अंचरा कलां, जींद (हरियाणा): कहा जाता है कि विपत्ति के समय जो साथ खड़ा हो, वही सच्चा साथी होता है। आज के कलयुगी दौर में जहाँ अपने भी साथ छोड़ देते हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज समाज के लिए एक ऐसे मसीहा बनकर उभरे हैं, जिनके सेवा कार्यों ने मानवता की नई मिसाल पेश की है।
इसी कड़ी में, संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में चल रही ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत मुनिंदर धर्मार्थ ट्रस्ट ने जींद जिले के सफीदों ब्लॉक स्थित गाँव अंचरा कलां में एक अत्यंत निर्धन और बेसहारा परिवार को नया जीवन प्रदान किया है।
धर्मवीर और उनके परिवार की दर्दनाक दास्तां सुनकर हर किसी की रूह कांप जाए, लेकिन संत रामपाल जी महाराज की कृपा ने उनके आंसुओं को मुस्कान में बदल दिया है।
बेबसी और लाचारी की जीती -जागती तस्वीर: धर्मवीर का परिवार
गाँव अंचरा कलां के रहने वाले धर्मवीर का जीवन पिछले पाँच वर्षों से नर्क समान हो गया था। एक समय मजदूरी कर परिवार का पेट पालने वाले धर्मवीर की दोनों टांगें टूट चुकी हैं, जिससे वे बिस्तर पर लाचार पड़े हैं। मुसीबत यहीं खत्म नहीं होती; उनकी पत्नी का हाथ भी एक झगड़े के दौरान टूट गया था और उसमें प्लेट डली हुई है।
घर में कमाने वाला कोई नहीं है और खाने वालों की कतार लंबी है—सात बेटियां और एक बेटा। विडंबना यह है कि उनका इकलौता 15 वर्षीय बेटा भी 75 प्रतिशत मानसिक रूप से दिव्यांग है। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय थी कि उनके पास न तो पक्का मकान है और न ही बिजली-पानी की सुविधा। सरकारी योजना के तहत मिली एक छोटी सी जगह में बनी दीवारों में भी बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं, जो कभी भी गिर सकती हैं।
घर में अंधेरा है क्योंकि बिजली का मीटर नहीं है। खाना पकाने के लिए गैस तो दूर, सही चूल्हा तक नहीं था। परिवार का गुजारा मांग-कर या मंदिर से मिलने वाले भोजन पर निर्भर था। धर्मवीर की आँखों में अपनी सात बेटियों के भविष्य की चिंता साफ दिखाई देती थी, लेकिन शारीरिक अक्षमता ने उन्हें बेबस कर दिया था।
संत रामपाल जी महाराज के सेवकों का आगमन: उम्मीद का सूर्योदय
जब इस परिवार की दयनीय स्थिति की सूचना संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों को मिली, तो उन्होंने संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार तुरंत मुनिंदर धर्मार्थ ट्रस्ट के तहत सर्वे किया। ट्रस्ट के सेवादार अनिल दास ने बताया कि गुरुजी के आदेशानुसार वे गाँव-गाँव जाकर ऐसे परिवारों को चिन्हित कर रहे हैं जिन्हें दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होती।
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सर्वे के दौरान जब वे धर्मवीर के घर पहुँचे, तो वहां के हालात देखकर वे भी दंग रह गए। पुष्टि होने के बाद, संत रामपाल जी महाराज की दया से राशन और आवश्यक सामग्री से भरी गाड़ी अंचरा कलां पहुँची।
राहत सामग्री का अंबार: एक महीने का पूरा राशन
‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत दी गई सहायता केवल नाममात्र की नहीं थी, बल्कि इसमें परिवार की हर छोटी-बड़ी जरूरत का ख्याल रखा गया। सेवादारों ने धर्मवीर के घर में निम्नलिखित सामग्री पहुंचाई:
25 किलो आटा, 5 किलो चावल (उच्च गुणवत्ता), 5 किलो आलू, 5 किलो प्याज, 2 किलो चीनी, 1 किलो मूंग दाल, 1 किलो चना दाल, 1 किलो अमूल दूध पाउडर, 1 किलो टाटा नमक, 1 किलो खादी साबुन, 1 किलो सर्फ, नहाने के साबुन का 4 पीस का सेट, 1 लीटर तेल, टाटा अग्नि चायपत्ती, हल्दी, जीरा, लाल मिर्च और अन्य मसाले।
राशन सामग्री देखते ही धर्मवीर और उनकी पत्नी की आँखों से कृतज्ञता के आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि आज तक किसी ने उनकी इतनी सुध नहीं ली, जितनी संत रामपाल जी महाराज ने ली है।
सिर्फ राशन नहीं, सम्पूर्ण पुनर्वास का संकल्प
संत रामपाल जी महाराज की यह मुहिम केवल एक बार खाना देने तक सीमित नहीं है। सेवादार अनिल दास ने परिवार को आश्वासन दिया कि जब तक धर्मवीर या उनका परिवार स्वावलंबी नहीं हो जाता, तब तक संत रामपाल जी महाराज उनकी मदद करते रहेंगे। उन्हें एक कार्ड और आश्रम के नंबर दिए गए हैं; राशन खत्म होने से दो दिन पहले सूचित करने पर राशन उनके घर पहुंचा दिया जाएगा।
इसके अलावा, घर की जर्जर हालत को देखते हुए, संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार घर की मरम्मत करवाने का भी भरोसा दिलाया है। बिजली कनेक्शन के लिए कागजी कार्रवाई पूरी कर मीटर लगवाने और रसोई गैस कनेक्शन उपलब्ध करवाने का भी जिम्मा उठाया गया है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि परिवार की बेटियों की शिक्षा के लिए स्कूल ड्रेस, किताबें और जूते भी ट्रस्ट द्वारा मुहैया कराए जाएंगे। जब बेटियां विवाह योग्य होंगी, तो उनका विवाह भी संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाए जा रहे दहेज मुक्त विवाह अभियान (रमैणी) के तहत धूमधाम से करवाया जाएगा।
ग्रामवासियों और पड़ोसियों की प्रतिक्रिया
पड़ोस में रहने वाली महिलाओं ने बताया कि इस परिवार की सुध लेने वाला कोई नहीं था। वे मांगकर अपना पेट भरते थे। पड़ोसियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार किसी संत को इस तरह घर-घर जाकर गरीबों की मदद करते देखा है।
उन्होंने कहा, “संत रामपाल जी महाराज तो भगवान का रूप हैं।” धर्मवीर ने भावुक होकर कहा, “महाराज जी ने मेरी झोली भर दी, मैं जिंदगी भर उनका गुणगान करूंगा।”
संत रामपाल जी महाराज का उद्देश्य: कोई न सोए भूखा
इस पूरी मुहिम का श्रेय संत रामपाल जी महाराज को जाता है, जो भले ही शारीरिक रूप से जेल में हैं, लेकिन उनकी प्रेरणा और शिक्षाएं समाज में क्रांति ला रही हैं। उनकी ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ का उद्देश्य भारत को भूख मुक्त बनाना है।
हालांकि, सहायता प्राप्त करने के लिए एक शर्त अनिवार्य है—लाभार्थी को नशा और मांसाहार का त्याग करना होगा। यह शर्त न केवल परिवार को आर्थिक मदद देती है बल्कि उन्हें एक स्वस्थ और नैतिक जीवन जीने की प्रेरणा भी देती है।
संत रामपाल जी महाराज का सपना है कि भारत पुनः ‘सोने की चिड़िया’ बने और सतयुग जैसा माहौल स्थापित हो, जहाँ न कोई भूखा हो, न कोई दहेज के कारण दुखी हो, और न ही कोई नशे की गिरफ्त में हो। अंचरा कलां में धर्मवीर के परिवार को मिली यह मदद उसी स्वर्णिम भविष्य की एक झांकी मात्र है।

