खेड़ी शीशगरा (हरियाणा): जहाँ आज के दौर में संत और धार्मिक संगठन अक्सर दानियों से सहयोग राशि माँगने के लिए जाने जाते हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा ने एक अभूतपूर्व मिसाल कायम की है। इस मुहिम के तहत संत रामपाल जी महाराज असहाय और ज़रूरतमंद परिवारों को निशुल्क राशन, कपड़े और शिक्षा सामग्री वितरित कर रहें है। हरियाणा के कुरुक्षेत्र ज़िले के खेड़ी शीशगरा गाँव में रहने वाले दिलवीर परिवार के लिए यह सहायता मात्र राशन नहीं, बल्कि सम्मान और जीने की नई उम्मीद लेकर आई है, जो मानवीय सेवा के उच्च आदर्शों को स्थापित करती है।
दयनीय दशा: खस्ताहाल मकान और भूख की मार
खेड़ी शीशगरा के निवासी दिलवीर जी के परिवार की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। परिवार में कुल पाँच सदस्य हैं: स्वयं दिलवीर जी, उनकी पत्नी उषा, दो बेटियाँ और एक 8 वर्षीय बेटा। इस परिवार में कोई भी कमाने वाला सदस्य नहीं था, जिसने उनकी कठिनाइयों को चरम पर पहुँचा दिया था। दिलवीर जी स्वयं शारीरिक रूप से बीमार हैं; उन्होंने बताया कि उनकी “अंतड़ियों में कमी” आ गई है, जिसके कारण वे काम करने में असमर्थ हो गए हैं और उठकर चल भी नहीं पाते, सिवाय शौच तक जाने के।
आर्थिक स्थिति का आलम यह था कि परिवार को अपनी रोज़मर्रा की ज़रूरतों और दवाइयों के लिए भी दूसरों से पैसे माँगने पड़ते थे। दिलवीर जी ने बताया कि उन्हें किसी से ₹100 तो किसी से ₹200 उधार माँग कर गुज़ारा करना पड़ता था। उनकी पत्नी उषा जी ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि वे कई बार एक वक्त भूखे रह जाते थे। बच्चों के खाने की चीज़ें या दूध, चीनी, चायपत्ती जैसी बुनियादी ज़रूरतें भी पूरी करना उनके लिए असंभव था। बच्चों के माँगने पर उन्हें चुप करा देना पड़ता था, क्योंकि घर में पैसे नहीं थे।
भौतिक स्थिति भी उतनी ही ख़राब थी। दिलवीर जी का घर पुरानी कारीगरी का, कड़ियों वाला था, जो अब एक टूटे फूटे खंडहर में बदल चुका था। घर की छत भी कई स्थानों से टूटी हुई थी। घर की यह खस्ताहाल दशा वहाँ रहने वाले सदस्यों के लिए किसी डर से कम नहीं थी, जहाँ वे हर पल असुरक्षा के साये में जी रहे थे। दिलवीर जी के पड़ोसी भी उनकी इस बुरी हालत की पुष्टि करते हैं और बताते हैं कि खाने पीने की चीज़ों के लिए भी वे दूसरों पर निर्भर थे।
‘अन्नपूर्णा मुहिम’ का हस्तक्षेप और मानवता का संदेश
इस गंभीर संकट के बीच, संत रामपाल जी महाराज को इस परिवार की दयनीय दशा की सूचना मिली। उन्होंने अपने शिष्यों की एक टीम ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत सहायता सामग्री लेकर गाँव शीशगरा भेजी। इस मुहिम के तहत उन असहाय और ज़रूरतमंद परिवारों की पहचान की जाती है जिनकी आवाज़ शायद कभी प्रशासन या मुख्यधारा तक नहीं पहुँच पाती।
इस मुहिम का मूल आधार संत रामपाल जी महाराज का वह दर्शन है जो रोटी, कपड़ा, शिक्षा और मकान को हर गरीब का अधिकार मानता है, जैसा कि कबीर भगवान बताते हैं। शिष्यों ने स्पष्ट किया कि यह मुहिम उन लोगों के लिए आशा की किरण है जो कमाने में असमर्थ हैं।
वितरित सामग्री का विस्तृत ब्यौरा
संत रामपाल जी महाराज द्वारा दिलवीर परिवार को जो सामग्री प्रदान की गई, वह उनकी तत्काल और भविष्य की कई ज़रूरतों को पूरा करने वाली थी। एक शिष्य ने सामग्री का विस्तृत ब्यौरा देते हुए बताया कि यह व्यवस्था असहाय लोगों के लिए राशन के साथ साथ सभी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए की गई है।
| S. No. | Item (वस्तु) | Quantity (मात्रा) |
| 1 | आटा | 25 किलोग्राम |
| 2 | चावल | 5 किलोग्राम |
| 3 | चीनी | 5 किलोग्राम |
| 4 | तेल | 2 लीटर |
| 5 | टाटा नमक | 1 पैकेट |
| 6 | चाय पत्ती | 1 पैकेट |
| 7 | अमूल का दूध पाउडर | 1 डब्बा |
| 8 | मूंग दाल | 1 पैकेट |
| 9 | चना दाल | 1 पैकेट |
| 10 | आलू | 5 किलोग्राम |
| 11 | प्याज़ | 5 किलोग्राम |
| 12 | हल्दी | 1 पैकेट |
| 13 | जीरा | 1 पैकेट |
| 14 | लाल मिर्च | 1 पैकेट |
| 15 | अचार | 500 ग्राम |
| 16 | घड़ी सर्फ़ पाउडर | 1 पैकेट |
| 17 | कपड़े धोने का साबुन | 1 पैकेट |
| 18 | नहाने का साबुन | 4 |
| 19 | बच्चों के लिए स्कूल की वर्दी | आवश्यकता अनुसार |
| 20 | स्कूल के जूते | 3 जोड़ी |
| 21 | कॉपियाँ | आवश्यकता अनुसार |
| 22 | पेंसिल | 1 पैकेट |
| 23 | रबर (Eraser) | 1 पैकेट |
| 24 | कटर (Sharpener) | 1 पैकेट |
| 25 | उषा जी के लिए लेडी चप्पलें | आवश्यकता अनुसार |
| 26 | दिलवीर जी के लिए लोअर और टीशर्ट | आवश्यकता अनुसार |
दिलवीर जी ने इस सहायता के लिए संत रामपाल जी महाराज का लाखों लाख धन्यवाद किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जीवन की एक लंबी अवधि बीत गई, पर उन्हें कोई ऐसा संत नहीं मिला जो घर घर जाकर इस तरह की मदद करता हो। उन्होंने स्वीकार किया कि इससे पहले किसी ने भी उनकी कोई मदद नहीं की थी।
भविष्य की सहायता और व्यापक परोपकार
सामग्री वितरण के दौरान, दिलवीर जी की पत्नी उषा जी ने अपनी कुछ अन्य गंभीर समस्याओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उनके पास बिजली का बिल भरने के लिए पैसे नहीं हैं, रसोई गैस सिलेंडर भी लगभग ख़त्म होने वाला है, और उनका मकान भी टूटा हुआ है।
इस पर, शिष्यों ने आश्वासन दिया कि ये समस्याएँ भी जल्दी ही हल की जाएंगी। उन्होंने कहा कि वे संत रामपाल जी महाराज से इस संबंध में प्रार्थना लगाएंगे, और जैसे ही आदेश होगा, परिवार का मकान भी बनवाया जाएगा, बिजली का बिल भी भरा जाएगा और रसोई गैस सिलेंडर भी भरवाकर दिया जाएगा। यह प्रतिबद्धता दर्शाती है कि संत रामपाल जी द्वारा संचालित ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ केवल एक तात्कालिक राहत कार्य नहीं, बल्कि परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें जीवन की बुनियादी सुविधाएँ प्रदान करने का एक स्थायी प्रयास है।
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सेवा की शर्तें और अन्य सामाजिक कार्य
संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित और मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट के अंतर्गत इस मुहिम की एक विशेष शर्त है। यह शर्त यह सुनिश्चित करती है कि लाभार्थियों को केवल भौतिक सहायता ही नहीं, बल्कि एक बेहतर, नैतिक जीवन जीने की दिशा भी मिले।
सहायता प्राप्त करने की अनिवार्य शर्त:
राहत सामग्री केवल उन्हीं ज़रूरतमंद व्यक्तियों को दी जाएगी जो पूर्ण रूप से नशा मुक्त जीवन जीते हैं और मांस अथवा किसी भी प्रकार की अभक्ष्य वस्तुओं का सेवन नहीं करते। यदि कोई लाभार्थी नशा करता है या मांसाहार करता है, तो उसे सामग्री प्राप्त करने से पहले इन बुराइयों को त्यागना अनिवार्य होगा। यदि सामग्री प्राप्त करने के बाद भी कोई लाभार्थी इन बुराइयों का सेवन करते हुए पाया जाता है, तो उसकी सहायता तुरंत प्रभाव से बंद कर दी जाएगी।
संत रामपाल जी महाराज की अन्य मुहिम
- दहेज मुक्त विवाह
- रक्तदान शिविर
- पौधारोपण
- सरकारी स्कूलों के ज़रूरतमंद बच्चों को शिक्षा सामग्री
समाप्ति नहीं, एक नई शुरुआत
दिलवीर परिवार की सहायता और पड़ोसियों के धन्यवाद से यह स्पष्ट होता है कि संत रामपाल जी महाराज, भले ही वे स्वयं जेल में हों, एक पिता के रूप में अपने गरीब बच्चों की देखभाल कर रहे है। शिष्यों ने कहा कि परमात्मा के लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं है और संत जी महाराज भी एक पिता की तरह सभी ज़रूरतमंदों की सुध ले रहे हैं। पड़ोसी ने भी कहा कि उन्होंने आज तक मांगने वाले संत तो बहुत देखे, लेकिन घर घर जाकर ऐसी मदद करने वाला संत केवल संत रामपाल जी महाराज ही हैं। संत रामपाल जी महाराज इस निशुल्क अन्न सेवा अभियान को निरंतर रूप से चलाकर समाज के असहाय लोगों के लिए मसीहा बनकर आए है।


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