उत्तर प्रदेश के जिला शामली के अंतर्गत आने वाले पेलखा गांव में मानवता और सेवा भाव का एक अद्वितीय उदाहरण देखने को मिला है। यहाँ संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य और मार्गदर्शन में चलाई जा रही अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से एक अत्यंत गरीब और जरूरतमंद परिवार को राहत सामग्री पहुंचाई गई। इस मुहिम का मूल उद्देश्य समाज के उन वंचित वर्गों को सहायता प्रदान करना है जो भीषण आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। संत रामपाल जी महाराज का यह प्रयास केवल भोजन उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि उन परिवारों के जीवन में स्थिरता और सुरक्षा की भावना को पुनः स्थापित करना है।
आज की इस रिपोर्ट में हम पेलखा गांव के उस परिवार की व्यथा और संत रामपाल जी महाराज द्वारा किए गए उनके उद्धार की विस्तृत जानकारी साझा करेंगे, जहाँ परिवार की मुखिया एक अकेली महिला हैं और उन पर अपनी बच्चियों के पालन-पोषण की पूरी जिम्मेदारी है।
ग्रामीणों द्वारा सहायता हेतु संत रामपाल जी महाराज से संपर्क करने की प्रक्रिया
पेलखा गांव में राहत वितरण के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि संत रामपाल जी महाराज की यह मुहिम कितनी व्यवस्थित और पारदर्शी है। सहायता प्राप्त करने के लिए प्रक्रिया को अत्यंत सरल बनाया गया है ताकि अशिक्षित या कम पढ़े-लिखे ग्रामीण भी इसका लाभ उठा सकें।
संत रामपाल जी महाराज के आदेश से मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा जरूरतमंद परिवारों की पहचान की जाती है। एक बार जब परिवार को सहायता सूची में शामिल कर लिया जाता है, तो उन्हें एक विशेष कार्ड जारी किया जाता है। इस कार्ड पर आश्रम के संपर्क नंबर अंकित होते हैं। लाभार्थियों को निर्देश दिया जाता है कि जैसे ही उनका राशन समाप्त होने वाला हो, वे दो दिन पूर्व दिए गए नंबरों पर संपर्क करें। सूचना प्राप्त होते ही संत रामपाल जी महाराज के सेवादार तुरंत नया राशन लेकर उनके घर द्वार तक पहुंचते हैं। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि किसी भी गरीब परिवार का चूल्हा एक दिन के लिए भी ठंडा न रहे।
एक विधवा माँ का संघर्ष और संत रामपाल जी महाराज का संबल
पेलखा गांव में संत रामपाल जी महाराज की कृपा जिस परिवार पर हुई, उसकी स्थिति अत्यंत दयनीय थी। परिवार की मुखिया, श्रीमती राजेश, पिछले 8-9 वर्षों से अपने पति के देहांत के बाद अकेले ही घर का कार्यभार संभाल रही हैं। परिवार में कुल तीन सदस्य हैं, जिनमें राजेश जी और उनकी दो बेटियां शामिल हैं। पति की मृत्यु के पश्चात, घर में आय का कोई निश्चित स्रोत नहीं था।
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राजेश जी ने बताया कि वह मेहनत-मजदूरी करके और घर में एक गाय पालकर किसी तरह अपनी बच्चियों का पेट भर रही थीं। उन्होंने भावुक होकर साझा किया कि आज तक किसी ने भी उनकी सुध नहीं ली थी और न ही किसी प्रकार की सरकारी या गैर-सरकारी मदद उन तक पहुंची थी। ऐसे कठिन समय में संत रामपाल जी महाराज उनके लिए एक मसीहा बनकर उभरे हैं। राजेश जी के शब्दों में, संत महाराज जी की कृपा से उनकी बहुत बड़ी परेशानी हल हो गई है। उन्होंने स्वीकार किया कि अब उन्हें राशन की चिंता नहीं है, जिससे वह अपनी बेटियों की शिक्षा और अन्य जरूरतों पर बेहतर ध्यान दे सकेंगी।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई राहत सामग्री का विवरण
संत रामपाल जी महाराज द्वारा उपलब्ध कराई गई राहत सामग्री केवल नाममात्र की नहीं है, बल्कि इसमें एक परिवार की पूरे महीने की जरूरतों का सूक्ष्मता से ध्यान रखा गया है। सेवादार हरि ओम दास जी ने बताया कि यह सामग्री उच्च गुणवत्ता वाली है और इसमें सुबह की चाय से लेकर रात के भोजन तक की हर वस्तु शामिल है। प्रदान की गई सामग्री का विस्तृत विवरण निम्नलिखित तालिका में दिया गया है:
| क्रमांक | सामग्री का नाम | मात्रा/विवरण |
| 1 | आटा | 15 किलोग्राम |
| 2 | चावल | 5 किलोग्राम |
| 3 | आलू | 5 किलोग्राम |
| 4 | प्याज | 5 किलोग्राम |
| 5 | चीनी | 2 किलोग्राम |
| 6 | सरसों का तेल | 1 लीटर |
| 7 | सूखा दूध | 500 ग्राम |
| 8 | मूंग की दाल | 500 ग्राम |
| 9 | चने की दाल | 500 ग्राम |
| 10 | चना | ½ किलो |
| 11 | चाय पत्ती | 250 ग्राम |
| 12 | नमक | 1 किलो |
| 13 | हल्दी | 1 पैकेट |
| 14 | जीरा | 1 पैकेट |
| 15 | लाल मिर्च | 1 पैकेट |
| 16 | मिर्च का अचार | 500 ग्राम |
| 17 | कपड़े धोने का सर्फ | 500 ग्राम |
| 18 | नहाने का साबुन | 4 पीस |
भविष्य की सुरक्षा और सहायता की निरंतरता
संत रामपाल जी महाराज का उद्देश्य केवल एक बार मदद करके छोड़ देना नहीं है, बल्कि “रोटी, कपड़ा, शिक्षा और मकान, हर गरीब को देगा कबीर भगवान” के नारे को चरितार्थ करना है। जैसा कि मौके पर मौजूद सेवादार ने स्पष्ट किया, यह राशन एक महीने के लिए पर्याप्त है। इसके समाप्त होने से पूर्व ही परिवार को पुनः संपर्क करने की सुविधा दी गई है।
राजेश जी को एक परमानेंट कार्ड दिया गया है, जो इस बात का प्रमाण है कि संत रामपाल जी महाराज ने इस परिवार को गोद ले लिया है। अब भविष्य में राशन की कमी होने पर उन्हें केवल एक फोन कॉल करना होगा। यह व्यवस्था दर्शाती है कि संत रामपाल जी महाराज का संगठन किस हद तक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहा है। राजेश जी ने इस सहायता के लिए संत रामपाल जी महाराज का कोटि-कोटि धन्यवाद किया और कहा कि अब उन्हें ऐसा लग रहा है कि कोई तो है जो उनका सहारा बना है।
सहायता प्राप्त करने के लिए अनिवार्य नियम और शर्तें
संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही अन्नपूर्णा मुहिम की एक विशेष और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह सहायता सात्विक जीवन शैली को बढ़ावा देती है। राहत सामग्री प्राप्त करने के लिए कुछ कड़े नियम निर्धारित किए गए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है:
- नशा मुक्ति: लाभार्थी का पूर्ण रूप से नशा मुक्त होना अनिवार्य है। यदि कोई व्यक्ति शराब, बीड़ी, सिगरेट या तंबाकू का सेवन करता है, तो उसे यह सहायता नहीं दी जाएगी।
- शाकाहार: लाभार्थी को मांस, अंडे या किसी भी प्रकार की अभक्ष वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए।
- नियमों का उल्लंघन: यदि सहायता प्राप्त करने के बाद कोई लाभार्थी नशा या मांसाहार करता हुआ पाया जाता है, तो उसकी सहायता तुरंत प्रभाव से बंद कर दी जाएगी।
यह शर्तें समाज में नैतिकता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य भी करती हैं। इसके अतिरिक्त, संत रामपाल जी महाराज द्वारा उन बच्चों को भी सहायता प्रदान की जाती है जो सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं और जिनके पास स्कूल ड्रेस या किताबें खरीदने के पैसे नहीं हैं।
संत रामपाल जी महाराज का परोपकारी व्यक्तित्व और समाज कल्याण के प्रति उनका अद्वितीय समर्पण
जिला शामली के पेलखा गांव की यह घटना सिद्ध करती है कि संत रामपाल जी महाराज केवल एक आध्यात्मिक गुरु ही नहीं, बल्कि मानवता के सच्चे रक्षक भी हैं। जहाँ प्रशासन और समाज के अन्य वर्ग पहुँचने में असमर्थ रहे, वहाँ संत रामपाल जी महाराज ने अपना हाथ बढ़ाया। एक विधवा महिला, जो वर्षों से अंधकार और संघर्ष में जीवन व्यतीत कर रही थी, आज संत जी की कृपा से उसके चेहरे पर मुस्कान है।
संत रामपाल जी महाराज की यह मुहिम न केवल भूख मिटा रही है, बल्कि समाज से नशा और मांसाहार जैसी बुराइयों को दूर कर एक सभ्य समाज का निर्माण भी कर रही है। उनका यह प्रयास, जिसमें जाति-पाति से ऊपर उठकर केवल “इंसानियत” को धर्म माना गया है, वंदनीय है। पेलखा गांव का यह परिवार अब संत रामपाल जी महाराज के संरक्षण में सुरक्षित महसूस कर रहा है। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि वर्तमान समय में संत रामपाल जी महाराज समाज के उत्थान के लिए जो कार्य कर रहे हैं, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है। उनका विशाल हृदय और दूरदर्शी सोच लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।


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