डीघल गाँव, जिला झज्जर (हरियाणा) — सतगुरु संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित अन्नपूर्णा मुहिम मानवता की सच्ची सेवा का उदाहरण बन चुकी है। हाल ही में, झज्जर के डीघल गाँव में संत रामपाल जी महाराज ने निःस्वार्थ भाव से एक असहाय परिवार तक राशन पहुँचाया। यह अभियान आज के कठिन दौर में जरूरतमंदों के लिए संजीवनी सिद्ध हो रहा है।
कई वर्षों से रोगग्रस्त मुखिया की बेबसी
डीघल गाँव के पाना मल्यान क्षेत्र में एक परिवार ऐसा है जिसका मुखिया वर्षों से गंभीर बीमारी से ग्रस्त है। नसों के अवरुद्ध होने की वजह से वह चलने-फिरने में असमर्थ है। स्थानीय लोगों के अनुसार, उन्हें पेशाब व शौच के लिए भी दूसरों की मदद लेनी पड़ती है। इस कारण परिवार पर आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का भारी बोझ पड़ा हुआ है। परिवार का दूसरा भाई दिहाड़ी मजदूरी करता है, लेकिन शराब की लत में फँसा होने के कारण घर की स्थिति को संभालने में अक्षम है।
संत रामपाल जी महाराज की अनोखी पहल
ऐसे विकट हालात में संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम इस परिवार के लिए वरदान बनकर आई। अन्नपूर्णा मुहिम के तहत परिवार वालों को एक महीने का राशन व घरेलू दैनिक उपयोग का सभी जरूरी सामान उपलब्ध कराया गया जिसमें निम्न सामग्री दी गई
(1) आटा – 25kg
(2) चावल – 5kg
(3) चीनी – 2kg
(4) सरसों तेल – 1ltr
(5) मूंग दाल – 1kg
(6) चना दाल – 1kg
(7) हल्दी – 150gm
(8) जीरा – 150gm
(9) लाल मिर्च – 100gm
(10) नहाने का साबुन – 4 पीस
(11) कपड़े धोने का साबुन 1 kg
(12) टाटा नमक 1 kg
(13) टाटा चाय 1/4
(14) सूखा दूध।
(15) 5 kg आलू
(16) 5 kg प्याज
(17) अचार
(18) सर्फ
जाति-पांति से परे भाईचारे का संदेश
डीघल गाँव के लोगों ने इस सेवा को देखकर विशेष रूप से इस बात की प्रशंसा की कि संत रामपाल जी महाराज की यह मुहिम जाति-पांति के भेदभाव से बिल्कुल परे है। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “जाति पांति कुछ भी नहीं, खून सबका एक है। भाईचारा ही सबसे बड़ी चीज है।” उन्होंने यह भी बताया कि गुरुजी की शिक्षाओं के कारण गाँव में लोग एक-दूसरे की मदद बिना किसी भेदभाव के कर रहे हैं।
घर निर्माण की भी अनूठी योजना
सेवा केवल राशन तक सीमित नहीं है। सेवादारों ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज द्वारा गाँव बरहाना में एक गरीब परिवार का मकान भी बनाया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सतलोक आश्रम की मुहिम भोजन देने तक सीमित नहीं बल्कि जरूरतमंदों को सम्मानजनक जीवन देने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।
पूर्व अनुभवों और गाँववासियों की प्रतिक्रिया
गाँववासियों ने बताया कि जब संत रामपाल जी महाराज डीघल या आसपास के किसी आश्रम में प्रवास करते थे, तब वहाँ हर समय भंडारा चलता था जिसमें घी की जलेबी व अन्य पकवान खुले दिल से खिलाए जाते थे। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि “कभी किसी ने यह नहीं सुना कि रामपाल जी महाराज ने दान-पर्ची कटवाई हो। उन्होंने हमेशा लोगों को निःशुल्क सेवा दी है।”
निष्कर्ष: मानवीय सेवा का सच्चा स्वरूप
डीघल गाँव में अन्नपूर्णा मुहिम के तहत की गई यह सहायता केवल पेट भरने तक सीमित नहीं रही। इसने वहां के असहाय परिवार को भविष्य के लिए नई आशा दी। सतलोक आश्रम व संत रामपाल जी महाराज की यह पहल दिखाती है कि जब सेवा बिना स्वार्थ के होती है, तब वह सच्चे अर्थों में समाज का उत्थान करती है। आज जब दुनिया जात-पात, भेदभाव और स्वार्थ से जूझ रही है, तब इस तरह के अभियान मानवता को जीवित रखने का सबसे बड़ा साधन हैं।

