रोहतक जिले के कलानौर क्षेत्र के निगाना मोड़ के पास एक साधारण-सी बस्ती में, तंग गलियों और कच्चे-पक्के मकानों के बीच, एक ऐसी कहानी जीवित है जो दर्द, संघर्ष और करुणा तीनों की गवाही देती है। बाहर से देखने पर यह कोई असाधारण जगह नहीं लगती, लेकिन इसी छत पर तीन लोगों का छोटा-सा परिवार रोज़ जीवन से जूझ रहा था बीमारी, गरीबी और सामाजिक उपेक्षा के बीच।
यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं है, बल्कि उन हजारों घरों की है जो चुपचाप अभाव में जीते हैं, जिनकी आवाज़ अक्सर मुख्यधारा तक नहीं पहुँच पाती। इसी मौन पीड़ा के बीच संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में संचालित अन्नपूर्णा मुहिम ने इस परिवार के दरवाज़े पर दस्तक दी और उनके टूटते भरोसे को फिर से सहारा दिया।
ग्राउंड रिपोर्ट के तौर पर जब मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट के सेवादार इस परिवार तक पहुँचे, तब यह स्पष्ट दिखा कि मदद केवल अनाज की नहीं, बल्कि मानवीय सम्मान और जीने की उम्मीद की भी थी।
परिवार की ज़मीनी हकीकत: बीमारी, बेबसी और बहादुरी
सीढ़ियाँ चढ़कर जब ऊपर छत पर पहुँचे तो एक छोटा-सा कमरा, खुला आंगन और वहीं रसोई यही पूरा घर था। इसी एक कमरे में सोनू, उनकी पत्नी और छोटा बच्चा रहते हैं। नीचे उनके भाई का परिवार रहता है; दोनों भाइयों का गेट, स्नानघर और शौचालय साझा है।
सोनू पिछले लगभग एक साल से गंभीर त्वचा एलर्जी से पीड़ित हैं। उनके हाथों, पैरों और पूरे शरीर पर चकत्ते और घाव दिखाई देते हैं। पहले वे हलवाई का काम करते थे, लेकिन बीमारी के कारण लोग उनसे दूरी बनाने लगे यहाँ तक कि उनके हाथ का खाना खाने से भी इनकार कर दिया गया। सोनू ने भावुक होकर कहा: “मैं काम करना चाहता हूँ, लेकिन लोग छुआछूत करते हैं। मजबूरी में घर पर बैठा हूँ। जो थोड़ा-बहुत चलता है, वह मेरी दवाइयों में ही चला जाता है।”
परिवार का खर्च पूरी तरह उनकी पत्नी पर आ गया है। कभी पड़ोस में छोटा-मोटा काम, कभी मायके से मिली मदद इन्हीं सहारों पर उनका घर चल रहा था। दवाइयों का बोझ इतना भारी था कि बच्चे के दूध और भोजन की चिंता भी रोज़ की लड़ाई बन चुकी थी।
कलानौर गांववालों की प्रतिक्रिया: करुणा और कृतज्ञता
जब से अन्नपूर्णा मुहिम की सहायता पहुँची, तब से आसपास के लोग भी इस परिवार की स्थिति को नए नजरिये से देखने लगे हैं। पड़ोसी महिला ने कहा: “हम जानते थे कि सोनू बीमार है, पर इतनी मुश्किल होगी यह आज समझ आया। अच्छा हुआ कि संत जी की मुहिम यहाँ तक पहुँची।” कुछ युवाओं ने बताया कि वे पहले भी कई बार इस तरह की राहत सामग्री आते देख चुके हैं, लेकिन इस बार उन्होंने पहली बार इतने करीब से किसी परिवार का दर्द देखा।
एक बुजुर्ग ने कहा:
“सरकार राशन देती है, पर दिल का सहारा कोई विरला देता है। यह मदद सिर्फ अनाज नहीं, हिम्मत है।”
अन्नपूर्णा मुहिम: राहत नहीं, जीवन-सहारा
मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट के सेवादारों ने परिवार को आवश्यक राहत सामग्री प्रदान की, जिसमें शामिल थे:
| क्र. सं. (S. No.) | सामान (Item) | मात्रा (Quantity) |
| 1 | आटा | 15 किलो |
| 2 | चावल | 5 किलो |
| 3 | तेल | 1 लीटर |
| 4 | चीनी | 2 किलो |
| 5 | मूंग दाल | 1 किलो |
| 6 | चना दाल | 1 किलो |
| 7 | आलू | 5 किलो |
| 8 | प्याज | 5 किलो |
| 9 | हल्दी | 1 पैकेट |
| 10 | लाल मिर्च | 1 पैकेट |
| 11 | जीरा | 1 पैकेट |
| 12 | अचार | 1 पैकेट/डिब्बा |
| 13 | टाटा नमक | 1 पैकेट |
| 14 | चायपत्ती | 1 पैकेट |
| 15 | नहाने का साबुन | 1 पैकेट |
| 16 | कपड़े धोने का साबुन | 1 पैकेट |
| 17 | सर्फ़ (Surf) | 1 किलो |
| 18 | बच्चे के लिए दूध का डब्बा | 1 डब्बा |
इसके साथ ही परिवार को सतलोक आश्रम का सहायता कार्ड दिया गया, जिस पर स्थानीय सेवादार का संपर्क नंबर दर्ज है। इस कार्ड के माध्यम से भविष्य में भी जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद का आश्वासन दिया गया। सेवादार माता जी ने स्पष्ट किया: “जब तक इस परिवार की स्थिति सुधर नहीं जाती, तब तक इनकी मदद जारी रहेगी।” थोड़ी बहुत मदद तो कोई भी कर देता है लेकिन आजीवन मदद केवल भगवान ही कर सकता है।
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संत रामपाल जी महाराज की दूरगामी दृष्टि
भले ही संत रामपाल जी महाराज वर्तमान में जेल में हैं, परंतु उनकी द्वारा चल रही सेवा गतिविधियाँ रुकी नहीं हैं। उनके शिष्य गाँव-गाँव जाकर जरूरतमंद परिवारों की पहचान करते हैं और सहायता पहुँचाते हैं। अन्नपूर्णा मुहिम का मूल सिद्धांत है: “कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए।” इस अभियान के तहत न केवल खाद्य सामग्री दी जाती है, बल्कि:
- जरूरतमंदों के लिए घर बनवाना
- सरकारी स्कूल के बच्चों को ड्रेस, किताबें उपलब्ध कराना
- निशुल्क नेत्र जांच, दंत चिकित्सा
- रक्तदान शिविर
- दहेज-मुक्त विवाह का आयोजन
इन सेवाओं ने हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है।
संत रामपाल जी महाराज का परमेश्वर कबीर के अवतार
संत रामपाल जी महाराज परमेश्वर कबीर का अवतार हैं। उनका विश्वास है कि कबीर साहिब ने समय-समय पर धरती पर अवतार लेकर समाज को सत्य, करुणा और न्याय का मार्ग दिखाया है। इसी परंपरा में संत रामपाल जी महाराज वे दिव्य संत हैं, जिनके माध्यम से ईश्वर की करुणा प्रत्यक्ष रूप से जरूरतमंदों तक पहुँच रही है। यह आस्था भले ही धार्मिक विश्वास का विषय हो, परंतु इसके परिणामस्वरूप जो सेवा-कार्य धरातल पर दिखते हैं, वे समाज के लिए निस्संदेह लाभकारी हैं।
संत रामपाल जी महाराज का जीवन सेवा, त्याग और मानव कल्याण का जीता-जागता उदाहरण है। उन्होंने धर्म को केवल उपदेश तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे व्यवहार में उतारा। भूखे को भोजन, बेघर को आश्रय, बीमार को सहारा और बच्चों को शिक्षा यह सब उनके मिशन का हिस्सा रहा है। समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ उन्होंने मजबूत नैतिक आवाज़ उठाई, विशेषकर दहेज प्रथा, नशाखोरी और अंधविश्वास के विरुद्ध। उनकी करुणा ने न केवल गरीबों को राहत दी, बल्कि समाज को मानवीयता का नया अर्थ भी सिखाया है।
सामाजिक प्रभाव: डर से विश्वास तक का सफर
इस परिवार की कहानी ने आसपास के लोगों को झकझोर दिया है। कई लोग जो पहले चुप थे, अब मदद के लिए आगे आ रहे हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि सोनू जैसे लोग, जो सामाजिक उपेक्षा के कारण मानसिक रूप से टूट चुके थे, अब फिर से जीने की उम्मीद महसूस कर रहे हैं। जैसा कि सोनू ने कहा: “गुरु जी ने बहुत किया। अब लगता है कि हम अकेले नहीं हैं।”
अन्नपूर्णा मुहिम के नियम और पारदर्शिता
राहत सामग्री केवल उन्हीं परिवारों को दी जाती है जो: नशामुक्त जीवन जीते हों, मांसाहार न करते हों यदि कोई लाभार्थी बाद में इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो सहायता तुरंत बंद कर दी जाएगी। सामग्री समाप्त होने से दो दिन पहले लाभार्थी इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:
99928-0455, 99926-0771, 99926-0161, 99926-0162
निष्कर्ष: रोटी से बड़ी राहत आत्मसम्मान
यह कहानी केवल राशन बाँटने की नहीं है। यह मानवीय गरिमा को बचाने की कहानी है। कलानौर की इस छत पर जो मदद पहुँची, उसने एक टूटे परिवार को सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं दिया, बल्कि जीने का कारण भी दिया। संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम ने साबित किया है कि सच्ची सेवा वह है जो ज़मीन पर उतरकर लोगों के दर्द को महसूस करे।
आज यह परिवार भले ही पूरी तरह ठीक न हुआ हो, पर उनके मन में जो अंधेरा था उसमें उम्मीद की रोशनी ज़रूर जली है। जब तक इस परिवार की स्थति में परिवर्तन नहीं होता संत रामपाल जी महाराज इनकी मदद करते रहेंगे और शायद यही सच्ची सेवा और सच्चा धर्म है। संत रामपाल जी महाराज जैसे संत इस समाज और देश के अन्नदाता हैं। यह साधारण संत के वश की बात नहीं है।


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