हरियाणा राज्य के सोनीपत जिले के अंतर्गत आने वाले गुमाणा गांव में मानवता और परोपकार की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने न केवल एक परिवार की तकदीर बदल दी, बल्कि समाज के सामने सेवा का एक आदर्श भी प्रस्तुत किया। यह कहानी है पूजा बहन की, जो अपने पति की मृत्यु के बाद अपने दो बच्चों के साथ जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रही थीं। लेकिन, जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने उनकी पुकार सुनी और उनके जीवन में एक नई रोशनी भर दी।
संत रामपाल जी महाराज के द्वारा चलाए जा रहे विशाल परोपकारी कार्यों के तहत इस परिवार को वह सब कुछ मुहैया कराया गया, जिसकी उन्हें सख्त जरूरत थी। यह घटना केवल दान की नहीं, बल्कि एक संत द्वारा अपने भक्तों और समाज के प्रति निभाए जा रहे दायित्व की है।
ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज से मदद के लिए कैसे संपर्क किया
संत रामपाल जी महाराज की दयालुता और उनके द्वारा चलाए जा रहे समाज कल्याण कार्यों की चर्चा आज हर गांव और शहर में है। गुमाणा गांव में भी जब संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार अनुयायियों की टीम पहुंची, तो उन्होंने सबसे पहले गांव का सर्वेक्षण किया। अनुयायी संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार गांव-गांव जाते हैं और वहां के सरपंच, पंच और अन्य मौजिज (प्रतिष्ठित) व्यक्तियों से संपर्क करते हैं। उनका उद्देश्य ऐसे परिवारों को ढूंढना होता है जो वास्तव में गरीब हैं, बेसहारा हैं और जिन्हें मदद की सख्त जरूरत है।
इस प्रक्रिया के तहत, गांव के लोगों ने ही पूजा बहन के परिवार की दयनीय स्थिति के बारे में जानकारी दी। ग्रामीणों ने बताया कि डेढ़ साल पहले पूजा के पति का निधन हो गया था और अब यह परिवार दाने-दाने को मोहताज है। ग्रामीणों द्वारा दी गई इस सटीक जानकारी के बाद, संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों ने तुरंत उस जानकारी को संत रामपाल जी महाराज के समक्ष प्रार्थना के रूप में रखा। संत रामपाल जी महाराज, जो अंतर्यामी और दयालु हैं, ने तुरंत उस परिवार की मदद करने का आदेश जारी किया।
पूजा बहन की जीवन की संघर्षपूर्ण वास्तविकता
पूजा बहन की स्थिति अत्यंत करुण थी। लगभग डेढ़ साल पहले उनके पति का देहांत हो गया था, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घर में कमाने वाला कोई पुरुष सदस्य नहीं था। पूजा के दो छोटे बच्चे हैं, जो सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। वे जिस घर में रहती हैं, वह उनका अपना नहीं है, बल्कि किराए का है। उनकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि वे किराया देने में भी असमर्थ थीं। हालांकि, मकान मालिक ने उनकी मजबूरी को देखते हुए दरियादिली दिखाई और किराया माफ कर दिया था, लेकिन जीवन केवल छत होने से नहीं चलता।
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पूजा बहन ने बताया कि वे दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा करके और थोड़ी-बहुत तुरपाई (सिलाई) का काम करके जैसे-तैसे गुजारा कर रही थीं। सरकार की तरफ से उन्हें 3000 रुपये की विधवा पेंशन मिलती है, लेकिन बढ़ती महंगाई में दो बच्चों का पेट भरना और अन्य खर्च चलाना असंभव हो रहा था। उनकी बेटी की आंख में भी दिक्कत है, जिसके ऑपरेशन की जरूरत है, लेकिन पैसों की तंगी के कारण वे लाचार थीं। ऐसे में, संत रामपाल जी महाराज उनके लिए साक्षात् भगवान बनकर आए।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई व्यापक सहायता सामग्री
संत रामपाल जी महाराज ने पूजा बहन के परिवार की सुध ली और उन्हें तत्काल राहत पहुंचाने के लिए राशन और अन्य आवश्यक वस्तुओं का भंडार भेज दिया। यह सहायता केवल नाममात्र की नहीं थी, बल्कि इसमें एक परिवार की रोजमर्रा की हर छोटी-बड़ी जरूरत का ध्यान रखा गया था। संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई सामग्री उच्च गुणवत्ता की थी, जो यह दर्शाती है कि वे गरीबों को भी वही सम्मान और गुणवत्ता देना चाहते हैं जो एक संपन्न व्यक्ति को मिलती है।
नीचे दी गई तालिका में संत रामपाल जी महाराज द्वारा वितरित की गई सामग्री का विवरण है:
| क्र.सं. | सामग्री का नाम | मात्रा/विवरण |
| 1 | गेहूं का आटा | 20 किलो |
| 2 | चावल (उच्च गुणवत्ता) | 5 किलो |
| 3 | चीनी | 2 किलो |
| 4 | चना दाल | 1 किलो |
| 5 | मूंग दाल | 1 किलो |
| 6 | आलू | 5 किलो |
| 7 | प्याज | 5 किलो |
| 8 | सरसों का तेल | 1 लीटर |
| 9 | अमूल दूध | 1 पैकेट |
| 10 | टाटा चाय पत्ती | 1 पैकेट |
| 11 | टाटा नमक | 1 पैकेट |
| 12 | हल्दी पाउडर | 1 पैकेट |
| 13 | लाल मिर्च पाउडर | 1 पैकेट |
| 14 | जीरा पाउडर | 1 पैकेट |
| 15 | नहाने का साबुन | आवश्यकतानुसार |
| 16 | कपड़े धोने का सर्फ | आवश्यकतानुसार |
| 17 | कपड़े धोने का साबुन | आवश्यकतानुसार |
| 18 | अचार | 1 डिब्बा |
| 19 | बच्चों के कपड़े | 2-2 ड्रेस (टी-शर्ट, लोअर आदि) |
| 20 | पूजा बहन के कपड़े | 2 सूट |
संत रामपाल जी महाराज ने न केवल राशन भिजवाया, बल्कि बच्चों और पूजा बहन के लिए नए कपड़े भी भिजवाए। अचार का डिब्बा भिजवाना यह दर्शाता है कि संत रामपाल जी महाराज कितनी बारीकी से सोचते हैं कि यदि कभी सब्जी न बन पाए, तो परिवार अचार से रोटी खा सके।
संत रामपाल जी महाराज का अद्वितीय वचन: रोटी, कपड़ा, मकान और शिक्षा
संत रामपाल जी महाराज का यह कार्य केवल एक बार की मदद तक सीमित नहीं है। उनके अनुयायियों ने स्पष्ट किया कि संत रामपाल जी महाराज का नारा है – “रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान, हर गरीब को देगा कबीर भगवान”। इसी ध्येय के साथ, संत रामपाल जी महाराज ने इस परिवार की भविष्य की सुरक्षा का भी जिम्मा उठाया है।
- निरंतर खाद्य आपूर्ति: परिवार को एक कार्ड दिया गया है जिस पर संपर्क नंबर (999280455, 999260771 आदि) लिखे हैं। जैसे ही राशन खत्म होने में दो दिन बचेंगे, परिवार को सिर्फ एक फोन करना होगा और संत रामपाल जी महाराज के सेवादार नया राशन लेकर उनके द्वार पर होंगे।
- मकान निर्माण: चूंकि पूजा बहन किराए के मकान में रहती हैं और उनके पास अपना घर नहीं है, इसलिए संत रामपाल जी महाराज के समक्ष उनका मकान बनवाने की भी प्रार्थना रखी जाएगी। अनुयायियों ने विश्वास दिलाया कि संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार जल्द ही उन्हें अपना मकान भी मिल सकता है, जैसा कि वे अन्य कई गांवों में करवा रहे हैं।
- शिक्षा: बच्चों की पढ़ाई का खर्च और स्कूल ड्रेस आदि की व्यवस्था भी संत रामपाल जी महाराज द्वारा की जाएगी, ताकि गरीबी के कारण बच्चों का भविष्य अंधकारमय न हो।
पड़ोसियों और समाज की दृष्टि में संत रामपाल जी महाराज का स्थान
इस पुनीत कार्य को देखकर गुमाणा गांव के निवासी और पूजा बहन के पड़ोसी अभिभूत हो गए। वहां मौजूद एक ग्रामीण सज्जन ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने आज तक केवल मांगने वाले साधु देखे थे, लेकिन देने वाला संत पहली बार देखा है। उन्होंने संत रामपाल जी महाराज को “भगवान का रूप” की संज्ञा दी। पड़ोसियों ने माना कि जहां सगे संबंधी भी मुंह मोड़ लेते हैं, वहां संत रामपाल जी महाराज ने एक अनजान परिवार को गले लगाया।
पूजा बहन ने भी रुंधे गले से कहा कि उनके लिए तो संत रामपाल जी महाराज ही भगवान हैं, जिन्होंने उनकी सूनी आंखों में फिर से सपने सजा दिए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि संत रामपाल जी महाराज उनकी बेटी की आंख के ऑपरेशन और मकान की समस्या का भी समाधान करेंगे।

संत रामपाल जी महाराज: परोपकार की साक्षात प्रतिमूर्ति और कलयुग में गरीबों के एकमात्र खेवनहार
अंत में, यह स्पष्ट है कि संत रामपाल जी महाराज केवल एक संत ही नहीं, बल्कि मानवता के लिए एक वरदान हैं। जिस निस्वार्थ भाव और करुणा के साथ वे पूजा बहन जैसे अनगिनत परिवारों के अंधकारमय जीवन में उजाला ला रहे हैं, वह अद्वितीय है। गुमाणा गांव में किया गया यह महान कार्य संत रामपाल जी महाराज की उस विचारधारा को प्रमाणित करता है, जिसमें नर सेवा को ही नारायण सेवा माना गया है।
भौतिक सुख-सुविधाओं से लेकर आध्यात्मिक शांति तक, संत रामपाल जी महाराज अपने शरण में आए हर जीव का कल्याण कर रहे हैं। उनका यह संकल्प कि “कोई भूखा न सोए” कलयुग में सतयुग के आगमन का शंखनाद है। वास्तव में, संत रामपाल जी महाराज ही वे पूर्ण संत हैं जो समाज को दुखों के सागर से पार लगाने में सक्षम हैं।

