पेलखा (शामली): उ.प्र. के जिला शामली के पेलखा गांव में एक गरीब परिवार की जिंदगी में नई रोशनी आई है। यह वह परिवार है जो पिछले 12 वर्षों से संघर्ष, गरीबी और कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजार रहा था। लेकिन संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत उन्हें जो सहायता प्राप्त हुई, उसने न केवल उनकी भूख की चिंता मिटाई बल्कि उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का हौसला भी दिया। आइए इस लेख में जानते है लाभार्थी परिवार को अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत संत रामपाल जी महाराज द्वारा क्या–क्या लाभ प्रदान किए गए।
टूटी झोपड़ी, टूटी उम्मीदें – पर संघर्ष जारी
तीन सदस्यीय इस परिवार मे परिवार के मुखिया का निधन 12 वर्ष पहले टी.बी. और फेफड़ों की बीमारी के कारण हो गया था। पिता के जाने के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी सबसे छोटे बेटे शिवम पर आ गई। मजबूरी ऐसी कि पढ़ाई छोड़कर कम उम्र में मजदूरी शुरू करनी पड़ी। शिवम की बहन जो कि एक सरकारी स्कूल में पढ़ती है, लेकिन आर्थिक तंगी ने इनके जीवन को कठिन बना दिया था।
घर के नाम पर केवल एक टूटी-फूटी झोपड़ी, लकड़ियों के सहारे टिकी छत जो कई जगहों से टुटी हुई थी जिससे बारिश में पानी घर के अंदर भर जाता, और बाथरूम का भी कोई उचित इंतजाम नहीं था, बाथरूम के स्थान पर केवल एक पानी की पाइप थी।
पड़ोसियों के अनुसार, आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि कई दिन तो परिवार को सब्जी तक नसीब नहीं होती थी। नमक-रोटी खाकर रात काटनी पड़ती थी। हालात इतने खराब थे कि कई बार बारिश की रात पूरा परिवार पानी में बैठकर ही समय बिताता।
लेकिन आज यह परिवार राहत की सांस ले पा रहा है, क्योंकि संत रामपाल जी महाराज की करुणा से अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत इस परिवार तक भोजनसामग्री और आवश्यक वस्तुएं पहुंचाई गईं।
संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम – भूख से लड़ने की अनोखी पहल
पेलखा गांव में पहुंची संत रामपाल जी महाराज जी की अन्नपूर्णा मुहिम की टीम ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज ने आदेश दिया है कि गांव-गांव जाकर ऐसे गरीब और असहाय परिवारों को खोजा जाए, जो वास्तव में सहायता के जरूरतमंद हों। इसी आदेश पर चलते हुए तीन दिन पहले टीम ने गांव में सर्वे किया और शिवम के परिवार को चयनित किया तथा चौथे दिन संत रामपाल जी महाराज के आदेश से मदद उनके घर पंहुचाई गई। यह उल्लेखनीय है कि यह पूरा कार्य केवल और केवल संत रामपाल जी महाराज की करुणा और परमार्थी सोच से ही संभव हुआ है।
परिवार को दी गई राहत सामग्री
संत रामपाल जी महाराज जी की अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत उनके आदेशानुसार परिवार को एक महीने का पूरा राशन प्रदान किया गया। जिसमें शामिल है:-
| क्रम सं | सामग्री | मात्रा |
| 1. | आटा | 15 किलोग्राम |
| 2. | चावल | 5 किलोग्राम |
| 3. | आलू | 5 किलोग्राम |
| 4. | प्याज़ | 5 किलोग्राम |
| 5. | चीनी | 2 किलोग्राम |
| 6. | चायपत्ती | 250 ग्राम |
| 7. | चना दाल | 500 ग्राम |
| 8. | हरी मूंग दाल | 500 ग्राम |
| 9. | पीली मूंग दाल | 500 ग्राम |
| 10. | काला चना | 500 ग्राम |
| 11. | नमक | 1 किलोग्राम |
| 12. | आचार | 500 ग्राम |
| 13. | सरसों तेल | 1 लीटर |
| 14. | हल्दी पाउडर | 150 ग्राम |
| 15. | मिर्च पाउडर | 100 ग्राम |
| 16. | जीरा | 150 ग्राम |
| 17. | सूखा दूध | 500 ग्राम |
| 18. | कपड़ा धोने की साबुन | 5 पीस |
| 19. | नहाने की साबुन | 4 पीस |
| 20. | सर्फ | ½ किलोग्राम |
राशन इतना विस्तृत है कि रसोई की लगभग हर जरूरी आवश्यकता इसमें शामिल है। यह सब संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई गई अन्नपूर्णा मुहिम की ही देन है जिसमें हर छोटी बड़ी वस्तु को पहुंचाने का ख्याल रखा गया है।
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सहायता एक बार की नहीं — हर महीने मिलेगी
संत रामपाल जी महाराज जी की अन्नपूर्णा मुहिम से परिवार को आश्वासन दिया कि यह मदद सिर्फ एक बार की नहीं होगी बल्कि जब तक उनका परिवार आत्मनिर्भर नहीं बन जाता, तब तक उनकी मदद संत रामपाल जी महाराज जी की अन्नपूर्णा मुहिम के तहत की जायेगी। उन्हें एक विशेष कार्ड दिया जाएगा, जिसमें संपर्क सूत्र भी मौजूद होंगे। यदि सामग्री बीच में खत्म हो जाए तो दो दिन पहले फोन करने पर दोबारा तुरंत राहत सामग्री भेज दी जाएगी। इसके अलावा हर महीने की शुरुआत से पहले ही टीम संपर्क कर सामग्री पहुंचा देंगी। यह व्यवस्था भी केवल संत रामपाल जी महाराज की उदारता और इंसानियत भरे दृष्टिकोण का परिणाम है।
गांव के प्रधान ने भी की मुहिम की सराहना
गांव के प्रधान ने भी स्वीकार किया कि परिवार बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन व्यतीत कर रहा था। उनका मानना है —
संत रामपाल जी महाराज ने बहुत बढ़िया स्कीम चलाई है। यह समाज के लिए बहुत बड़ा कदम है। ऐसे गरीब परिवारों को सहारा मिलता है तो यह मानवता के लिए गर्व की बात है।
परिवार और पड़ोसियों की भावुक प्रतिक्रिया
संत रामपाल जी महाराज जी की अन्नपूर्णा मुहिम के तहत शिवम के परिवार को दी गई राहत सामग्री किसी चमत्कार से कम नहीं है क्योंकि जहां दो वक्त की रोटी बहुत मुश्किल से प्राप्त होती हो वहां महीने भर का राशन आ जाना मानो एक चमत्कार ही है जो कि संत रामपाल जी महाराज जी की दया से मुमकिन हुआ। राशन पाकर शिवम की माता जी का कहना था कि– उन्हें अच्छा लग रहा है और उनकी समस्याएँ खत्म हो गईं है। अब वह खुश हैं।
पड़ोसी बहन अनीता ने बताया कि यह परिवार कई बार भूखा सो जाता था। इतना राशन उन्होंने कभी जीवन में एक साथ नहीं देखा था। हर किसी के चेहरे पर खुशी और राहत देखने को मिली, जो संत रामपाल जी महाराज की दया का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत लाभार्थी परिवार के लिए आवश्यक नियम
संत रामपाल जी महाराज ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि—
सहायता उन्हीं जरूरतमंदों को मिलेगी जो
- पूर्ण रूप से नशा मुक्त हों
- मांसाहार न करते हों
यदि कोई लाभ लेने के बाद इन शर्तों का पालन करता नहीं पाया गया, तो उसकी सहायता रोक दी जाएगी। इस नियम का उद्देश्य है कि गरीबों को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से स्वस्थ जीवन मिले।
संत रामपाल जी महाराज है गरीबों के सच्चे मसीहा
आज जब समाज में कई धर्मगुरु मौजूद हैं, लेकिन किसी ने भी भूख मिटाने, गरीबों को सम्मानपूर्वक जीवन देने और उनका भविष्य सुरक्षित करने के लिए इतनी विशाल मुहिम नहीं चलाई।
संत रामपाल जी महाराज जेल में रहते हुए भी, दुनिया भर के गरीबों की मदद कर रहे हैं, यह अपने आप में अनोखा और प्रेरणादायक उदाहरण है। इतने विशाल स्तर पर परोपकार करना, जहां सरकारें पहुंच नहीं पाई, वहां संत जी ने पहुंच कर एक गहरा संदेश समाज के सामने रखा है — समाज में असली परिवर्तन सिर्फ पूर्ण संत के नेतृत्व और उनकी शक्ति से ही मुमकिन है क्योंकि इस महान कार्य के पीछे परमेश्वर कबीर साहेब की सर्वोपरि शक्ति ऊर्जा का श्रोत है।
पेलखा गाँव के इस परिवार की खुशी उनके चेहरे पर दिखी। उनकी आँखों में वह चमक थी जो कई वर्षों बाद लौटी है। संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम ने न केवल उनका पेट भरा, बल्कि उन्हें जीने की नई उम्मीद दी है।


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