वड़ोदरा (गुजरात): जब जीवन की परिस्थितियाँ इंसान को दो वक्त की रोटी के लिए भी दूसरों पर निर्भर कर देती हैं, तब ऐसी घड़ी में अगर कोई सच्चा सहारा बनकर सामने आता है, तो वह किसी फरिश्ते से कम नहीं होता। गुजरात राज्य के वड़ोदरा जिले के भाईली गांव में रहने वाले बुजुर्ग मोहन भाई पटियार और उनकी धर्मपत्नी सकु बहन जी के जीवन में ऐसा ही सहारा बनकर सामने आए जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत देशभर में उन जरूरतमंद परिवारों की पहचान की जा रही है, जिन्हें दो समय का भोजन भी नियमित रूप से नसीब नहीं हो पाता। इसी क्रम में संत रामपाल जी महाराज की दया एवं करुणा से यह परिवार भी सहायता के दायरे में आया। आइए जानते है इस लेख में कैसे गुजरात के इस परिवार की तकदीर को ही पलट कर रख दिया संत रामपाल जी महाराज ने।
दयनीय जीवन परिस्थितियाँ
मोहन भाई पटियार और उनकी पत्नी पिछले कई वर्षों से भाईली गांव के रबारीवास क्षेत्र में एक मकान की पहली मंजिल पर बेहद जर्जर किराए के मकान में रह रहे हैं। एक हजार मासिक किराए वाले इस मकान की सीढ़ियां बहुत ही तंग है जिस पर बहुत संभलकर चलना पड़ता है। छत लोहे की चादरों से बनी है, जिसमें जंग लग चुका है, जिस कारण से कई जगहों पर छेद हो चुका है।
बरसात में पानी टपकता है और गर्मी में असहनीय तपन झेलनी पड़ती है। घर की ऊँचाई एक ओर छह फुट तो दूसरी ओर साढ़े तीन से चार फुट तक सिमट जाती है। मकान में रसोईघर में न गैस की सुविधा है, जिस कारण लकड़ियों के सहारे भोजन पकाया जाता है। बाथरूम की भी व्यवस्था अच्छी स्थिति में नहीं है, घर का मुख्य दरवाजा भी टूटा हुआ है।
भूख और बीमारी के बीच पिसता जीवन
मोहन भाई सांस की गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं और कार्य करने में असमर्थ हैं। परिवार का पूरा बोझ उनकी पत्नी सकु बहन जी पर है, जो खेतों में मजदूरी कर कभी ₹50 तो कभी ₹100 प्रतिदिन कमा पाती हैं जिससे वो उस दिन के खाने की व्यवस्था कर पाती है। कई बार तो काम भी नहीं मिल पाता जिस कारण उन्हें उस दिन भूखे रहना पड़ता है। ऐसे में पड़ोसियों द्वारा दिया गया थोड़ा-बहुत भोजन ही अब तक इनके जीवन का सहारा रहा है।
संत रामपाल जी महाराज की करुणामयी सहायता
ऐसी विषम परिस्थिति में संत रामपाल जी महाराज की दया एवं करुणा से अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत इस परिवार तक सहायता पहुँची। संत रामपाल जी महाराज के आदेश से इस परिवार को आवश्यक खाद्य सामग्री निशुल्क उपलब्ध कराई गई।
| क्रम सं | सामग्री | मात्रा |
| 1. | आटा | 15 किलोग्राम |
| 2. | चावल | 5 किलोग्राम |
| 3. | चीनी | 2 किलोग्राम |
| 4. | चायपत्ती | 250 ग्राम |
| 5. | सूखा दूध | 500 ग्राम |
| 6. | सरसों तेल | 1 लीटर |
| 7. | आचार | 500 ग्राम |
| 8. | नमक | 1 किलोग्राम |
| 9. | काले चने | 500 ग्राम |
| 10. | हरी मूंग दाल | 500 ग्राम |
| 11. | पीली मूंग दाल | 500 ग्राम |
| 12. | चना दाल | 500 ग्राम |
| 13. | जीरा | 150 ग्राम |
| 14. | हल्दी पाउडर | 150 ग्राम |
| 15. | लाल मिर्च पाउडर | 100 ग्राम |
| 16. | नहाने का साबुन | 1 सेट (4 पीस) |
| 17. | कपड़ा धोने का साबुन | 1 किलोग्राम |
| 18. | कपड़ा धोने का सर्फ | 500 ग्राम |
| 19. | आलू | 5 किलोग्राम |
| 20. | प्याज़ | 5 किलोग्राम |
आजीवन सहायता की व्यवस्था
संत रामपाल जी महाराज की दूरदर्शी सोच के अंतर्गत इस परिवार को एक विशेष कार्ड भी प्रदान किया गया है। इस कार्ड में कुछ संपर्क सूत्र दिए है जिससे भविष्य में जब भी राशन की आवश्यकता हो, तो संपर्क करने पर हर महीने राशन सामग्री घर तक पहुँचाई जा सके। यह सहायता तब तक जारी रहेगी, जब तक परिवार को आवश्यकता रहेगी।
नशामुक्त और सदाचारी जीवन का संदेश
अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत संत रामपाल जी महाराज ने यह स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सहायता पाने वाला प्रत्येक परिवार नशा एवं मांसाहार से पूर्णतः दूर रहेगा। यह नियम मानव जीवन को शुद्ध, स्वस्थ और पापमुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अगर किसी भी वक्त लाभार्थी परिवार निषेध वस्तुओं का सेवन करता पाया गया तो उनके लिए सहायता तुरंत प्रभाव से रोक दी जाएगी।
संत रामपाल जी महाराज के तत्वज्ञान के अनुसार नशा और हिंसा मनुष्य को कष्टों की ओर ले जाते हैं, जबकि सदाचारी जीवन आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।
पड़ोसियों ने दिल से की सराहना
पड़ोसियों ने भी स्वीकार किया कि मोहन भाई का परिवार लंबे समय से अत्यंत गरीबी में जीवन व्यतीत कर रहा था। संत रामपाल जी महाराज द्वारा मिली इस सहायता को उन्होंने “भगवान का रूप” बताते हुए इस नेक कार्य की खुले दिल से सराहना की।
मानवता की सच्ची मिसाल
भाईली गांव में आज जो दृश्य देखने को मिला, वह इस बात का प्रमाण है कि यदि कोई सच में गरीबों की सुनता है, तो वह संत रामपाल जी महाराज हैं। संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा संचालित अन्नपूर्णा मुहिम केवल राशन वितरण नहीं, बल्कि भूख, अभाव और निराशा से जूझते परिवारों के लिए सम्मानपूर्वक जीवन जीने की व्यवस्था है।
जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में यह मुहिम देशभर में निरंतर चल रही है, जिससे हजारों जरूरतमंद परिवारों को भोजन, शिक्षा और जीवन की मूलभूत सुविधाएँ निशुल्क प्राप्त हो रही हैं।
क्या धरती पर ऐसा कोई इंसान है जो अपने किसी जरूरतमंद जानकार को भी उसके सक्षम होने तक ऐसे पाल सके?
जी नहीं। यह ईश्वरीय शक्ति ही है जो लोगों के घर में हर महीने राशन भेज कर उनके दर्द को अपना समझ रही है और यही ईश्वरीय शक्ति इस धरती पर इस वक्त संत रामपाल जी महाराज के रूप में कार्य कर रही है। पहचानने में ज्यादा देर करने से नुकसान अपना ही है।


ऐसी सहायता कोई आम इंसान कभी नहीं कर सकता है! ये साक्षात पूर्ण परमात्मा के अवतार हैं!
संत रामपाल जी महाराज की जय हो!
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