वड़ोदरा (गुजरात): आज के आधुनिक युग में जहाँ व्यक्ति स्वार्थ की अंधी दौड़ में अपनों को भूलता जा रहा है, वहीं संत रामपाल जी महाराज की असीम दया और करुणा समाज के अंतिम छोर पर खड़े लाचार व्यक्तियों के लिए वरदान साबित हो रही है। गुजरात के दाहोद जिले के लक्ष्मीपुरा गाँव से आई एक हृदयस्पर्शी घटना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि संसार के सारे रास्ते बंद भी हो जाते हैं, तब पूर्ण परमात्मा के प्रतिनिधि के रूप में संत रामपाल जी महाराज का सहारा मिलता है।
लक्ष्मीपुरा गांव में रहने वाले 71 वर्षीय दिनेश जी कई वर्षों से बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन बिता रहे थे। उम्र के इस पड़ाव पर जहां इंसान को सहारे और सम्मान की आवश्यकता होती है, वहीं दिनेश जी के जीवन में बीमारी, गरीबी और अकेलापन ही उनके साथी बन गए थे। आइए जानते है कैसे संत रामपाल जी महाराज ने इन बुजुर्ग के जीवन को संभाला और दी एक नई जीने की राह।
गरीबी, बीमारी और अकेलेपन से जूझती एक जिंदगी
साल 2008 में उन्हें लकवा (पैरालिसिस) का गंभीर दौरा पड़ा, जिससे उनका शरीर कमजोर हो गया। कुछ समय तक उन्होंने संघर्ष करते हुए जीवन को संभालने की कोशिश की, लेकिन धीरे-धीरे उनकी शारीरिक स्थिति बिगड़ती चली गई। वर्ष 2015 के बाद उनके हाथों ने भी ठीक से काम करना बंद कर दिया और इसी कारण उनकी नौकरी भी छूट गई।
नौकरी छूटने के बाद उनकी आय का कोई साधन नहीं रहा। परिवार में भी कोई सहारा नहीं था। कई बार उन्हें भोजन के लिए दूसरों के सामने हाथ फैलाना पड़ता था। कभी मंदिरों में चलने वाले भंडारों में जाकर खाना खा लेते थे तो कभी आसपास के लोगों से थोड़ी बहुत मदद मिल जाती थी। लेकिन यह जीवन उनके लिए बेहद कष्टदायक और आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाला था।
बेहद कठिन परिस्थितियों में रह रहे थे दिनेश जी
दिनेश जी का घर भी उनकी गरीबी की कहानी बयान करता है। उनका मकान कच्चा है और घर की छत भी पूरी तरह पक्की नहीं है। बाथरूम का दरवाजा टूटा हुआ है और शौचालय की उचित व्यवस्था भी नहीं है। दिनेश जी के अनुसार, उन्हें कई बार शौच के लिए बाहर जाना पड़ता था। गर्मियों के दिनों में घर में पंखा भी खराब हो चुका था, जिसके कारण उन्हें अत्यधिक परेशानी होती थी। ऐसी स्थिति में जीवन जीना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया था। उम्र, बीमारी और गरीबी के कारण वह किसी प्रकार की मेहनत करने में भी सक्षम नहीं थे।
जब भगवान ने भेजी मदद
कहते हैं कि जब भगवान किसी की मदद करते हैं तो वह इंसानों के रूप में ही मदद भेजते हैं। दिनेश जी के जीवन में भी ऐसा ही एक पल आया जब संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा से चल रही अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से उनकी सहायता की गई। संत रामपाल जी महाराज की दया एवं करुणा से दिनेश जी तक आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाई गई। इस सहायता से न केवल उनके घर में भोजन की व्यवस्था हुई बल्कि उनके जीवन में आत्मसम्मान और उम्मीद की एक नई किरण भी जगी। आज उनके घर में फिर से चूल्हा जलने लगा है। उन्हें यह भरोसा मिला है कि अब कोई है जो उनकी परिस्थितियों को समझता है और उनकी परवाह करता है।
संत रामपाल जी महाराज की कृपा से मिली राहत सामग्री
संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में चल रही अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत दिनेश जी को कुल 20 प्रकार की आवश्यक खाद्य और घरेलू सामग्री प्रदान की गई है जो कि निम्नलिखित है:-
| क्रम संख्या | सामग्री | मात्रा |
| 1. | आटा | 15 किलोग्राम |
| 2. | चावल | 5 किलोग्राम |
| 3. | चीनी | 2 किलोग्राम |
| 4. | सूखा दूध | 500 ग्राम |
| 5. | चायपत्ती | 250 ग्राम |
| 6. | सरसों तेल | 1 लीटर |
| 7. | आचार | 500 ग्राम |
| 8. | नमक | 1 किलोग्राम |
| 9. | पीली मूंग दाल | 500 ग्राम |
| 10. | हरी मूंग दाल | 500 ग्राम |
| 11. | चना दाल | 500 ग्राम |
| 12. | काले चने | 500 ग्राम |
| 13. | जीरा | 150 ग्राम |
| 14. | हल्दी पाउडर | 150 ग्राम |
| 15. | लाल मिर्च पाउडर | 100 ग्राम |
| 16. | आलू | 5 किलोग्राम |
| 17. | प्याज़ | 5 किलोग्राम |
| 18. | कपड़ा धोने का साबुन | 1 किलोग्राम |
| 19. | नहाने का साबुन | 1 सेट (4 पीस) |
| 20 | सर्फ | 500 ग्राम |
यह पूरी सहायता संत रामपाल जी महाराज की दया एवं करुणा से संभव हुई, जिसके माध्यम से जरूरतमंद लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई जाती है।
खराब पंखे की समस्या का भी किया समाधान
दिनेश जी के घर में जो पंखा था वह काफी समय से खराब पड़ा हुआ था। गर्मी के मौसम में यह उनके लिए बड़ी परेशानी का कारण बन जाता था। संत रामपाल जी महाराज की कृपा से उन्हें एक नया पंखा भी उपलब्ध कराया गया और उसे उनके घर में लगवाया भी गया। इससे अब उन्हें गर्मी के दिनों में काफी राहत मिलेगी।
जरूरतमंदों के लिए लगातार जारी रहती है सहायता
अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत दी जाने वाली सहायता केवल एक बार तक सीमित नहीं होती। जब जरूरतमंद परिवार की दी गई सामग्री खत्म होने वाली होती है, तो वह पहले से संपर्क कर सकते हैं और फिर से उन्हें आवश्यक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। इसके लिए उन्हें संत रामपाल जी महाराज के आदेश से संपर्क सूत्र दिए गए है। यह पूरी सेवा संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा और मार्गदर्शन में चलाई जा रही है, ताकि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति भूखा न रहे।
नशा और मांसाहार से दूर रहने की शर्त
अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत सहायता प्राप्त करने के लिए कुछ नियम भी बनाए गए हैं। इस सेवा का लाभ केवल उन जरूरतमंद लोगों को दिया जाता है जो नशा मुक्त जीवन जीते हैं और मांसाहार का सेवन नहीं करते। यदि कोई व्यक्ति सहायता प्राप्त करने के बाद नशा या मांसाहार करता हुआ पाया जाता है, तो उसकी सहायता तुरंत बंद कर दी जाती है।
मानवता के सच्चे मसीहा
लक्ष्मीपुरा गाँव के दिनेश जी जैसे हजारों असहाय लोग आज संत रामपाल जी महाराज की दया के पात्र बन रहे हैं। जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की दया से यह मुहिम गरीबों के लिए ‘कामधेनु’ के समान है। रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान जैसे बुनियादी अधिकारों से वंचित लोगों के लिए महाराज जी एक आशा की किरण बनकर उभरे हैं।
आज दिनेश जी के घर में चूल्हा जल रहा है, पंखा चल रहा है और सबसे बड़ी बात यह है कि उनके मन में यह विश्वास जाग चुका है कि इस दुनिया में संत रामपाल जी महाराज के रूप में कोई है, जो उनकी और उन जैसे अनगिनत बेसहारा लोगों की परवाह करता है। वास्तव में, समाज सुधार और परोपकार के ये कार्य संत रामपाल जी महाराज की उस महान सोच को दर्शाते हैं, जहाँ ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का भाव चरितार्थ होता है।

