राधास्वामी कॉलोनी (फाजिल्का): समाज में जब बीमारी, गरीबी और लाचारी एक साथ किसी परिवार पर टूट पड़ती है, तब जीवन बोझ बन जाता है। पंजाब के फाजिल्का जिले की राधास्वामी कॉलोनी में रहने वाला एक गरीब परिवार लंबे समय से अपनी जिंदगी की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहा था। यह कहानी केवल आर्थिक तंगी की नहीं, बल्कि बीमारी, भूख और लाचारी के उस दौर की है जहाँ हर दिन उनके लिए एक परीक्षा बनी हुई थी।
तीन छोटे-छोटे बच्चे, बीमार माता-पिता और घर में कोई स्थायी आमदनी का साधन नहीं, ऐसी स्थिति में जीवन का बोझ असहनीय हो जाता है। घर के मुखिया संदीप कुमार शुगर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। पैरों में जख्म होने के कारण वे काम करने में असमर्थ हो चुके हैं। पत्नी सरस्वती कुमारी स्वयं कई ऑपरेशनों से गुजर चुकी हैं। हाथ-पैरों में अत्यधिक दर्द, चक्कर और कमजोरी के कारण वे भी अब काम नहीं कर पातीं।
ऐसे में तीन छोटे-छोटे बच्चों का पालन-पोषण करना इस परिवार के लिए असंभव हो गया था। कई बार बच्चों को भूखे पेट सोना पड़ता था और दवाइयों तक के पैसे नहीं थे। आइए जानते है कैसे संत रामपाल जी महाराज की दिव्य विचारधारा ने इस परिवार की स्थिति को पलट कर उनको जीने की एक नई उम्मीद दी।
माता-पिता की बीमारी और बच्चों के अधूरे सपनों की दर्दनाक दास्तां
परिवार के मुखिया संदीप कुमार पिछले चार वर्षों से शुगर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। बीमारी के कारण उनके पैर में जख्म हो गया, जिससे वे काम करने में पूरी तरह असमर्थ हो गए। कभी मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पेट पालने वाले संदीप आज घर में बैठने को मजबूर हैं। दवाइयों का खर्च भी उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था। वहीं परिवार की महिला सदस्य सरस्वती कुमारी भी स्वयं बीमार हैं।
उनके हाथ-पैरों में लगातार दर्द रहता है और उनके तीन से चार ऑपरेशन हो चुके हैं। कमजोरी और चक्कर आने की समस्या के कारण वे भी अब काम करने में सक्षम नहीं रहीं। ऐसे में घर के छोटे बच्चे कई बार भूखे पेट सोने को मजबूर हो जाते थे। बच्चों की पढ़ाई भी फीस और संसाधनों के अभाव में रुक चुकी थी।
अन्नपूर्णा मुहिम: केवल राशन नहीं, आत्मसम्मान
ऐसे अंधकारमय समय में इस परिवार के लिए आशा की किरण बनकर आई संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम। अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत संत रामपाल जी महाराज की दया एवं करुणा से इस परिवार को पूर्ण राशन सामग्री प्रदान की गई, जिसमें निम्नलिखित सामग्री शामिल हैं:-
| संख्या | सामग्री | मात्रा |
| 1. | आटा | 25 किलोग्राम |
| 2. | चावल | 5 किलोग्राम |
| 3. | चीनी | 4 किलोग्राम |
| 4. | चायपत्ती | 1 पैकेट |
| 5. | सूखा दूध | 1 किलोग्राम |
| 6. | नमक | 1 किलोग्राम |
| 7. | सरसों तेल | 2 लीटर |
| 8. | काले चने | 500 ग्राम |
| 9. | पीली मूंग दाल | 500 ग्राम |
| 10. | हरी मूंग दाल | 500 ग्राम |
| 11. | चना दाल | 500 ग्राम |
| 12. | हल्दी पाउडर | 150 ग्राम |
| 13. | लाल मिर्च पाउडर | 100 ग्राम |
| 14. | जीरा | 150 ग्राम |
| 15. | आलू | 5 किलोग्राम |
| 16. | प्याज़ | 5 किलोग्राम |
| 17. | आचार | 1 किलोग्राम |
| 18. | कपड़ा धोने का साबुन | 1 किलोग्राम |
| 19. | नहाने का साबुन | 1 सेट ( 4 पीस ) |
| 20. | सर्फ | 1 पैकेट |
यह सभी सामग्री परिवार की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त मात्रा में दी गई, ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें।
राधास्वामी कॉलोनी: निरंतर सहायता की व्यवस्था
संत रामपाल जी महाराज के द्वारा दी गई यह सहायता राशि केवल एक बार के लिए ही नहीं है बल्कि तब तक दी जाएगी जब तक की परिवार का मुखिया दोबारा काम करने योग्य नहीं हो जाता या बच्चे अपने पैरों पर खड़े नहीं हो जाते। जिसके तहत परिवार को एक विशेष कार्ड दिया गया है, जिस पर संपर्क सूत्र अंकित हैं। जैसे ही राशन समाप्त होने वाला हो तब परिवार फोन करके सूचना दे सकता है ताकि उन्हें पुनः राशन उपलब्ध करवाया जा सके। यह दूरदर्शी सोच दर्शाती है कि संत रामपाल जी महाराज केवल तात्कालिक राहत नहीं, बल्कि स्थायी समाधान प्रदान कर रहे हैं।
चिकित्सा सहायता का भी संपूर्ण प्रबंध
सिर्फ राशन ही नहीं, बल्कि परिवार के मुखिया की शुगर बीमारी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए दवाइयों की पूरी व्यवस्था भी संत रामपाल जी महाराज द्वारा सुनिश्चित की गई है। यदि भविष्य में किसी प्रकार की जांच या अतिरिक्त इलाज की आवश्यकता पड़ेगी, तो उसकी जिम्मेदारी भी संत रामपाल जी महाराज स्वयं उठा रहे हैं। यह मानवता की वह मिसाल है, जो आज के समय में बहुत कम देखने को मिलती है।
“अब भूखे नहीं सोएंगे बच्चे”: एक माँ की आँखों में दिखी राहत
इस सहायता को पाकर परिवार की आंखों में राहत और विश्वास साफ झलक रहा था। पत्नी सरस्वती कुमारी भावुक होकर कहती हैं कि अब उनके बच्चे भूखे नहीं सोएंगे। वहीं संदीप कुमार का कहना है कि जिनके पास खाने को कुछ भी न हो, उनके लिए भोजन देने वाला भगवान के समान होता है। उनके शब्दों से यह साफ झलकता है कि संत रामपाल जी महाराज उनके लिए साक्षात भगवान बनकर आए हैं।
पूरे भारत में चल रही मानवता की मुहिम
अन्नपूर्णा मुहिम केवल फाजिल्का या पंजाब तक सीमित नहीं है। संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में यह अभियान पूरे भारतवर्ष में चल रहा है। इसका उद्देश्य है—“रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान, हर गरीब को देगा कबीर भगवान।” इस मुहिम के अंतर्गत उन्हीं परिवारों को सहायता दी जाती है, जो नशा मुक्त जीवन जीते हैं और मांसाहार जैसी बुराइयों से दूर रहते हैं। साथ में अगर कोई भी परिवार इनका सेवन करता हुआ पाया जाता है तो उनकी सहायता तुरंत प्रभाव से रोक जाती है। यह शर्त समाज को सही दिशा देने का एक सशक्त माध्यम है।
अन्नपूर्णा मुहिम: कलयुग में मानवता की मिसाल
अन्नपूर्णा मुहिम केवल एक राहत योजना नहीं, बल्कि मानवता को बचाने का एक संकल्प है। जिन परिवारों की जिंदगी अंधेरे में डूबी हुई थी, उनके लिए जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज आशा, विश्वास और सम्मान का नया सवेरा लेकर आए हैं। सच ही कहा जाए तो, आज के कलयुग में मतलब के लिए मदद करने वाले तो बहुत मिल जाएंगे परंतु जिस स्तर पर संत रामपाल जी महाराज ने मानवता का परिचय दिया है यह देखते ही बनता है। संत रामपाल जी महाराज का यह मानवतावादी प्रयास समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत है।
