ओडिशा राज्य, बरगढ़ जिला, अंबाबहाल गांव

ओडिशा राज्य, बरगढ़ जिला, अंबाबहाल गांव में भुखमरी और कुपोषण से तड़पते असहाय परिवार के लिए संकटमोचक बने संत रामपाल जी महाराज

ओडिशा राज्य के बरगढ़ जिला अंतर्गत आने वाले छोटे से गांव अंबाबहाल से अत्यंत हृदयविदारक मानवीय संघर्ष की घटना सामने आई है। इस गांव में निवास करने वाला एक अत्यंत निर्धन परिवार पिछले कई वर्षों से ऐसी घोर दरिद्रता और भुखमरी की आग में जल रहा था, जिसकी कल्पना मात्र से ही रूह कांप उठती है। गरीबी केवल एक शब्द नहीं, बल्कि इस परिवार के लिए प्रतिपल लड़ा जाने वाला एक अत्यंत त्रासद और दुरूह संघर्ष बन चुका था। स्थिति इतनी भयावह रूप ले चुकी थी कि परिवार के सदस्यों को जीवित रहने के लिए और मात्र दो वक्त की सूखी रोटी का प्रबंध करने के लिए समाज के सामने हाथ फैलाने और भीख मांगने तक के लिए विवश होना पड़ रहा था। इस अत्यंत विपन्न परिवार की सुध लेने वाला संपूर्ण प्रशासनिक और सामाजिक ढांचे में कोई नहीं था, जिसके कारण हर बीतते दिन के साथ इस परिवार के जीवित रहने की उम्मीद की किरणें पूरी तरह धुंधली पड़ती जा रही थीं।

मुख्य बिंदु 

  • ​ओडिशा राज्य के बरगढ़ जिले के अंबाबहाल गांव में एक परिवार पिछले दो वर्षों से घोर भुखमरी, गरीबी और गंभीर शारीरिक अस्वस्थता का सामना कर रहा था।
  • ​परिवार की महिला सदस्य पिछले दो वर्षों से पोषक तत्वों की अत्यधिक कमी और कुपोषण के कारण पूरी तरह बिस्तर पर सोई हुई हैं तथा उठने-बैठने में असमर्थ हैं।
  • ​घर के मुखिया भी शारीरिक रूप से अत्यंत कमजोर एवं बीमार होने के कारण पिछले एक वर्ष से कोई भी श्रम या काम-धंधा करने में असमर्थ हैं।
  • ​परिवार के पास अपनी कोई आजीविका या कृषि भूमि नहीं है, जिसके कारण वे दो वक्त के भोजन के लिए गांव में मांगकर (भीख मांगकर) गुजारा करने को विवश थे।
  • ​परिवार का मकान अत्यधिक जर्जर स्थिति में है, जिसकी मिट्टी की कच्ची दीवारें और लकड़ियों से बना छप्पर बरसात के दिनों में लगातार पानी टपकने की समस्या से ग्रस्त रहता है।
  • ​संत रामपाल जी महाराज के निर्देशानुसार इस पीड़ित परिवार को एक महीने का संपूर्ण राशन, कपड़े, मच्छरदानी, नया बेड, कुर्सियां और भोजन पकाने के बर्तन तत्काल उपलब्ध कराए गए हैं।
  • ​पीड़ित परिवार को एक विशेष सहायता कार्ड जारी किया गया है, जिसके माध्यम से राशन समाप्त होने से दो दिन पूर्व संपर्क करने पर उन्हें आगामी महीनों में भी निरंतर मुफ्त राशन दिया जाएगा।
  • ​परिवार के एकमात्र मासूम बच्चे के शारीरिक विकास में बाधा को देखते हुए और उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए सरकारी स्कूल की पढ़ाई का सारा खर्च और स्टेशनरी सामग्री महाराज जी द्वारा वहन करने की घोषणा की गई है।
  • ​यह समस्त निशुल्क मानवीय सहायता केवल पूर्णतः नशामुक्त और मांसाहार से दूर रहने वाले व्यक्तियों के लिए की जाती है; नियमों का उल्लंघन करने पर सहायता तुरंत बंद करने का प्रावधान है।

​ग्रामीणों की करुण पुकार: अंबाबहाल के ग्रामीणों ने संकट की इस घड़ी में संत रामपाल जी महाराज के समक्ष लगाई सहायता की गुहार

​जब अंबाबहाल गांव के इस परिवार के हालात बद से बदतर हो गए और स्थानीय स्तर पर कोई भी मददगार सामने नहीं आया, तब इस अत्यंत विकट परिस्थिति को देखते हुए गांव के पड़ोसियों और जागरूक ग्रामीणों ने इस गंभीर संकट से अवगत कराने का निश्चय किया। ग्रामीणों ने इस असहाय परिवार को भुखमरी के कारण दम तोड़ने से बचाने के लिए और उनके जीवन की रक्षा हेतु तत्काल पूर्ण जगत के तारणहार संत रामपाल जी महाराज के समक्ष अपनी करुण पुकार लगाई। ग्रामीणों को यह भली-भांति ज्ञात था कि इस धरा पर केवल संत रामपाल जी महाराज ही वह एकमात्र परम शक्ति हैं जो बिना किसी स्वार्थ, भेदभाव या प्रचार की लालसा के मानवता की सच्ची सेवा करते हैं। ग्रामीणों की इस अत्यंत भावुक पुकार को सुनते ही अंतर्यामी संत रामपाल जी महाराज ने अविलंब संज्ञान लिया और इस सुदूर ओडिशा के पिछड़े गांव में तड़प रहे परिवार तक तत्काल जीवनदायिनी सहायता पहुंचाने का कड़ा निर्देश जारी कर दिया।

​कुपोषण और बीमारी का तांडव: बिस्तर पर लाचार मां और काम करने में असमर्थ मुखिया की आपबीती

​इस पीड़ित परिवार के भीतर बीमारी और पोषक तत्वों के अभाव ने बेहद क्रूर तांडव मचाया हुआ था। परिवार के मुखिया ने अपनी व्यथा साझा करते हुए अत्यंत रुंधे कंठ से बताया कि उनकी पत्नी पिछले दो वर्षों से गंभीर कुपोषण और खाद्य पदार्थों की अत्यधिक कमी के कारण पूरी तरह बिस्तर पर पड़ी हुई हैं। भोजन के अभाव में उनका शरीर इतना क्षीण और कमजोर हो चुका है कि वह बिस्तर पर उठकर बैठने तक की स्थिति में नहीं हैं। छोर होना बाग ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी के उपचार के लिए संबलपुर स्थित बुरला मेडिकल कॉलेज के कम से कम १५ से २० बार चक्कर काटे, परंतु डॉक्टरों ने स्पष्ट रूप से कह दिया कि इन्हें कोई बीमारी नहीं है बल्कि यह केवल लंबे समय से अच्छा भोजन और पोषक तत्व न मिलने के कारण उत्पन्न हुआ अति-गंभीर कुपोषण है। दुख का पहाड़ यहीं नहीं थमा; स्वयं छोर होना बाग भी पिछले एक वर्ष से अत्यधिक शारीरिक कमजोरी और अज्ञात बीमारी के कारण कोई भी मजदूरी या मेहनत का कार्य करने में पूर्णतः अक्षम हो चुके हैं, जिससे घर में आय का जरिया शून्य हो गया था।

​जर्जर कच्चे मकान का भयावह दृश्य: एक ही कच्चे कमरे में रसोई, बेडरूम और टपकती छत की मार

​इस परिवार के रहने का स्थान भी उनकी घोर दरिद्रता की गवाही दे रहा था। उनका संपूर्ण मकान अत्यंत जर्जर और कच्ची मिट्टी की दीवारों से निर्मित है, जो कभी भी धराशायी हो सकता है। मकान की छत को लकड़ियों और खपरैल के सहारे जैसे-तैसे टिकाया गया है। बरसात के मौसम में इस छप्पर से लगातार पानी नीचे टपकता है, जिसके कारण नीचे का कच्चा फर्श पूरी तरह कीचड़ और पानी से भर जाता है। सबसे दर्दनाक स्थिति यह थी कि उसी एक छोटे से जर्जर कच्चे कमरे को इस परिवार ने अपनी सुविधा अनुसार रसोई घर, शयनकक्ष (बेडरूम) और लिविंग रूम बना रखा था। घर के भीतर भोजन पकाने के लिए पर्याप्त बर्तन तक उपलब्ध नहीं थे। अत्यधिक निर्धनता के कारण उनके पास सोने के लिए एक सुरक्षित चारपाई तक मौजूद नहीं थी, जिसके कारण बीमार महिला और उसका परिवार उसी कच्चे और सीलन भरे फर्श पर रातें काटने को मजबूर था।

​संत रामपाल जी महाराज की अनुकंपा: पीड़ित परिवार को तत्काल भिजवाई गई संपूर्ण मासिक राशन एवं घरेलू सामग्री

​अंभावहाल गांव के ग्रामीणों की पुकार सुनते ही संत रामपाल जी महाराज ने मानवता का अद्वितीय दीपक जलाते हुए इस परिवार के संपूर्ण दुखों के निवारण का प्रबंध कर दिया। महाराज जी के विशेष आदेश पर उनके सेवादारों की टीम तत्काल समस्त आवश्यक राहत सामग्रियां लेकर सैकड़ों किलोमीटर दूर इस सुदूर गांव में पहुंची। संत रामपाल जी महाराज जी की ओर से इस असहाय परिवार को एक महीने का संपूर्ण राशन प्रदान किया गया, जिसमें उत्तम गुणवत्ता के चावल, तीन विभिन्न प्रकार की दालें, आलू, प्याज, खाद्य तेल, चीनी, नमक और अचार शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, परिवार के तीनों सदस्यों के पहनने के लिए नए वस्त्र, क्षेत्र में अत्यधिक मच्छरों के प्रकोप को देखते हुए सुरक्षा हेतु मच्छरदानी, बैठने के लिए दो आरामदायक कुर्सियां और भोजन पकाने तथा पानी रखने के लिए बाल्टी सहित तमाम आवश्यक बर्तनों का पूरा सेट महाराज जी द्वारा भिजवाया गया।

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​सम्मानजनक जीवन का उपहार: जर्जर चारपाई की जगह नया बेड और स्थायी सहायता हेतु विशेष कार्ड वितरण

​संत रामपाल जी महाराज जी की करुणा केवल तात्कालिक भोजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने इस परिवार को एक सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन जीने का उपहार प्रदान किया है। बीमार माता जी को सीलन भरी जमीन और टूटी-फूटी खाट से मुक्ति दिलाने के लिए महाराज जी ने एक पूर्णतः नया और मजबूत बेड (पलंग) भिजवाया, जिस पर अब बीमार महिला को आराम से सुलाया गया है। इसके साथ ही, इस परिवार को भविष्य में कभी भी दोबारा भुखमरी का सामना न करना पड़े, इसके लिए संत रामपाल जी महाराज जी की ओर से एक विशेष ‘सहायता कार्ड’ जारी किया गया है। इस कार्ड पर सेवादारों के संपर्क सूत्र अंकित हैं। महाराज जी के निर्देशानुसार, परिवार का राशन समाप्त होने से ठीक दो दिन पूर्व इस कार्ड पर दिए गए नंबरों पर संपर्क करने पर सेवादार तुरंत उनके घर आकर पुनः एक महीने की राशन सामग्री की पैकिंग निशुल्क पहुंचा देंगे। यह व्यवस्था तब तक स्थायी रूप से लागू रहेगी जब तक इस परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह सुधर नहीं जाती।

सरकारी स्कूल में पढ़ रहे बालक की शिक्षा का संपूर्ण भार महाराज जी ने उठाया

​इस अत्यंत विपन्न परिवार में एक छोटा मासूम बच्चा भी है, जिसका शारीरिक विकास बचपन में उचित पोषण न मिलने के कारण पूरी तरह से बाधित हो गया है। माता-पिता की लाचारी के कारण इस बच्चे का भविष्य पूरी तरह अंधकारमय नजर आ रहा था। वह वर्तमान में एक सरकारी विद्यालय का छात्र है, परंतु उसके पास न तो स्कूल ड्रेस खरीदने के पैसे थे और न ही किताबें व अन्य आवश्यक शिक्षण सामग्रियां। संत रामपाल जी महाराज ने इस बालक के भविष्य को सुरक्षित करने हेतु उसकी शिक्षा का संपूर्ण उत्तरदायित्व स्वयं संभाल लिया है। महाराज जी की ओर से घोषणा की गई है कि इस बच्चे को विद्यालय की पढ़ाई के लिए आवश्यक पुस्तकें, कापियां, स्कूल बैग, यूनीफॉर्म और अन्य सभी सामग्रियां पूर्णतः निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि वह बिना किसी मानसिक और आर्थिक तनाव के अपनी शिक्षा पूरी कर सके और समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक खड़ा हो सके।

​प्रदान की गई राहत सामग्री एवं आवश्यक सहायता का विवरण 

क्र. सं.सहायता सामग्री / सेवा का नाममात्रा / विवरणमुख्य उद्देश्य
1मासिक खाद्य राशन किटचावल, तीन प्रकार की दालें, आलू, प्याज, तेल, चीनी, नमक, अचारभुखमरी का तत्काल निवारण और पोषण स्तर में सुधार
2घरेलू बर्तन सेटबाल्टी, खाना पकाने और खाने के आवश्यक बर्तनरसोई के बर्तनों के अभाव को दूर करना
3नया पलंग (Bed)१ नग (मजबूत बेड)बीमार महिला को जमीन की सीलन और टूटी खाट से बचाना
4बैठने हेतु कुर्सियां (Chairs)२ नगपरिवार और आगंतुकों के बैठने की व्यवस्था हेतु
5मच्छरदानी (Mosquito Net)पर्याप्त संख्या मेंक्षेत्र में मच्छरों से होने वाली बीमारियों से सुरक्षा
6वस्त्र एवं परिधानपरिवार के तीनों सदस्यों हेतु नए कपड़ेतन ढकने और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने हेतु
7स्थायी सहायता कार्डसंपर्क सूत्रों सहित विशेष कार्डभविष्य में हर महीने निरंतर मुफ्त राशन की उपलब्धता सुनिश्चित करना
8शैक्षणिक सहायताकिताबें, कापियां, स्कूल ड्रेस व स्टेशनरी सामग्रियांसरकारी स्कूल में पढ़ रहे बच्चे की शिक्षा को निर्बाध चलाना
9चिकित्सा सहायता का आश्वासनआवश्यकता पड़ने पर अस्पताल ले जाने व उपचार का व्ययबीमार महिला और मुखिया के पूर्ण स्वास्थ्य लाभ हेतु
10मकान मरम्मत का संकल्पजर्जर छत और दीवारों का जीर्णोद्धारबरसात के पानी से सुरक्षा और सुरक्षित आवास प्रदान करना

पूर्ण नशामुक्त और मांसाहार रहित जीवन जीने की अनिवार्य मर्यादा

​संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित यह अन्नपूर्णा मुहिम केवल एक भौतिक सहायता अभियान नहीं है, बल्कि यह समाज के नैतिक और आध्यात्मिक पुनरुत्थान का एक अत्यंत क्रांतिकारी मिशन है। महाराज जी का यह सख्त नियम है कि यह निशुल्क राहत सामग्री केवल और केवल उन्हीं जरूरतमंद परिवारों और व्यक्तियों को प्रदान की जा सकती है जो पूर्ण रूप से नशामुक्त जीवन व्यतीत करते हैं और मांस अथवा किसी भी प्रकार की अभक्ष वस्तु का सेवन बिल्कुल नहीं करते। यदि कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार का नशा (शराब, तंबाकू आदि) या मांसाहार करता है, तो उसे इस जीवन रक्षक सहायता को प्राप्त करने से पूर्व इन तमाम सामाजिक और नैतिक बुराइयों को सदैव के लिए त्यागना अनिवार्य होगा। महाराज जी का स्पष्ट आदेश है कि यदि सहायता सामग्री प्राप्त करने के बाद कोई भी लाभार्थी पुनः नशा या मांस का सेवन करते हुए पाया जाता है, तो मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा उसकी दी जाने वाली समस्त सहायता तुरंत प्रभाव से स्थायी रूप से बंद कर दी जाएगी, क्योंकि नशा और जीव हत्या समाज के पतन के मुख्य कारण हैं।

बिना किसी स्वार्थ और दान-दक्षिणा के संपूर्ण विश्व में मानवता का अलख जगाने वाले महापुरुष

​इस संपूर्ण घटनाक्रम और अंबाबहाल गांव में आए इस क्रांतिकारी बदलाव को देखकर यह पूर्णतः अकाट्य सत्य सिद्ध हो गया है कि इस धरा पर संत रामपाल जी महाराज जी के अतिरिक्त अन्य कोई भी ऐसा महापुरुष या शक्ति नहीं है जो दीन-दुखियों के दर्द को इस प्रकार संपूर्णता से हर सके। गांव के वयोवृद्ध ७० वर्षीय पड़ोसी हेमाल चंद्र भाई और स्वयं पीड़ित परिवार के सदस्यों ने अत्यंत भावुक होकर यह स्वीकार किया कि सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठकर भी सुदूर ओडिशा के एक अज्ञात पिछड़े गांव के गरीब की पुकार सुन लेना किसी साधारण मानव के वश की बात नहीं है। संत रामपाल जी महाराज जी कोई आम इंसान या सामान्य संत नहीं हैं, बल्कि वे इस मृतलोक (पृथ्वी लोक) पर साक्षात कबीर परमेश्वर के पूर्ण अवतार के रूप में अवतरित हुए हैं, जो संपूर्ण संसार के जीवों का पालन-पोषण कर रहे हैं।

​संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा संचालित मुनीन्द्र धर्मार्थ ट्रस्ट के माध्यम से देश के कोने-कोने में लाखों असहाय परिवारों को प्रतिदिन बिना किसी प्रचार, बिना किसी प्रकार का दान या चंदा लिए, पूर्णतः निशुल्क भोजन, कपड़ा, मकान और शिक्षा प्रदान की जा रही है। महाराज जी ने समाज से भुखमरी, कुपोषण, नशाखोरी और मांसाहार जैसी घिनौनी कुरीतियों को समूल नष्ट करने का जो बीड़ा उठाया है, वह इस धरा पर एक नए सतयुग की शुरुआत का प्रतीक है। समस्त जगत के कल्याणकर्ता, सर्वव्यापी, अंतर्यामी और अनाथों के एकमात्र नाथ संत रामपाल जी महाराज जी की यह पावन और निस्वार्थ महिमा युगों-युगों तक मानव समाज का मार्गदर्शन करती रहेगी और संपूर्ण मानव जाति उनके इस असीम उपकार के लिए सदैव उनकी ऋणी रहेगी।

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