अजायब गांव: संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम ने बदली बुजुर्ग की किस्मत

संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ ने बदला अजायब के बुजुर्ग दंपति का भाग्य: लाचारी के बीच बने मसीहा

मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और इस कथन को सार्थक कर रहे हैं जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज। हाल ही में हरियाणा के रोहतक जिले के अंतर्गत आने वाले अजायब गांव में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने समाज की संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया। यहाँ एक बुजुर्ग दंपति, जो अत्यंत गरीबी, बीमारी और पारिवारिक उपेक्षा का शिकार था, उनके लिए संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ आशा की एक नई किरण बनकर उभरी है। 

संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित इस मुहिम ने न केवल इस परिवार की भूख मिटाने का संकल्प लिया, बल्कि उनके जीवन की अन्य बुनियादी समस्याओं के समाधान का भी भरोसा दिलाया है।

बीमारी और लाचारी के बीच संघर्षरत जीवन

गांव अजायब के निवासी बुजुर्ग दंपति का जीवन लंबे समय से कष्टों के साये में बीत रहा था। परिवार के मुखिया, जिन्हें ग्रामीण स्नेह से अंकल जी कहकर संबोधित करते हैं, वर्ष 2013 से पैर की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। उनकी पत्नी बानी ने बताया कि 14 साल पहले शुरू हुई यह तकलीफ अब इस कदर बढ़ चुकी है कि वे पिछले 9 महीनों से पूरी तरह चारपाई पर आ गए हैं।

अजायब गांव: संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम ने बदली बुजुर्ग की किस्मत

पहले वे बकरी चराकर या मजदूरी करके अपना पेट पालते थे, लेकिन अब स्थिति यह है कि उन्हें नित्य क्रियाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। बानी ने नम आंखों से बताया कि वे अपने पति को इस हालत में छोड़कर कहीं मजदूरी करने भी नहीं जा सकतीं, जिसके कारण घर में भुखमरी की स्थिति बनी हुई थी।

अपनों की बेरुखी और बढ़ता कर्ज का बोझ

इस कहानी का सबसे दुखद पहलू परिवार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति है। इस बुजुर्ग दंपति के अपने बच्चे हैं, जो अलग रहते हैं, परंतु दुख की इस घड़ी में उन्होंने अपने माता-पिता को उनके हाल पर छोड़ दिया है। बुजुर्ग ने बिलखते हुए कहा, “जिसका कोई नहीं होता, उसका खुदा होता है।” उन्होंने बताया कि उनके अपने पोते-पोतियां भी उन्हें देखकर दूर भाग जाते हैं। आर्थिक तंगी का आलम यह है कि बानी ने अपनी बेटियों, बहन और अन्य परिचितों से लगभग 60-70 हजार रुपये का कर्ज ले रखा है, जिसका उपयोग केवल इलाज और भोजन की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में हो रहा था।

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जर्जर मकान और सुविधाओं का अभाव

संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों की टीम जब इस परिवार के घर पहुंची, तो वहां की स्थिति भयावह थी। मकान अत्यंत पुराना और जर्जर हो चुका है। दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं और छत को गिरने से बचाने के लिए लकड़ी के खंभों (ठहर) का सहारा दिया गया है। घर में शौचालय और स्नानघर जैसी बुनियादी सुविधाएं भी मौजूद नहीं हैं। बानी ने बताया कि बारिश के समय उन्हें हमेशा यह डर सताता है कि कहीं जर्जर छत उनके ऊपर न गिर जाए। पति की बीमारी और घर की टूट-फूट ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़कर रख दिया था।

अन्नपूर्णा मुहिम: राहत सामग्री का वितरण

संत रामपाल जी महाराज ने इस परिवार को तत्काल राहत प्रदान की। महाराज जी की ओर से परिवार को एक महीने की संपूर्ण राशन सामग्री उपलब्ध कराई गई है। इस सहायता किट में 20 किलो आटा, 5 किलो चावल, 2 किलो चीनी, मूंग और चना दाल, 1 लीटर सरसों का तेल, चाय पत्ती, नमक, मसाले (जीरा, हल्दी, मिर्च), अचार, सूखा दूध, नहाने और कपड़े धोने का साबुन व सर्फ शामिल है। इसके अतिरिक्त, ताजी सब्जियों में 5 किलो आलू और 5 किलो प्याज भी प्रदान किए गए। शिष्यों ने स्पष्ट किया कि यह सहायता केवल एक बार के लिए नहीं है, बल्कि राशन खत्म होने से दो दिन पहले संपर्क करने पर इसे निरंतर निशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा।

उपचार और आवास सुधार का मिला आश्वासन

केवल राशन ही नहीं, बल्कि संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार इस परिवार की अन्य समस्याओं पर भी विचार किया जा रहा है। टीम के सदस्यों ने बुजुर्ग के इलाज और घर में शौचालय व मरम्मत कार्य की आवश्यकता को दर्ज किया है। इसकी रिपोर्ट ट्रस्ट की कमेटी और महाराज जी तक पहुंचाई जाएगी ताकि आगामी ठोस कदम उठाए जा सकें। महाराज जी के शिष्यों ने परिवार को अपना संपर्क कार्ड दिया और उन्हें विश्वास दिलाया कि अब वे अकेले नहीं हैं। बानी और उनके पति ने इस निस्वार्थ सेवा के लिए संत रामपाल जी महाराज का कोटि-कोटि धन्यवाद किया और उनके सत्संग से जुड़ने की इच्छा भी व्यक्त की।

अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत मिली सहायता

संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार अन्नपूर्णा मुहिम के अनुयायी इस परिवार के घर सहायता सामग्री लेकर पहुँचे। यह इस परिवार के लिए दूसरी बार सहायता पहुँचाई गई थी।

सेवादारों ने परिवार को सम्मानपूर्वक खाद्य सामग्री और दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएँ प्रदान कीं, जिससे उन्हें कुछ समय तक भोजन की चिंता से राहत मिल सके।

परिवार को प्रदान की गई सामग्री

परिवार को संत रामपाल जी महाराज के निर्देशानुसार निम्नलिखित सामग्री प्रदान की गई:

क्रमांकसामग्रीमात्रा
1गेहूं का आटा15 किलोग्राम
2चावल5 किलोग्राम
3चीनी2 किलोग्राम
4मूंग दालआवश्यक मात्रा
5चना दालआवश्यक मात्रा
6पीली दालआवश्यक मात्रा
7साबुत चनाआवश्यक मात्रा
8जीराआवश्यक मात्रा
9हल्दीआवश्यक मात्रा
10लाल मिर्चआवश्यक मात्रा
11नमकआवश्यक मात्रा
12चाय पत्तीआवश्यक मात्रा
13अचारलगभग 0.5 किलोग्राम
14कपड़े धोने का साबुनआवश्यक मात्रा
15डिटर्जेंट पाउडरआवश्यक मात्रा
16नहाने का साबुनआवश्यक मात्रा
17सूखा दूधआवश्यक मात्रा
18सरसों का तेल1 लीटर
19आलूलगभग 2.5 किलोग्राम
20प्याजलगभग 2.5 किलोग्राम

इस प्रकार परिवार के लिए भोजन और दैनिक आवश्यकताओं की व्यवस्था की गई।

संत रामपाल जी की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’: उपेक्षितों का सहारा और मानवता की नई किरण

संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ आज उन लोगों के लिए सहारा बन रही है जिन्हें समाज और उनके अपनों ने ठुकरा दिया है। अजायब गांव के इस बुजुर्ग दंपति को मिली सहायता न केवल उनकी शारीरिक भूख को शांत करेगी, बल्कि समाज में मानवता के प्रति विश्वास को भी पुनर्जीवित करेगी।

संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित यह अभियान नशा मुक्त और मांस मुक्त समाज की शर्त के साथ निरंतर जारी है, जो न केवल आर्थिक मदद बल्कि एक नैतिक और स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा भी दे रहा है। आज यह परिवार महाराज जी की दया से स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहा है।

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