हरियाणा के रोहतक जिले के गिरावड़ गाँव से एक ऐसी दास्ताँ सामने आई है, जो साहस और करुणा का अनूठा संगम है। यहाँ की 16 वर्षीय बेटी निशु, जिसने उम्र से पहले ही जीवन के कठोर संघर्षों का सामना किया, आज संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के कारण एक सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ रही है।
बचपन की दहलीज पर भारी जिम्मेदारियाँ
निशु का परिवार पिछले कुछ समय से त्रासदियों के भँवर में फँसा हुआ था। उसकी माँ का देहांत हार्ट अटैक से हो गया, और उसके कुछ समय बाद ही पिता को लकवा (Paralytic Stroke) मार गया। पिता की मानसिक स्थिति भी अब ठीक नहीं है। घर में एक छोटा भाई है जो नवीं कक्षा में पढ़ता है। अपनी पढ़ाई छोड़कर निशु एक दुकान पर 6000 रुपये की नौकरी करने लगी, ताकि वह अपने भाई को पढ़ा सके और बीमार पिता की दवा का खर्च उठा सके।
गिरावड़ गाँव की सड़कों से नीचे धँसा घर और टपकती छत का दर्द
निशु का आशियाना, उसकी गरीबी की गवाही दे रहा था। सड़क से करीब 3 फीट नीचे बना उसका मकान बारिश के दिनों में तालाब बन जाता था। एक ही कमरे में किचन, बाथरूम और सोने की जगह सिमटी हुई थी। छत इतनी जर्जर थी कि बरसात में परिवार को रात भर जागकर गुज़ारना पड़ता था। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में यह परिवार बेहद दयनीय जीवन जीने को मजबूर था।
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अन्नपूर्णा मुहिम: रसोई से लेकर स्कूल तक का मुकम्मल इंतज़ाम
जब संत रामपाल जी महाराज को निशु के संघर्ष का पता चला, तो उन्होंने अन्नपूर्णा मुहिम के तहत सहायता की झड़ी लगा दी। निशु के घर राशन की वह सामग्री पहुँचाई गई जिसकी उसे सख्त ज़रूरत थी:
| क्र.सं. | सामग्री | मात्रा |
| 1 | आशीर्वाद आटा | 25 किलो |
| 2 | वनस्पति चावल | 5 किलो |
| 3 | आलू | 5 किलो |
| 4 | प्याज | 5 किलो |
| 5 | शक्कर | 4 किलो |
| 6 | दूध | 1 किलो |
| 7 | चाय पत्ती | 250 ग्राम |
| 8 | अचार | 1किलो |
| 9 | नमक | 1 किलो |
| 10 | तेल | 2 लीटर |
| 11 | नहाने का साबुन | 4 पीस |
| 12 | धोने का साबुन (कपड़ा धोने का) | 1 किलो |
| 13 | हल्दी | 150 ग्राम |
| 14 | मिर्च | 150 ग्राम |
| 15 | जीरा | 150 ग्राम |
शिक्षा का सहारा: निशु के भाई के लिए दो जोड़ी स्कूल ड्रेस, जूते, चप्पलें और स्कूल बैग दिया गया ताकि उसकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए।
ईंधन की व्यवस्था: खाली पड़े गैस सिलेंडर को तुरंत भरवाया गया जिससे निशु को चूल्हे के धुएँ से मुक्ति मिले।
अब बनेगा पक्का मकान: सिर पर होगी सुरक्षित छत
मदद केवल सामान तक सीमित नहीं रही। संत रामपाल जी महाराज ने आदेश दिया है कि निशु के परिवार के लिए एक नया और पक्का घर बनाया जाएगा। इसमें अलग से किचन और शौचालय की आधुनिक व्यवस्था होगी, ताकि निशु और उसके परिवार को वह गरिमापूर्ण जीवन मिल सके जिसके वे हकदार हैं।
संत रामपाल जी महाराज ने आश्वासन दिया है कि जब तक यह परिवार अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो जाता, तब तक आजीवन राशन की ज़िम्मेदारी आश्रम की रहेगी।
नशा-मुक्त और मर्यादित समाज का निर्माण
संत रामपाल जी महाराज की यह सेवा केवल आर्थिक मदद नहीं है, बल्कि यह समाज सुधार का एक बड़ा हिस्सा है। अन्नपूर्णा मुहिम के तहत मदद प्राप्त करने वालों के लिए नशा-मुक्त और शाकाहारी जीवन जीना अनिवार्य है। निशु जैसे हज़ारों परिवारों की मदद करके संत जी न केवल गरीबी मिटा रहे हैं, बल्कि दहेज-मुक्त विवाह, रक्तदान और पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यों से एक नए समाज की नींव रख रहे हैं। आज संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के कारण एक सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ रही है।

