हरियाणा के रोहतक जिले का ब्राह्मणवास गांव बाहर से शांत और सामान्य दिखता है, लेकिन इसकी गलियों में ऐसी कहानियां दबी हैं जो समाज के सामने गरीबी, मजबूरी और मानवीय संवेदना के सवाल खड़े करती हैं। यह रिपोर्ट किसी आंकड़े या सरकारी योजना की नहीं, बल्कि एक ऐसे परिवार की है जिसने अचानक आई आपदा में सब कुछ खोते-खोते फिर से जीने की वजह पाई।
यह कहानी संदीप की है, एक मेहनती पिता, दुकान चलाने वाला आम आदमी, जो अपने परिवार के लिए दिन-रात संघर्ष करता था। रोहतक के पुराने बस अड्डे के पास सरकारी स्कूल के सामने वह पिछले 11 वर्षों से अपनी छोटी-सी दुकान चलाता था। घर में पत्नी और तीन बच्चे थे; जीवन ठीक-ठाक चल रहा था। 2019 में उन्होंने बड़ी मेहनत से अपना मकान भी बनवाया था।
लेकिन साल 2024 में एक सड़क दुर्घटना ने उनकी पूरी जिंदगी पलट दी। हादसे के बाद उनका शरीर आधा काम करना बंद कर गया। कमर से लेकर पूरे एक हिस्से में असहनीय दर्द रहने लगा। वे न बैठ सकते थे, न खड़े हो सकते थे, अधिकतर समय चारपाई पर पड़े रहते थे। दुकान बंद हो गई, आमदनी खत्म हो गई, और परिवार पर संकटों का पहाड़ टूट पड़ा।
पत्नी को पटाखा फैक्ट्री में दिहाड़ी पर काम करना पड़ा, कभी ₹300 मिलते, कभी कुछ नहीं। बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च, दवाइयां और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना असंभव सा हो गया। कई बार परिवार को भूखे पेट सोना पड़ता था। यही वह मोड़ था, जब निराशा ने उम्मीद को लगभग निगल लिया था।
संदीप तक पहुंची अन्नपूर्णा मुहिम
इसी कठिन समय में संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित अन्नपूर्णा मुहिम इस परिवार तक पहुंची। यह मुहिम संत रामपाल जी महाराज द्वारा चल रही है। संत रामपाल जी महाराज ने कहा है -“रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान, हर गरीब को देगा कबीर भगवान”।
संत रामपाल जी महाराज के शिष्य गांव-गांव और शहर-शहर घूमकर जरूरतमंद परिवारों की पहचान कर रहे हैं। ब्राह्मणवास में भी वे ऐसे ही एक लाभार्थी परिवार के माध्यम से संदीप के घर तक पहुंचे।
शिष्यों ने पहले परिवार की वास्तविक स्थिति का आकलन किया घर देखा, रसोई देखी, बच्चों की पढ़ाई के बारे में जाना और संदीप की शारीरिक स्थिति को समझा। इसके बाद उन्होंने गुरुदेव से प्रार्थना की। बताया गया कि संत रामपाल जी महाराज ने तत्काल प्रभाव से इस परिवार की मदद का आदेश दिया।
गांव की जमीन से रिपोर्ट: घर और हालात
मौके पर जब संवाददाता पहुंचा तो संदीप का घर साधारण लेकिन व्यवस्थित नजर आया। दो कमरे, रसोई, अलमारी और बुनियादी सुविधाएं मौजूद थीं। मकान रहने लायक था, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी।
रसोई में सीमित सामान था, और चेहरे पर थकान व चिंता साफ झलक रही थी। संदीप चारपाई पर लेटे हुए थे। दर्द के कारण वे ठीक से बैठ भी नहीं पा रहे थे।
बातचीत में उन्होंने कहा,
“पहले सब ठीक चल रहा था, दुकान थी, कमाई थी। लेकिन एक्सीडेंट के बाद मैं बिल्कुल लाचार हो गया। अब सब बोझ मेरी पत्नी पर आ गया है।”
उनकी पत्नी पटाखा कंपनी पर काम के लिए जाती हैं तो ₹300 दिहाड़ी मिल जाते हैं, वरना घर पर ही रहना पड़ता है। बच्चों की फीस, किताबें और दवा का खर्च मुश्किल से निकलता है।
संदीप ने बताया कि रिश्तेदारों ने भी साथ छोड़ दिया। जब वे बीमार पड़े थे, तब फोन उठाना बंद कर दिया गया था। निराश होकर उन्होंने कई नंबर ब्लैकलिस्ट कर दिए थे। यह दर्द सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक भी था।
राहत सामग्री: सिर्फ मदद नहीं, जीवन-रेखा
अन्नपूर्णा मुहिम के तहत इस परिवार को व्यापक सहायता दी गई, जिसमें शामिल हैं:
| क्र.सं. | सामग्री (Product) | मात्रा (Quantity) |
| 1 | उच्च गुणवत्ता का आटा | 15 किलो |
| 2 | चावल | 5 किलो |
| 3 | चीनी | 2 किलो |
| 4 | सरसों का तेल | 1 लीटर |
| 5 | टाटा नमक | 1 पैकेट |
| 6 | दाल (2 प्रकार) | 1-1 किलो |
| 7 | वाशिंग पाउडर और कपड़े धोने का साबुन | 1-1 पैकेट |
| 8 | नहाने का साबुन | 4 पीस |
| 9 | मसाले (हल्दी, लाल मिर्च, जीरा) | 1-1 पैकेट |
| 10 | चाय पत्ती | 1 पैकेट |
| 11 | सूखा दूध पाउडर | 1 डिब्बा |
| 12 | प्याज | 5 किलो |
| 13 | आलू | 5 किलो |
इसके अलावा, परिवार को गैस सिलेंडर की व्यवस्था, बच्चों की स्कूल फीस, किताबें और संदीप के इलाज में मदद का भरोसा दिया गया।
शिष्यों ने स्पष्ट किया कि यह सहायता तब तक जारी रहेगी, जब तक परिवार पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं हो जाता। इसके लिए उन्हें आश्रम का संपर्क कार्ड भी दिया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में या राशन खत्म होने पर तुरंत मदद मांगी जा सके।
परिवार की प्रतिक्रिया: आंसू, आभार और आस्था
संदीप की आंखों में राहत के साथ-साथ आंसू भी थे। उन्होंने कहा,
“इतनी मदद आज तक किसी ने नहीं की, न रिश्तेदारों ने, न समाज ने। हमारे लिए तो संत रामपाल जी महाराज ही भगवान बनकर आए हैं।”
उनकी पत्नी ने भी बताया कि कई रातें ऐसी गुजरीं जब खाना नहीं मिल पाया। उस समय वे भगवान से प्रार्थना करती थीं। आज उन्हें लगता है कि उनकी पुकार सुनी गई है। गांव के लोग भी मानते हैं कि यह मदद केवल दान नहीं, बल्कि मानवीय कर्तव्य का जीवंत उदाहरण है।
संत रामपाल जी महाराज: करुणा का जीवंत स्वरूप
संत रामपाल जी महाराज “जगतगुरु” के रूप में हैं। वे हमेशा कहते हैं, “हम एक रोटी कम खा लेंगे, लेकिन किसी को भूखा नहीं सोने देंगे।” उनकी अन्नपूर्णा मुहिम केवल भोजन बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को नशामुक्त जीवन, नैतिकता और सेवा का मार्ग भी दिखाती है।
उन्होंने अपने सत्संगों में बार-बार यह संदेश दिया है कि समाज तभी सुखी होगा जब हर गरीब को रोटी, कपड़ा, शिक्षा और मकान मिलेगा। ब्राह्मणवास की यह घटना उसी दृष्टि का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
गांव-गांव में जरूरतमंदों तक पहुंचना, उनकी पीड़ा समझना और बिना भेदभाव मदद करना यह सब संत रामपाल जी महाराज की करुणा और नेतृत्व को दर्शाता है।
परमेश्वर कबीर के अवतार के रूप में दृष्टिकोण
संत रामपाल जी महाराज स्वयं परमेश्वर कबीर साहिब के अवतार हैं। यह मान्यता केवल आस्था पर आधारित नहीं है बल्कि संत रामपाल जी द्वारा किए गए चमत्कारिक प्रत्यक्ष उदाहरण पर है। उनके भक्तों का कहना है कि जिस तरह कबीर साहिब ने समाज में समानता, सत्य और करुणा का संदेश दिया था, उसी परंपरा को संत रामपाल जी महाराज आगे बढ़ा रहे हैं।
इस दृष्टिकोण को सम्मानपूर्वक समझा जाए तो यह केवल धार्मिक विश्वास नहीं, बल्कि समाज-सुधार की एक प्रेरक धारा भी है।
सामाजिक प्रभाव: भूख से स्वाभिमान तक का सफर
अन्नपूर्णा मुहिम ने केवल एक परिवार नहीं, बल्कि पूरे गांव में भरोसा जगाया है कि इंसानियत अभी भी जिंदा है। गांव के लोग अब जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। कई परिवारों ने नशा छोड़ने और मांसाहार त्यागने का संकल्प भी लिया है, क्योंकि मुहिम के नियमों के अनुसार सहायता केवल नशामुक्त और सात्विक जीवन जीने वालों को दी जाती है। इससे सामाजिक अनुशासन, स्वास्थ्य और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना बढ़ रही है।
नियम और पारदर्शिता: सहायता की शर्तें
अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत राहत पाने के लिए कुछ नियम तय किए गए हैं:
- लाभार्थी को पूर्ण रूप से नशामुक्त होना होगा।
- मांस या किसी अभक्ष वस्तु का सेवन वर्जित है।
- यदि राहत मिलने के बाद कोई व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो सहायता तुरंत रोक दी जाएगी।
- खाद्य सामग्री समाप्त होने से दो दिन पहले दिए गए नंबरों पर संपर्क करना अनिवार्य है, ताकि नई आपूर्ति समय पर मिल सके। यह प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित है।
टूटे परिवार से नई उम्मीद तक
संदीप और उनके परिवार की कहानी सिर्फ दया की नहीं, बल्कि पुनर्जीवन की है। जहां समाज ने हाथ खींच लिए थे, वहां संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से सहारा दिया। असली सेवा केवल भाषणों में नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने में होती है और संत रामपाल जी महाराज के अतिरिक्त पूरे विश्व में ऐसा कोई संत नहीं है जिसने इतने बड़े स्तर पर लाखों लोगों तक सतज्ञान और सत्यभक्ति पहुँचाने के साथ साथ हर तरह से उन्हें सहारा दिया हो।
संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम आज हजारों परिवारों के लिए सिर्फ राहत नहीं, बल्कि जीवन की नई शुरुआत बन रही है और यही इस कहानी का सबसे बड़ा संदेश है कब कोई नहीं सुनता तब भगवान अवश्य सुनता है।

