उत्तराखंड की हसीन वादियों के बीच टिहरी गढ़वाल जिले के भीमलेत गाँव से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो हमारे समाज की जमीनी हकीकत को बयां करती है। यहाँ एक बुजुर्ग का परिवार गरीबी की ऐसी मार झेल रहा था जहाँ बुनियादी सुविधाओं का भी नामोनिशान नहीं था। लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने इस अंधेरे को रोशनी में बदल दिया है।
बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसता पहाड़ का एक आशियाना
भीमलेत गाँव के रहने वाले 68 वर्षीय कातक सिंह जी का परिवार केवल ₹1500 की वृद्ध पेंशन पर आश्रित था। उनके पास रहने के लिए मात्र दो कच्चे कमरे थे, जो बारिश के मौसम में इस कदर टपकते थे कि पूरे परिवार को बरामदे में रातें गुजारनी पड़ती थीं। सबसे बड़ी विडंबना यह थी कि घर में शौचालय न होने के कारण परिवार की जवान बेटियों को रात के अंधेरे में आधा किलोमीटर दूर जंगल की ओर जाना पड़ता था, जिससे उनकी सुरक्षा पर हमेशा खतरा बना रहता था।
वायरल वीडियो से संत जी तक पहुँची बेबसी की पुकार
सोशल मीडिया पर इस परिवार की दयनीय स्थिति का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक बच्ची अपनी आँखों में आँसू लिए सरकार से शौचालय और पक्के घर की गुहार लगा रही थी। जब यह जानकारी संत रामपाल जी महाराज तक पहुँची, तो उन्होंने बिना समय गंवाए अपने शिष्यों को आदेश दिया कि इस परिवार को तत्काल राहत पहुँचाई जाए।
राशन से लेकर पक्के घर तक का मुकम्मल इंतजाम
संत जी के शिष्य कड़ी धूप में पहाड़ों की चढ़ाई कर कातक सिंह जी के घर पहुँचे और उन्हें राशन की पूरी किट सौंपी। इसमें निम्न सामग्री प्रदान की गई:
| क्र.सं. | सामग्री | मात्रा |
| 1 | आटा | 26 किलो |
| 2 | चावल | 5 किलो |
| 3 | चीनी | 2 किलो |
| 4 | सरसों का तेल | 1 लीटर |
| 5 | चना दाल | 1 किलो |
| 6 | हरी मूंग दाल | 1 किलो |
| 7 | हल्दी | 250 ग्राम |
| 8 | जीरा | 250 ग्राम |
| 9 | लाल मिर्च | 100 ग्राम |
| 10 | नहाने का साबुन | 4 पीस |
| 11 | कपड़े धोने का साबुन | 1 किलो |
| 12 | टाटा नमक | 1 किलो |
| 13 | टाटा चाय | 250 ग्राम |
| 14 | मिल्क पाउडर (सूखा दूध) | 1 किलो |
| 15 | आलू | 5 किलो |
| 16 | प्याज | 5 किलो |
| 17 | अचार | ½ किलो |
| 18 | वाशिंग पाउडर | ½ किलो |
संत रामपाल जी महाराज के द्वारा यह राशन उन्हें आजीवन निःशुल्क मिलता रहेगा। जैसे ही सामान खत्म होने वाला हो, परिवार को दिए गए संपर्क नंबर पर बस एक कॉल करनी होगी।
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बेटियों की गरिमा और बच्चों की शिक्षा का संकल्प
मदद केवल राशन तक सीमित नहीं रही। संत रामपाल जी महाराज के निर्देशानुसार, अब कातक सिंह के परिवार के लिए उसी गाँव में पक्का मकान और शौचालय बनाया जाएगा। इसमें बिजली की फिटिंग और पानी की व्यवस्था भी संत रामपाल जी महाराज द्वारा की जाएगी। बेटियों की सुरक्षा और आत्मसम्मान को सर्वोपरि रखते हुए, यह पहल समाज के सक्षम लोगों के लिए करुणा और जिम्मेदारी का एक अनुपम उदाहरण है।
इसके अलावा, घर के छोटे बच्चों की शिक्षा, स्कूल ड्रेस और किताबों का पूरा खर्च भी संत जी ने अपने ऊपर लिया है, ताकि गरीबी बच्चों के भविष्य की राह में रोड़ा न बने।
नैतिक सुधार के साथ सामाजिक उत्थान
‘अन्नपूर्णा मुहिम‘ की एक विशेषता यह है कि यह सहायता केवल उन्हीं को दी जाती है जो पूर्ण रूप से नशा-मुक्त और शाकाहारी जीवन जीने का संकल्प लेते हैं। यह मुहिम न केवल लोगों के पेट भर रही है, बल्कि उन्हें एक स्वच्छ और मर्यादित जीवन जीने की प्रेरणा भी दे रही है। गाँव के लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जहाँ प्रशासन नहीं पहुँच पाया, वहाँ संत रामपाल जी महाराज ने पहुँचकर मानवता की लाज बचा ली।

