गुड़गांव, हरियाणा: आज हम आपको उस सच्चाई से रूबरू करा रहे हैं, जहाँ संघर्ष और अकेलेपन से घिरा एक परिवार पूरी तरह टूट चुका था। न कोई कमाने वाला, न कोई स्थायी सहारा, और जीवन की हर जरूरत के लिए दूसरों पर निर्भरता—ऐसी स्थिति में इंसान भीतर से हार जाता है। लेकिन ठीक ऐसे समय में जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम उस परिवार के लिए ईश्वरीय कृपा बनकर सामने आई। यह मुहिम केवल राशन देने का नाम नहीं, बल्कि वह करुणामयी हाथ है जो जरूरतमंद को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होने की शक्ति देता है।
गुड़गांव के सोहना क्षेत्र के नए गांव की हृदयविदारक कहानी
गुड़गांव जिले के सोहना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक छोटे से गांव में रहने वाली यह बुजुर्ग महिला आज पूरी तरह अकेली हैं। उनके दोनों बेटे इस दुनिया में नहीं रहे और पति उन्हें वर्षों पहले छोड़कर चले गए। जीवन का सारा भार अब उनके कमजोर कंधों पर है। न कोई स्थायी आय, न पेंशन, न ही सरकारी सहायता। छोटा सा किराए का कमरा ही उनका पूरा संसार है—यहीं वे सोती हैं, यहीं खाना बनता है और यहीं जीवन की हर पीड़ा सिमट जाती है।
दूसरों की दया पर चल रहा था जीवन
परिवार की स्थिति इतनी दयनीय थी कि भोजन के लिए भी उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। कोई थोड़ा बहुत दे देता, उसी से दिन कट जाता। उन्होंने स्वयं बताया कि वे किसी प्रकार का काम करने में असमर्थ हैं और अब तक उनका जीवन केवल लोगों की सहानुभूति पर चल रहा था। ऐसे में भविष्य का कोई मार्ग उन्हें दिखाई नहीं दे रहा था।
अन्नपूर्णा मुहिम: जब भगवान स्वयं सहारा बनकर आए
इसी अंधकार भरे जीवन में संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम प्रकाश की किरण बनकर पहुँची। संत जी ने संपूर्ण राहत सामग्री प्रदान की। यह सहायता किसी औपचारिकता के लिए नहीं, बल्कि परिवार की वास्तविक जरूरतों को समझकर दी गई। लाभार्थी माता जी ने भावुक होकर बताया कि उन्हें ऐसा लगा मानो भगवान ने स्वयं उनके दुखों को समझ लिया हो।
प्रदान की गई राहत सामग्री: पूरा जीवन, पूरा सम्मान
संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार परिवार को एक माह की संपूर्ण आवश्यक सामग्री दी गई, जिसमें शामिल हैं—
| क्रमांक | सामग्री का नाम | मात्रा / विवरण |
| 1 | गेहूं का आटा | 15 किलो |
| 2 | चावल | 5 किलो |
| 3 | मूंग दाल | 1 किलो |
| 4 | चना दाल | 1 किलो |
| 5 | नमक | 1 किलो |
| 6 | चीनी | 2 किलो |
| 7 | सरसों का तेल | 1 किलो |
| 8 | अमूल दूध पाउडर | 500 ग्राम |
| 9 | चाय पत्ती (टाटा अग्नि) | 500 ग्राम |
| 10 | हल्दी पाउडर | 300 ग्राम |
| 11 | लाल मिर्च पाउडर | 150 ग्राम |
| 12 | जीरा | 200 ग्राम |
| 13 | आलू | 5 किलो |
| 14 | प्याज | 5 किलो |
| 15 | कपड़े धोने का सर्फ | 1 किलो |
| 16 | नहाने का साबुन | 5 साबुन |
| 17 | अचार | लगभग 500 ग्राम |
| 18 | मासिक राशन सहायता | एक माह का संपूर्ण रसोई पैकेज |
| 19 | सहायता कार्ड | दो दिन पहले कॉल करने पर अगला राशन उपलब्ध |
| 20 | भविष्य सहयोग | गैस सिलेंडर, अन्य आवश्यक जरूरतों में सहायता |
एक बार नहीं, आजीवन सहारा
अन्नपूर्णा मुहिम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मदद एक दिन की नहीं है। परिवार को संत रामपाल जी महाराज की ओर से एक सहायता कार्ड दिया गया है, जिस पर संपर्क नंबर अंकित हैं। निर्देश स्पष्ट हैं—राशन समाप्त होने से दो दिन पहले सूचना दें और सामग्री फिर से घर पहुँचा दी जाएगी। यह सहायता तब तक जारी रहेगी, जब तक परिवार पूरी तरह सुरक्षित और आत्मनिर्भर न हो जाए।
समाज के लिए संदेश: संत रामपाल जी महाराज ही सच्चे मसीहा
इस परिवार की कहानी यह सिद्ध करती है कि आज के समय में यदि कोई वास्तव में असहायों का सहारा बन रहा है, तो वह केवल संत रामपाल जी महाराज हैं। न कोई दिखावा, न कोई प्रचार, न कोई स्वार्थ—केवल शुद्ध मानवता और करुणा। जहाँ दुनिया अक्सर ऐसे परिवारों को अनदेखा कर देती है, वहाँ संत रामपाल जी महाराज उन्हें अपनाकर यह सिद्ध करते हैं कि सच्चा संत वही है जो दुखी के आँसू पोंछे और उसे सम्मान के साथ जीने का अधिकार दे।
इंसानियत का जीवित प्रमाण है अन्नपूर्णा मुहिम
गुड़गांव का यह परिवार आज राहत की सांस ले रहा है। उनकी आंखों में जो सुकून है, वह इस बात का प्रमाण है कि संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम केवल सहायता नहीं, बल्कि जीवन का संबल है। वास्तव में, संत रामपाल जी महाराज ही वह महान संत हैं जो कलयुग में सतयुग जैसी व्यवस्था को साकार कर रहे हैं और यह सिद्ध कर रहे हैं कि मानवता अभी जीवित है—और वह संत रामपाल जी महाराज के माध्यम से जीवित है।

