के माध्यम से गरीबों तक मदद पहुंचाई, जो असाधारण नेतृत्व का उदाहरण है। उन्होंने समाज को यह सिखाया कि असली धर्म मंदिर-मस्जिद में नहीं, बल्कि भूखे को रोटी देने में है। उनकी अन्नपूर्णा मुहिम ने हजारों परिवारों को राहत दी है और यह सिद्ध किया है कि सच्चा संत वही है जो समाज को एक समान दृष्टि से सबको देखें और सबको एक परमात्मा की संतान माने। संत रामपाल जी महाराज ने हर प्रकार से मानव जीवन का उत्थान किया है।
जैसे कबीर साहब ने समाज में समानता, दया और न्याय का संदेश दिया, उसी परंपरा को संत रामपाल जी आगे बढ़ा रहे हैं। इस आस्था को सम्मान के साथ देखा जाना चाहिए। चाहे कोई इसे आध्यात्मिक मान्यता कहे या धार्मिक परंपरा, यह भावना लोगों को सेवा, सच्चाई और करुणा की ओर प्रेरित करती है।
निष्कर्ष: भूख से लड़ते दो जीवन और उम्मीद की रोशनी
राजवीर और गंगा देवी की कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि उन हजारों अनदेखे गरीबों की है जो चुपचाप अभाव में जी रहे हैं। अन्नपूर्णा मुहिम ने न केवल उनका पेट भरा, बल्कि उन्हें यह एहसास दिलाया कि वे अकेले नहीं हैं। यह कहानी हमें सिखाती है कि असली विकास वही है, जिसमें सबसे नीचे खड़ा व्यक्ति भी साथ चले। संत रामपाल जी महाराज की यह पहल केवल राहत नहीं, बल्कि मानवीय क्रांति है, जहां भूख हारती है और मानवता जीतती है। उन्होंनें समाज में मानवता की पुनर्स्थापना की है वे असाधारण संत हैं।


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