अन्नपूर्णा मुहिम के तहत साक्षात् भगवान ही पधार गए है, ऐसा बोली खेड़ी, महम की लाभार्थी बहन कुसुम

अन्नपूर्णा मुहिम के तहत साक्षात् भगवान ही पधार गए है, ऐसा बोली खेड़ी, महम की लाभार्थी बहन कुसुम

खेड़ी (हरियाणा): आज कई परिवार बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति के बिना संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे समय में संत रामपाल जी महाराज, अन्नपूर्णा मुहिम के तहत, उन जरूरतमंद घरों तक एक अलौकिक मदद पहुँचा कर, उनके लिए एक नई जीवनरेखा बन रहे है, जहाँ सामान्य राहत पहुंच पाना भी मुश्किल था। यह घटना उसी प्रयास का एक उदाहरण है, जिसमें एक पीड़ित परिवार को सम्मान और सुरक्षा की राह पर आगे बढ़ने का अवसर मिला। आइए इस लेख के माध्यम से जानते है कैसे संत रामपाल जी महाराज ने गांव खेड़ी, तहसील महम, रोहतक, के एक जरूरतमंद परिवार के लिए, भगवान बन कर आए।

पाँच साल की जद्दोजहद और दयनीय पारिवारिक स्थिति

संत रामपाल जी महाराज के आदेश से सेवादारों ने घर की स्थिति को समझने के लिए रोहतक के महम तहसील के गांव खेड़ी की कुसुम से मुलाकात की जो पिछले पाँच साल से अपने मायके में रह रही हैं। उनके पति की शराब की लत और उससे होने वाली घरेलू कलह के कारण कुसुम को अपने तीन बच्चों के साथ माता-पिता पर निर्भर होना पड़ा। परिवार में कुल छह सदस्य हैं। सबसे बड़ी बेटी लगभग 14 वर्ष, दूसरी 11 वर्ष और सबसे छोटा बेटा 7 वर्ष का है। यह पांच साल का समय कुसुम और उसके बच्चों के लिए ऐसा था जिसकी कल्पना करने पर भी दुख के अलावा कुछ नहीं हासिल होता।

निःशुल्क पहुंचाई गई अनाज, कपड़े और अन्य जरूरतों की पूरी सूची

संत रामपाल जी महाराज ने इस परिवार को आवश्यक सामग्री देने का निर्देश दिया। उनके मार्गदर्शन के अनुसार कुसुम के परिवार को निम्न सामग्री पहुंचाई गई:

S. No.Item (वस्तु)Quantity (मात्रा)
1अच्छी गुणवत्ता का आटा15 किलो
2चावल5 किलो
3चीनी2 किलो
4मूंग दाल1 किलो
5चना दाल1 किलो
6सरसों का तेल1 लीटर
7अमूल का सूखा दूध1 डब्बा
8नमक1 किलो
9हल्दी1 पैकेट
10जीरा1 पैकेट
11लाल मिर्च1 पैकेट
12मिक्स अचार1 किलो
13चाय पत्ती½ किलो
14आलू5 किलो
15प्याज5 किलो
16नहाने का साबुन4 (चार)
17खादी का कपड़ा धोने वाला साबुन1 पैकेट
18‘घड़ी’ डिटर्जेंट1 पैकेट
19बच्चों के लिए घर पहनने के कपड़े
20स्कूल ड्रेस2 जोड़ी/सेट
21स्कूल के जूते2 जोड़ी

ये सभी वस्तुएँ संत रामपाल जी महाराज ने उपलब्ध कराई।

बच्चों के लिए दो चारपाइयाँ देकर पूरी की गई मुंह मांगी मांग

जब उनके घर में यह पाया गया कि बच्चे जमीन पर सोते है तो लाभार्थी कुसुम और उसके परिवार की मांग को भी संत रामपाल जी महाराज ने पूरा करते हुए उनके लिए दो नई चारपाइयाँ खरीदने का आदेश दिया। कुसुम ने बताया कि यह चीज उनके लिए बहुत आवश्यक थी। यह दर्शाता है कि यह सेवा कार्य केवल भोजन देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस सेवा के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज की निर्देशानुसार यह सुनिश्चित किया जाता है कि लाभार्थी को जीवन निर्वाह करने में किसी भी प्रकार की कोई समस्या न रहे।

कुसुम की भावनाएँ: “ऐसा लगा जैसे भगवान घर आ गए हों”

सारी सामग्री देखकर कुसुम भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि ऐसी सहायता उन्होंने पहले कभी किसी की हुई हो, नहीं देखी और आज मुझे उस दैवीय शक्ति का सीधे लाभ मिलने लग रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें लगा जैसे भगवान खुद संत रामपाल जी महाराज के रूप में उनके घर आ गए हों। कुसुम बहन ने संत रामपाल जी महाराज को ‘जगत का पालनहार’ बताया, क्योंकि उन्होंने बच्चों की एक पिता की तरह चिंता की और माता की तरह आश्रय के लिए आंचल दिया।

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बेटे के पैरों पर खड़े होने तक सहायता करने का आश्वासन

संत रामपाल जी महाराज ने यह स्पष्ट निर्देश दिया है कि सहायता सिर्फ एक बार राशन देकर बंद नहीं होगी। उनके निर्देशानुसार, कुसुम के सबसे छोटे बेटे के अपने पैरों पर खड़े होने और आत्मनिर्भर बनने तक परिवार को नियमित सहायता मिलती रहेगी। उन्हें बताया गया कि राशन खत्म होने से दो दिन पहले, वे सेवादारों को सूचित करें। संत रामपाल जी महाराज की दया से जानकारी मिलते ही समय से पहले उनको राशन पहुंचाया जाएगा।

इंसानियत की सच्ची परिभाषा: अन्नपूर्णा मुहिम

आज कई लोग गरीबी, भुखमरी और असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही अन्नपूर्णा मुहिम का उद्देश्य ऐसे परिवारों तक सीधे सहायता पहुँचाना है जिनके पास भोजन खाने की व्यवस्था और आवश्यक सुविधाएँ नहीं हैं। संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार उनके सेवादार रोहतक के महम तहसील के गाँव खेड़ी पहुँचे, जहाँ एक संघर्षरत परिवार को राहत देने के लिए संत रामपाल जी महाराज के आदेश हुए थे।

लाभार्थी के लिए सख्त और स्पष्ट निर्देश

यह सहायता मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट के माध्यम से दी जा रही है। संत रामपाल जी महाराज ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि लाभार्थी परिवार नशा न करे और मांसाहार या किसी भी अखाद्य वस्तु का सेवन न करे। यदि लाभार्थी परिवार इनमें से किसी भी नियम का उल्लंघन करता हुआ पाया गया तो तत्काल प्रभाव से सहायता बंद कर दी जाएगी। इसका उद्देश्य सात्विक, अनुशासित जीवन और समाज को सुधार के लिए संदेश देना है।

जहाँ उम्मीद खत्म होती है, वहाँ से यह सेवा शुरू होती है

खेड़ी महम की कुसुम का अनुभव दिखाता है कि जहाँ सामान्य व्यवस्था नहीं पहुँचती, वहाँ संत रामपाल जी महाराज अपने द्वारा की गई प्रेरणा से सहायता पहुँचाते हैं। उनके मार्गदर्शन में दी गई सामग्री ने कुसुम के वर्तमान को संभाला और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित किया।

बच्चों के आत्मनिर्भर होने तक सहायता देने की प्रतिबद्धता यह दर्शाती है कि यह मुहिम केवल भोजन देने का नाम नहीं, बल्कि जीवन बदलने का प्रयास है। कुसुम के हृदयस्पर्शी शब्द इसके सच्चे गवाह हैं।

मानवता के लिए संत रामपाल जी महाराज है — सेवा और समर्पण की साक्षात् प्रतिमा

संत रामपाल जी महाराज ने अपने परमार्थ सेवा कार्यों और ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के माध्यम से सेवा का जो अद्वितीय उदाहरण पेश किया है, वह सिद्ध करता है कि वे केवल एक आध्यात्मिक उद्धारकर्ता ही नहीं, बल्कि मानव समाज के सबसे बड़े शुभचिंतक भी हैं। यह पहल साबित करती है कि संत रामपाल जी महाराज ‘जगत पिता’ की भूमिका निभाते हुए, समाज के हर उस आँसू को पोंछने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसे दुनिया ने अनदेखा कर दिया था। और यही वास्तविक में परमपिता परमात्मा की पहचान है।

जिस प्रकार कुसुम जी ने भी माना कि इस सहायता के माध्यम से उनके घर पर भगवान आ गए है, ठीक उसी प्रकार संत रामपाल जी महाराज, कबीर परमात्मा का सच्चा स्वरूप, केवल कुसुम जी ने लिए नहीं, हम सभी के लिए यहां विराजमान है।

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