पोरबंदर, अन्नपूर्णा मुहिम

पोरबंदर, गुजरात: 35 वर्षों से अंधेरे में जी रही 80 वर्षीय बुजुर्ग जीवू बा के जीवन में संत रामपाल जी महाराज बने प्रकाश पुंज

पोरबंदर (गुजरात): जीवन की सांझ में जब अपनों का साथ सबसे ज्यादा जरूरी होता है, तब यदि कोई अकेला और बेसहारा हो, तो जीवन का हर पल पहाड़ जैसा लगने लगता है। पोरबंदर जिले के मफत फलिया में रहने वाली एक 80 वर्षीय बुजुर्ग माता जी पिछले 35 वर्षों से इसी अकेलेपन, अंधकार और घोर अभाव से जूझ रही थीं। लेकिन, ‘जिनका कोई नहीं होता, उनका भगवान होता है’, इस कहावत को चरितार्थ करते हुए संत रामपाल जी महाराज ने इस बुजुर्ग जीवू बा की सुध ली और उनके जीवन को खुशियों और आशा की नई किरण से भर दिया।

जर्जर मकान और 35 साल का एकांत: एक संघर्षपूर्ण जीवन

पोरबंदर सिटी एरिया के मफत फलिया की रहने वाली जीवू बा की उम्र लगभग 80 वर्ष हो चुकी है। उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय थी। उनका पास कहने को तो एक घर था, लेकिन वास्तव में वह खंडहर जैसा था। घर में न बिजली की सुविधा थी, न ही बुनियादी सुख-सुविधाएं। चारों तरफ केवल अंधकार और अभाव का साम्राज्य था।

सबसे दुखद पहलू यह था कि पिछले 35 सालों से वे नितांत अकेली रह रही थीं। उनका कोई सहारा नहीं था, कोई कमाने वाला नहीं था। शरीर वृद्ध होने के कारण वे स्वयं कमाने में असमर्थ थीं और पूरी तरह से भगवान भरोसे या कभी-कभार पड़ोसियों से मिलने वाली मदद पर ही जीवित थीं। कई बार ऐसी स्थिति होती थी कि चूल्हा तो होता था, लेकिन पकाने के लिए अन्न का एक दाना नहीं होता था।

संत रामपाल जी महाराज बने बुढ़ापे की लाठी

जब इस बुजुर्ग माता की दयनीय स्थिति और उनकी लाचारी की जानकारी संत रामपाल जी महाराज तक पहुंची, तो उन्होंने तत्काल उन्हें सहारा देने का निर्णय लिया। संत रामपाल जी महाराज ने जीवू बा के लिए न केवल राशन की व्यवस्था की, बल्कि उन्हें यह एहसास भी दिलाया कि वे अब इस दुनिया में अकेली नहीं हैं।

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राहत सामग्री: हर छोटी-बड़ी जरूरत का ख्याल

संत रामपाल जी महाराज ने माता जी को जो सामग्री प्रदान की, उसमे माता जी की हर छोटी-बड़ी जरूरत का ध्यान रखा गया। संत रामपाल जी महाराज द्वारा उच्च गुणवत्ता वाली निम्नलिखित सामग्री प्रदान की गई:

श्रेणीसामग्री विवरण
अनाज व आटा15 किलो आटा, 5 किलो चावल
दालें1 किलो चना दाल, 500 ग्राम पीली मूंग दाल, 500 ग्राम हरी मूंग दाल, 500 ग्राम काले चने
मसाले व तेल1 किलो सरसों का तेल, 150 ग्राम जीरा, 150 ग्राम हल्दी, 100 ग्राम लाल मिर्च, 1 किलो नमक
सब्जियां व अन्य5 किलो आलू, 5 किलो प्याज, 500 ग्राम आचार
पेय पदार्थ250 ग्राम टाटा चाय, 500 ग्राम सूखा दूध (Milk Powder), 2 किलो चीनी
स्वच्छता सामग्रीनहाने के 4 साबुन, कपड़े धोने का 1 किलो साबुन, 500 ग्राम डिटर्जेंट पाउडर
वस्त्र व अन्यपहनने के लिए 2 जोड़ी कपड़े और चप्पल

आजीवन सहयोग का वचन

संत रामपाल जी महाराज ने इस मदद को केवल एक दिन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि माता जी के भविष्य को भी सुरक्षित कर दिया। संत रामपाल जी महाराज ने यह सुनिश्चित किया है कि जब तक माता जी जीवित हैं, उन्हें राशन और जरूरी सामान की कोई कमी नहीं होगी।

उन्हें एक विशेष कार्ड और संपर्क नंबर दिया गया है। संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार, जैसे ही राशन खत्म होने वाला होगा, एक फोन कॉल पर नई सामग्री उनके घर पहुंचा दी जाएगी।

पड़ोसियों और माता जी की प्रतिक्रिया: “साक्षात भगवान का रूप”

इतनी भारी मात्रा में सहायता सामग्री और ऐसा अपनापन पाकर बुजुर्ग जीवू बा की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। गुजराती भाषा में अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए उन्होंने संत रामपाल जी महाराज को ‘भगवान’ का दर्जा दिया और बार-बार उनका धन्यवाद किया।

उनके पड़ोस में रहने वाली एक महिला ने बताया,

“ये माजी 35 साल से अकेली रह रही थीं। इनका कोई भी नहीं था, कोई पानी पूछने वाला भी नहीं था। आज संत रामपाल जी महाराज ने इनकी जो मदद की है, वह कलयुग में सतयुग जैसा कार्य है। गरीब का सहारा बनकर संत रामपाल जी महाराज ने मानवता की मिसाल पेश की है। संत जी की संस्था अकेली है जो ऐसे काम कर रही है”

संत रामपालजी की अन्नपूर्णा मुहिम 

पोरबंदर की यह घटना प्रमाण है कि संत रामपाल जी महाराज केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं दे रहे, बल्कि समाज के सबसे वंचित, शोषित और जरूरतमंद लोगों के लिए संजीवनी बनकर उभरे हैं। जहाँ शासन-प्रशासन की नजरें नहीं पहुँच पातीं, वहाँ संत रामपाल जी महाराज की दया पहुँच रही है। 

संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही यह ‘अन्नपूर्णा मुहिम‘ पूर्णतः निःशुल्क है। यह सहायता केवल उन जरूरतमंद परिवारों को दी जाती है जो नशामुक्त हैं और मांस-मदिरा का सेवन नहीं करते। यदि लाभार्थी भविष्य में नशा, मांस का सेवन करता पाया जाता है, तो सहायता बंद कर दी जाती है।

संपर्क सूत्र (गुजरात): 9725088322, 7203000125

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