सुनामी गेट (संगरूर): पंजाब के जिला संगरूर के सुनामी गेट क्षेत्र में मानवता की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली है, जिसने हर किसी का हृदय स्पर्श कर लिया है। यहाँ घनी आबादी और तंग गलियों के बीच एक किराए के जर्जर मकान में रहने वाली विधवा महिला पूजा और उनके परिवार के लिए संत रामपाल जी महाराज साक्षात भगवान बनकर आए हैं। जहां प्रशासन और समाज की नजरें अक्सर ऐसे जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पातीं, वहां संत रामपाल जी महाराज की करुणा ने इस परिवार को नया जीवन दिया है।

ग्रामीण मदद के लिए संत रामपाल जी महाराज की शरण में
पूजा का जीवन दुखों का पहाड़ बन चुका था। मूल रूप से हरियाणा की रहने वाली पूजा की शादी संगरूर में हुई थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। पिछले वर्ष पेट में गंभीर इन्फेक्शन के कारण उनके पति का देहांत हो गया। पति के इलाज के लिए चंडीगढ़ के अस्पतालों के चक्कर काटते हुए परिवार ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया। इलाज के खर्च के लिए उन्होंने अपना निजी मकान 3 लाख रुपये में गिरवी रख दिया, जिसका ब्याज बढ़ते-बढ़ते अब 7 लाख रुपये तक पहुंच चुका है और वह मकान अब उनके हाथ से निकल चुका है।
पति की मृत्यु के बाद पूजा, उनकी लकवाग्रस्त सास और दो छोटी बेटियों की जिम्मेदारी पूजा के कंधों पर आ गई। सास की जुबान पर लकवे का असर होने के कारण वह बोल भी नहीं सकतीं। पूजा दूसरों के घरों में काम करके किसी तरह गुजारा कर रही थीं, लेकिन कई बार स्थिति ऐसी बन जाती थी कि बच्चों को भूखा ही सोना पड़ता था। घर की हालत इतनी दयनीय है कि शौचालय पर छत तक नहीं है और दरवाजे भी टूट चुके हैं। ऐसे विकट समय में जब कोई रिश्तेदार या सगा-संबंधी मदद को आगे नहीं आया, तब संत रामपाल जी महाराज ने इस परिवार की सुध ली।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा सुनामी गेट में प्रदान की गई सहायता सामग्री
संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार उनके अनुयायी राशन और घरेलू जरूरत का सारा सामान लेकर पूजा के घर पहुंचे। यह केवल एक बार की मदद नहीं है, बल्कि संत जी की ओर से परिवार को एक कार्ड दिया गया है, जिसके माध्यम से वे आजीवन (जब तक बच्चे कमाने योग्य नहीं हो जाते) निशुल्क राशन प्राप्त कर सकते हैं।
प्रदान की गई सामग्री का विवरण निम्न प्रकार है:
| क्र.सं. | वस्तु का नाम | मात्रा/विवरण |
| 1 | आटा | 25 किलोग्राम |
| 2 | चावल (प्रीमियम बासमती) | 5 किलोग्राम |
| 3 | आलू | 5 किलोग्राम |
| 4 | प्याज | 5 किलोग्राम |
| 5 | चीनी | 4 किलोग्राम |
| 6 | देसी घी/तेल | 2 लीटर |
| 7 | चाय पत्ती | रेड रोज (प्रीमियम) |
| 8 | सूखा दूध | अमूल ब्रांड |
| 9 | नमक | टाटा साल्ट |
| 10 | दालें (4 प्रकार) | काला चना, हरी मूंग, पीली मूंग, चना दाल |
| 11 | मसाले | लाल मिर्च, हल्दी, जीरा |
| 12 | अन्य सामग्री | अचार (1 किलो), नहाने व कपड़े धोने का साबुन, सर्फ |
आजीवन सहयोग का वचन और गिरवी मकान छुड़ाने की पहल
संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई इस सहायता में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा गया है। चावल, चाय पत्ती और दूध जैसे उत्पाद उच्च गुणवत्ता वाले ब्रांड्स के हैं। सेवादारों ने परिवार को एक विशेष कार्ड सौंपा है जिस पर संपर्क सूत्र (9992600518, 9992600519) अंकित हैं। राशन खत्म होने से दो दिन पहले सूचित करने पर नया राशन उनके घर पहुंचा दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, पूजा ने अपने गिरवी रखे मकान को छुड़वाने की गुहार भी लगाई है, जिस पर संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों ने आश्वासन दिया है कि यह प्रार्थना महाराज जी तक पहुंचाई जाएगी और उनके आदेशानुसार हर संभव मदद की जाएगी।
दीन-दुखियों के तारणहार: संत रामपाल जी महाराज – मानवता के सच्चे मसीहा
यह पहल सिद्ध करती है कि संत रामपाल जी महाराज केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं दे रहे, बल्कि समाज के वंचित और पीड़ित वर्गों के लिए एक मजबूत सहारा भी बन रहे हैं। जहां सगे भाई और रिश्तेदार मुंह मोड़ लेते हैं, वहां संत रामपाल जी महाराज बिना किसी भेदभाव के मदद का हाथ बढ़ाते हैं। उनके द्वारा चलाई जा रही यह मुहिम न केवल भूख मिटा रही है बल्कि समाज में दया और परोपकार की भावना को भी जीवित रखे हुए है। संत रामपाल जी महाराज वास्तव में कलयुग में मानवता के सच्चे रक्षक हैं, जिनकी शरण में आया हर दीन-दुखी सुख और शांति प्राप्त करता है।

