साण्डिया, पाली

साण्डिया, पाली: लकवाग्रस्त पिता की लाचारी और बेटियों की छूटी पढ़ाई पर संबल बनकर आए संत रामपाल जी महाराज

पाली (राजस्थान): गरीबी केवल धन का अभाव नहीं होती, बल्कि यह एक ऐसा संघर्ष है जो इंसान को पल-पल तोड़ता है। जब घर का एकमात्र कमाने वाला मुखिया बिस्तर पर लाचार हो जाए, तो उस परिवार पर क्या गुजरती है, इसकी कल्पना करना भी कठिन है। राजस्थान के पाली जिले के साण्डिया गांव में एक ऐसे ही परिवार की व्यथा को संत रामपाल जी महाराज ने न केवल सुना, बल्कि उनके जीवन में खुशियों का नया सवेरा भी किया।

टूटी छत और बिखरते सपने: एक परिवार का संघर्ष

साण्डिया गांव का यह परिवार अत्यंत दयनीय स्थिति में जीवन यापन कर रहा था। इस घर के मुखिया, नंदाराम जी, पिछले दो-ढाई वर्षों से लकवे (Paralysis) के कारण बिस्तर पर हैं। जो पिता कभी परिवार का सहारा था, आज वह न चल सकता है और न ही स्पष्ट बोल पाता है।

घर की स्थिति यह है कि कमाने की जिम्मेदारी अब पूरी तरह नंदाराम जी की पत्नी पर आ गई है, जो नरेगा (MGNREGA) और मजदूरी करके किसी तरह परिवार का पेट पालने की कोशिश कर रही हैं। परिवार में नंदाराम जी, उनकी पत्नी, उनकी वृद्ध माता जी और तीन बच्चे (दो बेटियां और एक छोटा बेटा) हैं।

आर्थिक तंगी का सबसे क्रूर असर बच्चों पर पड़ा। नंदाराम जी की दोनों बेटियों, चंदा और हेमलता, को फीस न भर पाने के कारण अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी। जिस उम्र में इन बच्चियों के हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, उस उम्र में वे अपनी मां की बेबसी को देख रही थीं। घर की छत भी इतनी जर्जर है कि बारिश और आंधी में परिवार का सुरक्षित रहना मुश्किल हो जाता है।

संत रामपाल जी महाराज बने तारणहार

जब इस परिवार की पीड़ा संत रामपाल जी महाराज तक पहुंची, तो उन्होंने तत्काल उन्हें मदद पहुचाने का आदेश दिया। संत रामपाल जी महाराज का संकल्प है “रोटी, कपड़ा, चिकित्सा, शिक्षा और मकान, हर गरीब को देगा कबीर भगवान।”

संत रामपाल जी महाराज ने इस परिवार को न केवल राशन दिया, बल्कि बच्चियों के टूटे हुए सपनों को फिर से जोड़ने का बीड़ा उठाया।

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राहत सामग्री: गुणवत्ता और सम्मान के साथ

संत रामपाल जी महाराज द्वारा भिजवाई गई सामग्री में केवल पेट भरने का सामान नहीं, बल्कि एक परिवार की संपूर्ण गृहस्थी की चिंता झलकती है। उन्होंने उच्च गुणवत्ता वाली निम्नलिखित सामग्री परिवार को प्रदान की:

श्रेणीसामग्री विवरण
खाद्य सामग्री25 किलो आटा, 5 किलो चावल, 4 किलो चीनी, 2 लीटर सोयाबीन तेल
दालें व मसाले1 किलो चना दाल, 1 किलो पीली मूंग दाल, 1 किलो हरी मूंग दाल, हल्दी, जीरा, मिर्च, टाटा नमक
विशेष आहार2 किलो अमूल मिल्क पाउडर, अचार, 5 किलो प्याज, 5 किलो आलू, चाय पत्ती
स्वच्छतानहाने के 4 साबुन, कपड़े धोने का 1 किलो साबुन, सर्फ
वस्त्रनंदाराम जी के लिए कुर्ता-पजामा, बच्चों के लिए घर के कपड़े

शिक्षा का उपहार: फिर से स्कूल जाएंगी बेटियां

संत रामपाल जी महाराज का उद्देश्य केवल भूख मिटाना नहीं, बल्कि भविष्य संवारना है। उन्होंने चंदा और हेमलता की पढ़ाई फिर से शुरू करवाने के लिए पूरा प्रबंध किया।

  • स्कूली सामग्री: दोनों बहनों के लिए नई स्कूल ड्रेस, स्कूल बैग, जूते-मोजे और कॉपियां।
  •  फीस और दाखिला: संत रामपाल जी महाराज ने बच्चियों की स्कूल फीस भरने और उनका दाखिला करवाने का जिम्मा उठाया।

राहत सामग्री और स्कूल का सामान पाकर बच्चियों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई। चंदा ने कहा, “पापा की बीमारी के कारण मेरी पढ़ाई छूट गई थी, लेकिन अब संत रामपाल जी महाराज की दया से मैं फिर स्कूल जा सकूंगी। उनका बहुत-बहुत धन्यवाद।”

ग्रामीणों और सरपंच की प्रतिक्रिया: “कलयुग में सतयुग की शुरुआत”

गांव के सरपंच मानक चंद जी और पूर्व सरपंच प्रतिनिधि कपिल देव वैष्णव जी ने इस मुहिम को मानवता की मिसाल बताया।

  • सरपंच मानक चंद जी ने कहा, “यह बहुत बड़ी बात है कि संत रामपाल जी महाराज न केवल आज मदद कर रहे हैं, बल्कि उन्होंने भविष्य की चिंता भी खत्म कर दी है। ऐसा कार्य करने वालों को हम प्रणाम करते हैं।”
  • कपिल देव वैष्णव जी ने कहा, “यह कलयुग में सतयुग की शुरुआत है। रोटी, कपड़ा और शिक्षा, संत रामपाल जी महाराज बिना किसी स्वार्थ के यह सब दे रहे हैं। यह इस गरीब परिवार के लिए वरदान साबित होगा।”

भविष्य की सुरक्षा और आजीवन सहयोग

संत रामपाल जी महाराज ने इस मदद को केवल एक दिन तक सीमित नहीं रखा। परिवार को आश्वस्त किया गया है कि:

  • मासिक राशन: जब तक बच्चे पैरों पर खड़े नहीं हो जाते, संत रामपाल जी महाराज हर महीने राशन भेजेंगे। परिवार को एक कार्ड दिया गया है, जिस पर फोन करके वे सामग्री मंगवा सकते हैं।
  • अन्य जरूरतें: परिवार की मांग पर संत रामपाल जी महाराज द्वारा जल्द ही गैस कनेक्शन और टूटी छत की मरम्मत की व्यवस्था भी की जाएगी।

एक नए जीवन की शुरूआत 

साण्डिया गांव का यह परिवार, जो कल तक अंधेरे में था, आज संत रामपाल जी महाराज की कृपा से उम्मीद की रोशनी में है। संत रामपाल जी महाराज ने सिद्ध कर दिया है कि सच्ची भक्ति वही है जो दीन-दुखियों के काम आए।

संत रामपाल जी महाराज न केवल भूखे को भोजन दे रहे हैं, बल्कि दहेज मुक्त विवाह, रक्तदान शिविर, वृक्षारोपण और नशामुक्ति जैसे अनेक समाज सुधार के कार्य भी कर रहे हैं।

संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा चलाई जा रही यह ‘अन्नपूर्णा मुहिम‘ पूर्णतः निःशुल्क है। यह सहायता केवल उन परिवारों को दी जाती है जो नशामुक्त हैं और मांस-मदिरा का सेवन नहीं करते।

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