70 साल के नाना-नानी और चार अनाथ बच्चे, संत रामपाल जी की मदद से जगी उम्मीद! सेहवाज, पाली, राजस्थान

70 साल के नाना-नानी और चार अनाथ बच्चे, संत रामपाल जी की मदद से जगी उम्मीद! सेहवाज, पाली, राजस्थान

राजस्थान के सेहवाज गांव सेवा की यह दोपहरी किसी आम दिन जैसी नहीं थी। धूप वही थी, मिट्टी वही थी, लेकिन हवा में एक ऐसी उदासी घुली हुई थी जिसे शब्दों में पकड़ पाना आसान नहीं। जिस घर में कभी बच्चों की हँसी गूंजा करती थी, आज वहां एक अजीब-सी खामोशी पसरी थी। यह खामोशी किसी शोर से नहीं, बल्कि अभाव से पैदा हुई थी। इसी घर में चार नन्ही बच्चियां रहती हैं, मासूम चेहरे, बड़ी-बड़ी आंखें, और उन आंखों में सवालों की लंबी कतार। सवाल यह नहीं कि आज क्या खाएंगे, सवाल यह है कि कल का क्या होगा?

एक टूटा हुआ घर, जहां जिम्मेदारियों का बोझ बूढ़े कंधों पर आ पड़ा

यह घर किसी पक्के मकान की परिभाषा में नहीं आता। एक खुला-सा आंगन, टीन की छत, एक छोटा-सा कमरा ही इस परिवार की पूरी दुनिया है। इसी में छह लोग रहते हैं। चार बच्चियां और उनके नाना-नानी। नाना शफी खान मेरासी की उम्र करीब सत्तर से ऊपर हो चुकी है। चलने में परेशानी होती है, घुटनों में जान नहीं रही। उनकी पत्नी की हालत भी कुछ अलग नहीं। उम्र ने दोनों को थका दिया है, लेकिन जिंदगी ने उन्हें आराम करने का मौका नहीं दिया।

इन चार बच्चियों के माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। गंभीर बीमारी ने पहले मां को छीना और फिर पिता को। बच्चों के सिर से अचानक माता-पिता का साया उठ गया। अब उनका सहारा सिर्फ ये बूढ़े नाना-नानी हैं, जिनके पास न तो कमाई का साधन है, न ही भविष्य की कोई ठोस योजना।

“हम तो ऊपर वाले के भरोसे हैं”, नाना-नानी की टूटती आवाज

घर के बाहर खाट पर बैठे शफी खान जिनकी आयु 70 वर्ष से अधिक हो चली है उनकी आंखें नम हो जाती हैं वे रोते रोते अपनी कहानी सुनाते हैं।

“साहब, क्या करें… हमारी बच्ची भी चली गई, दामाद भी चला गया। अब ये चारों बच्चियां हमारे पास हैं। न मां है, न बाप। हम ही हैं इनके लिए।”

वे थोड़ी देर रुकते हैं, फिर कहते हैं,

“हमारी हालत तो आप देख ही रहे हो। पेट किसी तरह भर जाता है, बस वही बहुत है। पढ़ाई तो बहुत दूर की बात लगती है।”

उनकी पत्नी पास में बैठी चुपचाप सुन रही थीं। जब उनसे पूछा गया, तो बस इतना बोलीं,

“काम करने की ताकत नहीं बची। नरेगा में भी जाएं तो शरीर साथ नहीं देता। फिर भी भगवान पर भरोसा है।”

यह भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है।

चार मासूम सपने, जो स्कूल जाने को तरसते थे

इन चार बच्चियों में से दो का किसी तरह सरकारी स्कूल में दाखिला हो पाया है। लेकिन बाकी दो आज भी स्कूल का मुंह नहीं देख पाईं। वजह फीस नहीं सरकारी स्कूल में फीस नहीं लगती। वजह है कॉपी, किताब, ड्रेस और जूते जैसी छोटी लेकिन जरूरी चीजें।

बच्चियां जब स्कूल जाने वाली दूसरी बच्चियों को देखती हैं, तो उनकी आंखों में एक चुप-सी इच्छा तैर जाती है। वे कुछ कहती नहीं, लेकिन उनकी खामोशी बहुत कुछ कह जाती है।यह जुड़ते हुए सपनों की पहली ईंट थी।

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अन्नपूर्णा मुहिम: जब किसी ने इनकी जरूरत समझी

इसी गांव में एक दिन कुछ लोग पहुंचे। हाथों में थैलियां थीं, कंधों पर जिम्मेदारी और आंखों में सेवा का भाव। यह राहत अन्नपूर्णा मुहिम के तहत लाई गई थी, जो संत रामपाल जी महाराज के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाई जाती है।

जब सेवादारों ने एक-एक कर सामान बाहर निकाला, तो साफ़ समझ आ गया कि यह मदद सिर्फ औपचारिक नहीं है, बल्कि परिवार की हर छोटी-बड़ी ज़रूरत को ध्यान में रखकर भेजी गई है। इस परिवार को

क्र.सं. (S. No.)सामग्री (Product)मात्रा (Quantity)
1आटा25 किलो
2चावल5 किलो
3दालें (मूंग, चना और अन्य)3 तरह की
4सोयाबीन तेल2 लीटर
5चीनी4 किलो
6अमूल दूध2 डिब्बे
7मिश्रीलाल चाय पत्ती1 पैकेट
8टाटा नमक1 पैकेट
9हल्दी1 पैकेट
10लाल मिर्च1 पैकेट
11जीरा1 पैकेट
12अचार1 डिब्बा
13आलू5 किलो
14प्याज5 किलो

बच्चों को ध्यान में रखते हुए, नहाने और कपड़े धोने का साबुन व डिटर्जेंट भी दिया गया, ताकि घर की बुनियादी ज़रूरतें पूरी हो सकें। चारों बच्चियों के लिए अलग-अलग स्कूल बैग, स्कूल जूते, पूरी ड्रेस, कॉपियां, किताबें, पेंसिल और ज्योमेट्री बॉक्स दिए गए। यह साफ़ था कि यह मदद केवल आज का पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को पटरी पर लाने की एक सच्ची कोशिश है। यह सब देखकर नाना-नानी की आंखों में पहली बार एक सुकून दिखाई दिया।

“ये सिर्फ राशन नहीं, हमारी जिंदगी की सांस है”, परिवार की प्रतिक्रिया

शफी खान ने कांपती आवाज में कहा,
“हमने कभी सोचा नहीं था कि कोई हमारे घर तक आएगा। ये तो ऊपर वाले की रहमत है।” बच्चियां पहले झिझकीं, फिर जब उन्होंने अपने नए जूते और बैग देखे, तो उनके चेहरों पर हल्की-सी मुस्कान आ गई। वह मुस्कान छोटी थी, लेकिन बहुत कीमती थी।

राहत यहीं खत्म नहीं, साथ चलता भरोसा भी है

अन्नपूर्णा मुहिम की सबसे बड़ी बात यह है कि यह एक बार की मदद नहीं है। परिवार को साफ-साफ बताया गया कि जब तक घर में कोई कमाने योग्य नहीं हो जाता, तब तक हर महीने राशन और जरूरत का सामान मिलता रहेगा। परिवार को एक संपर्क कार्ड भी दिया गया है। राशन खत्म होने से दो दिन पहले फोन करना होगा और सहायता टीम फिर पहुंच जाएगी। यह निरंतरता इस मुहिम को खास बनाती है।

“आप ऐसे परिवारों तक कैसे पहुँचते हैं?” और “जेल से यह सब कैसे हो रहा है?” – सेवादारों का जवाब

जब रिपोर्टर ने सेवादारों से पूछा कि ऐसे असहाय और गुमनाम परिवारों को आप लोग आखिर ढूंढते कैसे हैं, तो उन्होंने बताया कि यह काम किसी कागज़ी सूची से नहीं, बल्कि ज़मीन पर उतरकर किया जाता है।
सेवादारों की टीमें गांव-गांव, गली-गली जाकर सर्वे करती हैं। सरपंच, ग्रामीणों और स्थानीय लोगों से बात की जाती है, कौन परिवार सबसे ज़्यादा संकट में है, किसके घर में कमाने वाला कोई नहीं, कौन बीमारी या मजबूरी से जूझ रहा है। जब जानकारी पुख्ता हो जाती है, तब टीम खुद मौके पर जाकर हालात देखती है और फिर सहायता पहुंचाई जाती है।

संत रामपाल जी महाराज स्वयं जेल में हैं, तो इतनी बड़ी मुहिम कैसे चल रही है?

इस पर सेवादारों ने बहुत शांत और भरोसे के साथ कहा कि यह सब उनके मार्गदर्शन, विचार और प्रेरणा से हो रहा है। उनका कहना था कि संत रामपाल जी महाराज शारीरिक रूप से कहीं भी हों, लेकिन उनकी सोच, उनका आदेश और उनका सेवा-संकल्प ही इस पूरे कार्य की रीढ़ है। सेवादारों के अनुसार, “यह काम किसी व्यक्ति की मौजूदगी से नहीं, बल्कि उसकी सोच और उद्देश्य से चलता है और वही हमें लगातार आगे बढ़ने की ताकत देता है।”

सेहवाज गांव की आवाज़: “पहली बार किसी संत को देते देखा”

गांव के सरपंच प्रेमराम माली ने कहा, “अक्सर लोग मांगने आते हैं, लेकिन यहां देने आए। मैंने गांव में जिन बच्चों को सबसे ज्यादा जरूरतमंद देखा, उनका नाम बताया और मदद तुरंत पहुंच गई।” पड़ोसियों की भी यही राय थी। “इन बच्चों के घर में कमाने वाला कोई नहीं है। ऐसे में अगर कोई आगे आकर मदद करता है, तो इससे बड़ी सेवा क्या होगी?” गांव में चर्चा है कि अगर ऐसे काम होते रहे, तो शायद कोई भी परिवार खुद को अकेला महसूस नहीं करेगा। यह कार्य तो सरकार था जो संत रामपाल जी महाराज कर रहे हैं। यह मेरे गांव में पहली बार हो रहा है।

सेवा, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी: संत रामपाल जी महाराज का योगदान

इस पूरी पहल के पीछे संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा और मार्गदर्शन बताया जाता है। उनके नाम से जुड़ी सेवा-परंपरा सिर्फ राशन तक सीमित नहीं है। नशामुक्त समाज, निःशुल्क विवाह, रक्तदान शिविर, वृक्षारोपण—ऐसी कई पहलें उनके अनुयायियों द्वारा लगातार की जा रही हैं।

सेवादारों ने बताया कि उनके निर्देश पर नशामुक्त समाज निर्माण के लिए गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, जहां लोगों को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है और अनुयायियों में नशा पूरी तरह वर्जित है। इसके साथ ही निःशुल्क व सादे विवाह आयोजित कर गरीब परिवारों को दहेज और कर्ज़ के बोझ से बचाया जा रहा है। ज़रूरत के समय रक्तदान शिविर लगाए जाते हैं, ताकि किसी की जान सिर्फ खून के अभाव में न जाए। पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण अभियान भी चलाए जा रहे हैं, जिनमें पौधे लगाने के साथ उनकी देखरेख की जिम्मेदारी भी ली जाती है।

सेवादारों का कहना है कि संत रामपाल जी महाराज का उद्देश्य केवल मदद देना नहीं, बल्कि ऐसा समाज खड़ा करना है जो नशामुक्त, भ्रष्टाचार-मुक्त और आत्मनिर्भर हो, जहां सेवा दिखावे की नहीं, बल्कि कर्तव्य बन जाए।

टूटे परिवार से नई उम्मीद तक

जब समाज अक्सर चुप हो जाता है, जब सरकारी फाइलों में दर्द दब जाता है, तब सच्ची सेवा सामने आती है। गांव सेवा का यह घर आज भी छोटा है, हालात आज भी कठिन हैं, लेकिन अब वहां उम्मीद का दिया जल चुका है। चार बच्चियों की आंखों में अब सिर्फ खालीपन नहीं, बल्कि सपनों की हल्की-सी चमक भी है। यह चमक बताती है कि अगर इंसानियत जिंदा रहे, तो कोई भी परिवार पूरी तरह टूटता नहीं।

जब दुनिया मुंह फेर ले, तब सच्ची सेवा और भगवान का सहारा देता है।अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत दी जाने वाली राहत सामग्री पूरी तरह निःशुल्क है, लेकिन इसके लिए कुछ स्पष्ट नियम भी तय किए गए हैं। सेवादारों ने बताया कि यह सहायता केवल उन्हीं जरूरतमंद परिवारों को दी जाती है जो पूर्ण रूप से नशामुक्त जीवन जीते हों और मांस अथवा किसी भी प्रकार की अभक्ष वस्तुओं का सेवन न करते हों। यदि कोई लाभार्थी इन शर्तों का पालन नहीं करता, तो उसे सहायता मिलने से पहले इन बुराइयों को त्यागना अनिवार्य होता है, और यदि सामग्री प्राप्त करने के बाद नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो सहायता तुरंत बंद कर दी जाती है।

राहत सामग्री या गैस सिलेंडर समाप्त होने से दो दिन पहले लाभार्थी परिवार को राजस्थान राज्य के अन्नपूर्णा मुहिम से जुड़े सेवादारों के संपर्क नंबरों 9784432516, 9660705168, 3752513823, 3691269 पर सूचना देनी होती है, ताकि समय पर नई सामग्री पहुंचाई जा सके। यह पूरी व्यवस्था मुनिंदर धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में संचालित की जा रही है, जिसका उद्देश्य है कि कोई भी जरूरतमंद परिवार भूखा न सोए और सहायता लगातार बनी रहे।

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