हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव चिताना की गुदुर देवी—चार बेटियां, एक बेटा और स्वयं मां—कुल छह जनों का परिवार। कभी इस परिवार के सिर पर एक छाया थी, लेकिन आठ महीने पहले पति के देहांत के साथ ही वह छाया भी छिन गई। किराए के मकान की टूटी दीवारें, बच्चों की भूख, और हर दिन यह सवाल कि आज चूल्हा जलेगा या नहीं—यही इस परिवार की दिनचर्या बन चुकी थी। गुदुर देवी मजदूरी करती हैं, पर आमदनी इतनी नहीं कि बच्चों का पेट और भविष्य दोनों संभाले जा सकें। कई बार मां को अपने ही बच्चों से कहना पड़ता था—“जितना है, उतना खा लो बेटा।”
बच्चों का सरकारी स्कूल में नामांकन तो था, लेकिन न यूनिफॉर्म थी, न कॉपी-किताबें। मासूम इच्छाएं धीरे-धीरे बोझ बनती जा रही थीं। जब अपने भी साथ छोड़ दें, तब एक मां अकेली क्या-क्या संभाले? ऐसे अंधकार में एक उजली किरण बनकर सामने आए जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज। उनकी अन्नपूर्णा मुहिम ने न केवल राशन पहुँचाया, बल्कि पूरे परिवार को जीवन की नई दिशा दे दी।
केवल सहायता नहीं, पूरे परिवार को गोद लेने जैसा संकल्प
संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम का स्वरूप सामान्य राहत से कहीं आगे है। इस परिवार के लिए यह मुहिम केवल खाद्य सामग्री नहीं लाई, बल्कि भविष्य की ठोस व्यवस्था भी सुनिश्चित की। अब गुदुर देवी के घर हर महीने आटा, चावल, दालें, दूध, तेल, मसाले, सब्जियां और गैस सिलेंडर नियमित रूप से उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही बच्चों की शिक्षा—कॉपी, किताबें, यूनिफॉर्म, जूते और स्कूल का पूरा खर्च—भी इसी संकल्प के अंतर्गत वहन किया जा रहा है।
यह वही संकल्प है—“रोटी, कपड़ा, चिकित्सा शिक्षा और मकान—हर गरीब को देगा कबीर भगवान”—जो संत रामपाल जी महाराज की करुणा और दूरदृष्टि का प्रमाण है।
संघर्ष की कहानी, जो अब कृतज्ञता में बदली
गुदुर देवी की आंखों में आज भी आंसू हैं, लेकिन अब वे आंसू विवशता के नहीं, कृतज्ञता के हैं। अब वह अकेली नहीं हैं। अब उनके साथ वह संत खड़ा है जिसने दुखियों का दुख अपना समझा। जहां कभी बच्चों की मांगें मां के लिए असहनीय बोझ थीं, वहीं आज उन्हीं बच्चों के हाथों में किताबें हैं, पैरों में जूते हैं और आंखों में सपने हैं।
चिताना गांव में पहुँची इंसानियत की मिसाल
गांव चिताना में जब अन्नपूर्णा मुहिम की सहायता पहुँची, तो यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं रही—यह मानवता की जीवंत मिसाल बन गई। किराए के मकान में रहने वाले इस परिवार की वास्तविक स्थिति देखकर यह स्पष्ट हो गया कि भूखे को भोजन और नंगे को वस्त्र देना ही सबसे बड़ा दान है। संत रामपाल जी महाराज ने इस परिवार की पीड़ा को महसूस किया और उसी संवेदना के साथ सहायता भेजी।
राहत सामग्री का संपूर्ण और सम्मानजनक स्वरूप
परिवार को जो सहायता मिली, वह किसी अधूरी सूची तक सीमित नहीं थी।
| क्रमांक | सहायता श्रेणी | सामग्री / सुविधा | मात्रा / विवरण |
| 1 | खाद्य सामग्री | गेहूं का आटा | 25 किलो |
| 2 | खाद्य सामग्री | चावल | 5 किलो |
| 3 | खाद्य सामग्री | मूंग दाल | 1 किलो |
| 4 | खाद्य सामग्री | चना दाल | 1 किलो |
| 5 | खाद्य सामग्री | चीनी | 2 किलो |
| 6 | खाद्य सामग्री | सरसों का तेल | 1 लीटर |
| 7 | खाद्य सामग्री | अमूल दूध पाउडर | 1 किलो |
| 8 | खाद्य सामग्री | नमक (टाटा) | 1 किलो |
| 9 | खाद्य सामग्री | हल्दी पाउडर | आवश्यक मात्रा |
| 10 | खाद्य सामग्री | लाल मिर्च पाउडर | आवश्यक मात्रा |
| 11 | खाद्य सामग्री | जीरा | आवश्यक मात्रा |
| 12 | खाद्य सामग्री | चाय पत्ती (टाटा) | 1 पैक |
| 13 | खाद्य सामग्री | आलू | 5 किलो |
| 14 | खाद्य सामग्री | प्याज | 5 किलो |
| 15 | घरेलू उपयोग | कपड़े धोने का डिटर्जेंट | 1 किलो |
| 16 | घरेलू उपयोग | कपड़े धोने का साबुन | 1 |
| 17 | घरेलू उपयोग | नहाने का साबुन | 1 |
| 18 | घरेलू उपयोग | अचार | 1 किलो |
| 19 | शिक्षा सहायता | स्कूल ड्रेस | 4 बच्चों के लिए |
| 20 | शिक्षा सहायता | स्कूल जूते | 4 बच्चों के लिए |
| 21 | शिक्षा सहायता | कॉपी-किताबें | सभी स्कूली बच्चों के लिए |
| 22 | शिक्षा सहायता | पेन व स्टेशनरी | आवश्यक सेट |
| 23 | आवास सहायता | चारपाई | 2 |
| 24 | आवास सहायता | पंखा मरम्मत | पंखा जाल व ब्लेड सहित ठीक कराया |
| 25 | निरंतर सहायता | मासिक राशन | हर महीने उपलब्ध |
| 26 | निरंतर सहायता | गैस/अन्य जरूरत | आवश्यकता अनुसार |
| 27 | सहायता कार्ड | संपर्क सुविधा | राशन खत्म होने से 2 दिन पहले कॉल |
आजीवन साथ का भरोसा
अन्नपूर्णा मुहिम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सहायता एक बार की औपचारिकता नहीं। परिवार को संपर्क कार्ड प्रदान किया गया है, ताकि राशन या किसी अन्य आवश्यकता के समाप्त होने से पहले सूचना दी जा सके। संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार सहायता तब तक जारी रहेगी, जब तक यह परिवार पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं हो जाता। यह ठीक वैसा ही है, जैसे एक पिता अपने बच्चों की जिम्मेदारी उठाता है।
बच्चों के सपनों को मिला नया आकाश
जब परिवार के बच्चों से बात की गई, तो उनकी आंखों में एक नई चमक दिखाई दी। नवीं कक्षा में पढ़ने वाली बेटी ने कहा कि अब वह मन लगाकर पढ़ेगी और आगे चलकर दूसरों की मदद करेगी। यही तो अन्नपूर्णा मुहिम का वास्तविक प्रभाव है—सिर्फ पेट भरना नहीं, बल्कि सोच और भविष्य को संवारना।
संत रामपाल जी महाराज: कलयुग में सतयुग की अनुभूति
आज समाज में कई नारे हैं, लेकिन उन्हें धरातल पर उतारने का कार्य संत रामपाल जी महाराज कर रहे हैं। बिना दिखावे, बिना स्वार्थ और बिना भेदभाव—वे उन परिवारों तक पहुँच रहे हैं, जिन तक कोई नहीं पहुँचता। गुदुर देवी का परिवार इसका साक्षात प्रमाण है।
वास्तव में, संत रामपाल जी महाराज ही वह पूर्ण संत हैं जो दुखियों का सहारा बनकर उनके जीवन में स्थायी परिवर्तन ला रहे हैं। उनकी अन्नपूर्णा मुहिम यह सिद्ध करती है कि मानवता अभी जीवित है—और वह संत रामपाल जी महाराज के माध्यम से जीवित है।


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