इंदौर, मध्य प्रदेश: मानवीय संवेदनाओं और निस्वार्थ सेवा के संगम के रूप में प्रसिद्ध जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ ने एक बार फिर मानवता की मिसाल पेश की है। हाल ही में यह मुहिम मध्य प्रदेश के इंदौर जिले से 43 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम किठोदा पहुंची, जहां एक वृद्ध महिला दशकों से भीषण अभाव और एकाकीपन में अपना जीवन व्यतीत कर रही थी। केवल संत रामपाल जी ने इस वृद्धा की सुध ली, साथ ही उनके लिए राशन, वस्त्र और आवास की मरम्मत का पूर्ण उत्तरदायित्व भी उठाया है।
दो दशकों का एकाकी संघर्ष और जर्जर आवास की चुनौतियां
ग्राम किठोदा निवासी इस वृद्ध महिला की कहानी अत्यंत हृदयविदारक है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, लगभग 20 से 25 वर्ष पूर्व महिला के पति का स्वर्गवास हो गया था, जिसके बाद से वह इस दुनिया में बिल्कुल अकेली रह गई हैं। जीवनयापन के लिए उनके पास संसाधनों का नितांत अभाव है। वह केवल शासन द्वारा मिलने वाली नाममात्र की विधवा पेंशन और कंट्रोल (सोसाइटी) से प्राप्त होने वाले 4-5 किलो अनाज पर निर्भर थीं।
उनकी आवास स्थिति भी अत्यंत दयनीय पाई गई। वह टीन के चद्दरों (पतरों) से बने एक कच्चे मकान में रहती हैं, जिसकी छतों में जगह-जगह छेद हो चुके हैं। ग्रामीणों के अनुसार, वर्षा ऋतु में घर के भीतर पानी का रिसाव होता है, जिससे वृद्धा को पूरी रात जागकर गुजारनी पड़ती। घर के नाम पर उनके पास मात्र एक छोटा सा किचन और एक कमरा है, जिसमें बुनियादी सुविधाओं जैसे बर्तनों, बिस्तर और बिजली के उपकरणों की भारी कमी देखी गई।
अन्नपूर्णा मुहिम: ‘रोटी, कपड़ा, मकान और शिक्षा’ का संकल्प
संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ का मुख्य ध्येय ‘जिसका कोई नहीं, उसका कबीर भगवान’ सिद्धांत को चरितार्थ करना है। संत रामपाल जी महाराज द्वारा ग्राम किठोदा में वृद्धा को तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध कराई।
इस सहायता अभियान के तहत महिला को निम्नलिखित सामग्री प्रदान की गई:
| क्रमांक | सामग्री का नाम | मात्रा / विवरण |
| 1 | आटा | 15 किलोग्राम |
| 2 | चावल | 5 किलोग्राम |
| 3 | चीनी | 2 किलोग्राम |
| 4 | दाल (मूंग) | 1 किलोग्राम |
| 5 | दाल (चना) | 1 किलोग्राम |
| 6 | सरसों का तेल | 1 लीटर |
| 7 | नमक | 1 पैकेट |
| 8 | हल्दी पाउडर | 1 पैकेट |
| 9 | लाल मिर्च पाउडर | 1 पैकेट |
| 10 | जीरा | 1 पैकेट |
| 11 | अचार | 1 किलोग्राम |
| 12 | चाय पत्ती (टाटा) | 1 पैकेट |
| 13 | सूखा दूध | 2 पैकेट |
| 14 | नहाने का साबुन | 4 टिकिया |
| 15 | कपड़े धोने का साबुन | 1 पैकेट |
| 16 | कपड़े धोने का पाउडर | 1 पैकेट |
| 17 | आलू | 1 किलो |
| 18 | प्याज़ | 1 किलो |
संत रामपाल जी महाराज के सेवादारों ने स्पष्ट किया कि यह सहायता केवल एक बार के लिए नहीं है, बल्कि यह आजीवन जारी रहेगी।
संपर्क कार्ड और भविष्य की सुरक्षा का आश्वासन
सेवा के इस संकल्प को व्यवस्थित बनाने के लिए वृद्धा को एक विशेष ‘अन्नपूर्णा कार्ड’ भी प्रदान किया गया है। इस कार्ड पर सतलोक आश्रम के संपर्क सूत्र अंकित हैं। निर्देशानुसार, राशन समाप्त होने से दो-तीन दिन पूर्व इन नंबरों पर सूचना देने पर नई राशन किट सीधे वृद्धा के घर तक पहुंचाई जाएगी।
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पड़ोसी राकेश चौहान और अन्य ग्रामीणों ने इस पहल की काफ़ी प्रशंसा की है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले 20 वर्षों में आज तक कोई भी संस्था या व्यक्ति इस प्रकार की जमीनी मदद लेकर नहीं आया। मुहिम के सदस्यों ने यह भी आश्वासन दिया है कि यदि भविष्य में वृद्धा को स्वास्थ्य संबंधी समस्या होती है या उनके जर्जर मकान को मरम्मत की आवश्यकता पड़ती है, तो ट्रस्ट उसका पूरा खर्च वहन करेगा।
मुहिम की अनिवार्य शर्तें: नशा मुक्ति और सात्विक जीवन
संत रामपाल जी महाराज की इस निशुल्क सेवा का लाभ प्राप्त करने के लिए कुछ कड़े नैतिक नियम भी निर्धारित किए गए हैं। ट्रस्ट के अनुसार, राहत सामग्री केवल उन्हीं व्यक्तियों को प्रदान की जाती है जो:
- पूर्ण रूप से नशा मुक्त जीवन व्यतीत करते हैं।
- मांसाहार या किसी भी अभक्ष वस्तु का सेवन नहीं करते।
यदि कोई लाभार्थी पूर्व में नशा करता रहा हो, तो उसे सहायता प्राप्त करने से पहले इन बुराइयों को त्यागने का संकल्प लेना अनिवार्य है। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि समाज को न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक रूप से भी शुद्ध किया जा सके।
शिक्षा और अन्य सामाजिक सरोकार
अन्नपूर्णा मुहिम केवल भोजन तक सीमित नहीं है। सेवादारों ने बताया कि यदि क्षेत्र में ऐसे बच्चे मिलते हैं जो गरीबी के कारण स्कूल नहीं जा पा रहे या जिनके पास ड्रेस, किताबें और जूते खरीदने के पैसे नहीं हैं, तो उन्हें भी पूरी सहायता दी जाएगी। संत रामपाल जी महाराज का संदेश स्पष्ट है कि समाज का कोई भी व्यक्ति भूख, अशिक्षा या छत के अभाव में न रहे।
इंदौर के ग्राम किठोदा में हुई इस कार्रवाई ने यह सिद्ध कर दिया है कि मानवता की सेवा के लिए जेल की दीवारें या बाहरी आलोचनाएं बाधा नहीं बन सकतीं। आज यह वृद्धा, जो कल तक दाने-दाने को मोहताज थी, संत जी की इस मुहिम के कारण सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन की ओर अग्रसर है। मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट ने हेल्पलाइन नंबरों (9992804555, 9992607711) के माध्यम से अन्य जरूरतमंदों से भी संपर्क करने की अपील की है ताकि सेवा का यह चक्र अनवरत चलता रहे।
अन्नपूर्णा मुहिम : एक समाजिक क्रांति
समाज के अंतिम छोर पर बैठी इस बेसहारा वृद्धा तक मदद पहुँचाना यह दर्शाता है कि ‘अन्नपूर्णा मुहिम‘ केवल एक वितरण कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति है। ग्राम किठोदा के निवासियों के लिए यह सहायता किसी दैवीय हस्तक्षेप से कम नहीं है, जिसने एक टूटते हुए घर और बुझते हुए चूल्हे को पुनः आशा की रोशनी से भर दिया है।


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