मोरथला के बेसहारा परिवार को संत रामपाल जी महाराज से मिला जीवन का सहारा

संत रामपाल जी ने किया मोरथला के बेसहारा परिवार की भूख और बेबसी का स्थाई समाधान

ना जाने कितने ऐसे बच्चे हैं जो आज भी भूखे हैं, जिनकी छोटी-छोटी आंखों में हर दिन उम्मीद की एक किरण टिमटिमाती रहती है। ऐसी ही एक मार्मिक कहानी है हरियाणा के जिला कुरुक्षेत्र के गांव मोरथला में रहने वाले एक गरीब और बेसहारा परिवार की, जिसकी हालत देखकर किसी का भी दिल पसीज जाए।

मदद से पहले परिवार की स्थिति

इस परिवार का घर नाम मात्र का घर था। ऊपर से पुरानी सीमेंट की चादरें और त्रिपाल डालकर जैसे-तैसे छत बनाई गई थी। दीवारें जर्जर थीं और बरसात के दिनों में पानी टपकता रहता था। न घर में नहाने के लिए कोई बाथरूम था और न ही शौच के लिए कोई सुरक्षित व्यवस्था। परिवार खुले में ही अपनी जरूरतें पूरी करने को मजबूर था।

परिवार में छोटे-छोटे बच्चे हैं, लेकिन घर में कोई भी कमाने वाला सदस्य नहीं है। पति की मृत्यु के बाद पूरा परिवार मानो टूट ही गया था। बच्चों का पालन-पोषण, रोज़ का भोजन और बिजली का बिल—सब कुछ एक बड़ी चिंता बन चुका था। कई बार हालात ऐसे हो जाते थे कि बच्चों को यह भी नहीं पता होता था कि अगला भोजन मिलेगा या नहीं।

मां ने बताया कि उनका गुजारा गांव और गलियों के सहारे चल रहा था। कभी कोई थोड़ी मदद कर देता, कभी कहीं से थोड़ा अनाज मिल जाता। लेकिन यह सब अस्थायी था। पड़ोसियों के ताने, समाज की उपेक्षा और बच्चों की भूख—इन सबके बीच यह परिवार किसी तरह दिन काट रहा था। यह केवल गरीबी नहीं थी, बल्कि सम्मान और आत्मविश्वास के टूटने की कहानी थी।

संत रामपाल जी महाराज बने सहारा

इसी अंधेरे और निराशा के बीच संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से इस परिवार की सहायता की। जब परिवार की दयनीय स्थिति उनके संज्ञान में लाई गई, तो संत रामपाल जी महाराज के निर्देश पर उनके शिष्य गांव मोरथला पहुंचे और पूरे सम्मान के साथ परिवार तक आवश्यक सहायता पहुंचाई गई।

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उस दिन इस घर में केवल राशन नहीं आया, बल्कि यह भरोसा भी आया कि अब बच्चों को भूखे पेट सोना नहीं पड़ेगा।

संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सहायता सामग्री

संत रामपाल जी महाराज द्वारा इस परिवार को रोज़मर्रा के जीवन के लिए आवश्यक पूरी रसोई सामग्री निशुल्क प्रदान की गई, ताकि उनका जीवन फिर से पटरी पर आ सके।

क्रमांकसामग्री का नाममात्रा
1आटा20 किलोग्राम
2चावल5 किलोग्राम
3आलू5 किलोग्राम
4प्याज5 किलोग्राम
5चीनी2 किलोग्राम
6चना दाल1 किलोग्राम
7मूंग दाल1 किलोग्राम
8सरसों का तेल1 लीटर
9सूखा दूध1 किलोग्राम
10चाय पत्ती1 पैकेट
11नमक1 पैकेट
12मसाले (हल्दी, मिर्च)पूरा पैकेट
13नहाने का साबुन4 टिकिया
14कपड़े धोने का साबुन1 पैकेट
15कपड़े धोने का पाउडर1 पैकेट

यह सामग्री इतनी पर्याप्त थी कि परिवार की सबसे बड़ी समस्या—भोजन—पूरी तरह समाप्त हो गई। अब घर में अनाज मौजूद था, रसोई चल रही थी और मां के चेहरे से वह डर हट चुका था, जो खाली बर्तनों को देखकर हर दिन सताता था।

परिवार की भावनाएं

परिवार की मां ने बताया कि पहले हालात इतने खराब थे कि कई बार बच्चों को पड़ोसियों के यहां छोड़ना पड़ता था। बच्चों की आंखों में भूख देखकर मन टूट जाता था। लेकिन अब घर में राशन देखकर उन्हें सुकून मिलता है। उन्होंने कहा कि संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई यह सहायता केवल खाने की नहीं है, बल्कि उस भरोसे की है, जिससे इंसान फिर से खड़ा हो पाता है।

पड़ोसियों की प्रतिक्रिया

गांव के लोगों ने भी माना कि पति की मृत्यु के बाद यह परिवार पूरी तरह टूट चुका था। अब संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम से मिली सहायता के बाद साफ फर्क दिखाई दे रहा है। बच्चों के चेहरे पर डर की जगह संतोष नजर आने लगा है और घर में अब खालीपन नहीं दिखता।

अन्नपूर्णा मुहिम का वास्तविक असर

संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित अन्नपूर्णा मुहिम ने इस परिवार की समस्या को केवल अस्थायी रूप से नहीं, बल्कि मूल रूप से हल करने का प्रयास किया है। भोजन की स्थायी व्यवस्था होने से इस परिवार को एक मजबूत आधार मिला है। अब यह परिवार हर दिन भूख की चिंता में नहीं जीता।

यह कहानी केवल मोरथला के एक परिवार की नहीं है, बल्कि उन अनगिनत परिवारों की तस्वीर है, जिनके जीवन में संत रामपाल जी महाराज अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से सहारा, सम्मान और सुरक्षा लेकर पहुंच रहे हैं। यह उदाहरण दिखाता है कि जब सहायता सही समय पर और सही भावना से दी जाती है, तो वह किसी परिवार की पूरी जिंदगी बदल सकती है।

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