दिल्ली (छतरपुर): देश की राजधानी दिल्ली के छतरपुर स्थित माता चौक की ऐतिहासिक ‘महर्षि वाल्मीकि चौपाल’ पिछले 17 वर्षों से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही थी। साल 2008 में निर्माण के बाद से प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह इमारत धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होती गई। जहाँ कभी समाज के शुभ कार्य होते थे, वहां टूटे शीशे, लटकते तार और सीलन भरी दीवारें मुंह चिढ़ा रही थीं।
लेकिन जब प्रशासन और नेताओं के झूठे वादों से उम्मीद खत्म हो गई, तब जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ‘मानवता के मसीहा’ बनकर सामने आए। संत रामपाल जी महाराज ने इस चौपाल की पुकार सुनी और मात्र 17-18 दिनों के भीतर इसे एक भव्य भवन का रूप दे दिया।
प्रशासनिक उपेक्षा और जर्जर हालात
माता चौक, छतरपुर गांव की यह वाल्मीकि चौपाल वर्ष 2008 में बनी थी। निर्माण के बाद से लेकर अब तक, यानी लगभग 17 सालों में इसकी एक बार भी मरम्मत नहीं की गई। स्थिति यह थी कि:
- इमारत की दीवारें सीलन से भरी थीं और प्लास्टर झड़ रहा था।
- खिड़कियाँ और दरवाजे टूट चुके थे, जिससे धूल और मिट्टी अंदर आती थी।
- बिजली की फिटिंग पूरी तरह नष्ट हो चुकी थी; न लाइटें थीं, न पंखे चलते थे और बोर्ड भी टूटे हुए थे।
- शौचालय के दरवाजे तक नदारद थे।
स्थानीय निवासियों और समिति के सदस्यों ने कई बार क्षेत्रीय सांसदों, विधायकों और निगम पार्षदों से गुहार लगाई। नेता आते, वादे करते, वोट लेते और चले जाते, लेकिन चौपाल की एक ईंट भी नहीं बदली गई। समाज के पास इतने संसाधन नहीं थे कि वे स्वयं इसका पुनर्निर्माण कर सकें।
संत रामपाल जी महाराज के चरणों में प्रार्थना और तत्काल आदेश
जब समाज के लोगों को हर तरफ से निराशा हाथ लगी, तो उन्होंने संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ और समाज कल्याण कार्यों के बारे में सुना। चौपाल समिति के अध्यक्ष और सदस्यों ने संत रामपाल जी महाराज से विनती की कि समाज के इस साझा भवन की दशा सुधारी जाए।
संत रामपाल जी महाराज, जो दीन-दुखियों और समाज की पीड़ा को अपना समझते हैं, ने तुरंत इस प्रार्थना को स्वीकार किया। महाराज जी ने तत्काल प्रभाव से चौपाल के जीर्णोद्धार (Renovation) का आदेश दिया ताकि समाज के लोग सम्मान के साथ यहां अपने विवाह, सत्संग और अन्य कार्यक्रम आयोजित कर सकें।
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18 दिनों में हुआ चमत्कार: संत रामपाल जी महाराज की शक्ति
संत रामपाल जी महाराज का आदेश मिलते ही कार्य युद्धस्तर पर शुरू हुआ। महाराज जी की प्रेरणा और शक्ति का ही प्रभाव था कि सेवादारों ने दिन-रात की परवाह किए बिना कार्य किया। सुबह की टीम अलग और रात की टीम अलग इस तरह 24 घंटे कार्य चला। जो कार्य सरकारी तंत्र 17 सालों में नहीं कर पाया, उसे संत रामपाल जी महाराज ने मात्र 18 दिनों में पूरा कर दिखाया।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान किया गया कायाकल्प:
| श्रेणी | विवरण |
| सिविल कार्य (Civil Work) | टूटी हुई दीवारों की मरम्मत, पूरे भवन में नई और उच्च गुणवत्ता वाली टाइल्स लगवाई गईं, दीवारों की घिसाई और बेहतरीन पेंट (पुताई) किया गया। |
| इलेक्ट्रिकल फिटिंग (Electrical) | पूरे भवन की वायरिंग बदली गई। नई ट्यूबलाइट्स, फैंसी लाइट्स, सुरक्षित स्विच बोर्ड और हर आवश्यक स्थान पर नए पंखे लगाए गए। |
| फर्नीचर और सुविधाएं | समाज के बैठने के लिए नई कुर्सियों की व्यवस्था की गई। टूटे हुए दरवाजों और खिड़कियों को बदलकर नए और मजबूत दरवाजे-खिड़कियाँ लगाई गईं। |
| स्वच्छता और अन्य | शौचालयों की मरम्मत की गई, नए दरवाजे लगाए गए और साफ-सफाई की पूरी व्यवस्था की गई। |
निःस्वार्थ सेवा: “एक कप चाय तक स्वीकार नहीं की”
इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह रही कि इसमें स्थानीय समाज पर एक रुपये का भी बोझ नहीं डाला गया। संत रामपाल जी महाराज की ओर से यह सेवा पूरी तरह निशुल्क थी। स्थानीय प्रधान टोनी बाली जी ने भावुक होकर बताया, “
संत रामपाल जी महाराज के सेवादारों ने हमसे एक कप चाय तक नहीं पी। वे अपना लंगर-पानी साथ लाते थे और उल्टे हमें ही प्रेम से खिलाते थे। उन्होंने गुणवत्ता (Quality) से कोई समझौता नहीं किया; अगर कोई सामान हल्का भी खराब या लो क्वालिटी आ गया तो उसे तुरंत वापस कर उच्च कोटि का सामान मंगवाया गया।”
ग्रामीणों और नेताओं की प्रतिक्रिया
समाज के प्रधान और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने संत रामपाल जी महाराज का कोटि-कोटि धन्यवाद किया:
“मैंने अपने 47-48 साल के जीवन में ऐसा काम कभी नहीं देखा। नेताओं ने हमें सिर्फ पागल बनाया, लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने जो वादा किया, उसे दो दिन में शुरू कर दिया और महल जैसा बना दिया। हम उनके आभारी हैं।” — टोनी बाली, प्रधान, वाल्मीकि समाज
“चौपाल की हालत बर्बर थी, हम असक्षम थे। लेकिन महाराज जी की दया से 15-20 दिनों में जो बदलाव हुआ है, वह अकल्पनीय है। रात के 3-3 बजे तक काम हुआ है।” — हनी कुमार, उप-प्रधान
“पूरे गांव की प्रार्थना को गुरु जी ने स्वीकार किया और एक-एक चीज को तराशा गया है। हम सदा संत रामपाल जी महाराज के ऋणी रहेंगे।” — नरेश त्यागी, निगम पार्षद
मानवता को समर्पित एक नई शुरुआत
कार्य संपन्न होने के बाद, संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार, नवनिर्मित चौपाल की चाभी सम्मानपूर्वक समाज के प्रधान को सौंप दी गई। इस अवसर पर एक विशाल सत्संग का आयोजन किया गया, जिसमें पूरा गांव उमड़ पड़ा। कृतज्ञ ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के चित्र पर बड़ी माला पहनाई और पगड़ी व शॉल भेंट कर उनका धन्यवाद किया।

