बरहाना (हरियाणा): अक्सर कहा जाता है कि जिसका कोई नहीं होता, उसका भगवान होता है। लेकिन कलयुग के इस दौर में उस भगवान का रूप कैसा होता है, यह बरहाना गांव के राजेंद्र जी के परिवार ने साक्षात महसूस किया। जिस परिवार के पास सर छुपाने के लिए छत तक नसीब नहीं थी, आज संत रामपाल जी महाराज की असीम कृपा से उनके पास एक ऐसा सुंदर आशियाना है, जिसकी कल्पना उन्होंने सपने में भी नहीं की थी।
चार ईंटों पर टिका था जीवन: राजेंद्र जी की विवशता
बरहाना गांव के राजेंद्र जी के घर को यदि ‘घर’ कहा जाए, तो यह उस शब्द का अपमान होगा। वह वास्तव में एक “खंडहर” था। स्थिति इतनी दयनीय थी कि वहां इंसानों का रहना तो दूर, जानवर भी शायद ही रह पाएं।
न दीवारें थीं, न छत। बस चार ईंटों के ऊपर एक टीन का टप्पर रखा हुआ था, जिसके नीचे राजेंद्र जी, उनकी पत्नी और बच्चे अपना जीवन गुजार रहे थे। परिवार में एक बीमार बेटी, समीरा, और ३ छोटे बच्चे हैं। आर्थिक तंगी का आलम यह था कि राजेंद्र जी के पास बच्चों का इलाज करवाने या उन्हें पढ़ाने के लिए कोई साधन नहीं था। वह लाचारी के अंधेरे में जी रहे थे, जहां उम्मीद की कोई किरण नजर नहीं आती थी।
संत रामपाल जी महाराज का संकल्प: “कोई भूखा और बेघर न सोए”
संत रामपालजी के शिष्य अन्नपूर्णा मुहिम के तहत, १ हफ़्ते पूर्व संत जी के अनुयायी राशन सामग्री पहुचने गए, तब राजेंद्र जी की कठिनाइयों की गहनता का पता चला। जब राजेंद्र जी की यह दयनीय स्थिति संत रामपाल जी महाराज के संज्ञान में आई, तो उन्होंने कारागार में होते हुए भी तत्काल प्रभाव से इस परिवार के उद्धार का आदेश जारी किया। संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट आदेश था – “बरहाना गांव में उस गरीब भाई का घर तुरंत बनवाया जाए और परिवार की हर जरूरत पूरी की जाए।”
संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा से समाज में एक नई अलख जगाई जा रही है कि देश में कोई भी व्यक्ति भूखा या बेघर न सोए।
स्वर्ग जैसा सुंदर और मजबूत आशियाना: एक अद्वितीय निर्माण
संत रामपाल जी महाराज के आदेश पर राजेंद्र जी के लिए जिस घर का निर्माण किया गया, वह केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि वास्तुकला का एक बेहतरीन नमूना है।
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मात्र 30-32 गज की जगह में संत रामपाल जी महाराज ने ऐसी व्यवस्था करवाई है कि देखने वाले इसे “सतलोक का नक्शा” बता रहे हैं।
मकान की प्रमुख विशेषताएं:
- मजबूत नींव और उत्तम गुणवत्ता: घर के निर्माण में ‘नंबर वन’ गुणवत्ता की ईंटों का उपयोग किया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पूरे घर में एक भी ईंट खराब नहीं है।
- आधुनिक सुविधाएं: इतनी कम जगह में भी लॉबी, हवादार कमरे, रसोई और अटैच्ड लैट्रिन-बाथरूम (Attached Washroom) का निर्माण किया गया है।
- बारीकियों पर ध्यान: नीचे की मंजिल पर लकड़ी की खिड़कियां और ऊपर की मंजिल पर लोहे की खिड़कियां लगाई गई हैं, जिन्हें जंग से बचाने के लिए अच्छी तरह पेंट किया गया है। चौखटों में 14 गेज (Gauge) का लोहा और भारी गर्डर इस्तेमाल किए गए हैं।
- हवादार और रोशन: घर का नक्शा ऐसा है कि दिन में लाइट जलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। बिजली और पानी की फिटिंग (टोटियां आदि) उच्च गुणवत्ता की लगाई गई हैं।
निर्माण कार्य खत्म होने के बाद जभ बेटी समीरा की तबीयत खराब होने की खबर संत जी तक पहुची, तब तुरंत आदेश हुआ की बेटी को तुरंत अस्पताल लेकर जाया जाये, जिसका पालन तत्क्षण हुआ।
सिर्फ घर नहीं, जीवन भर की सुरक्षा: संत रामपाल जी की सौगात
संत रामपाल जी महाराज ने केवल मकान बनाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री नहीं की, बल्कि राजेंद्र जी के परिवार की आजीवन जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली है। राजेंद्र जी को अब अपनी लाचार बेटी के इलाज या बच्चों की पढ़ाई की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सहायता का विवरण:
- आवास – पक्का, हवादार और सभी सुविधाओं से युक्त दो मंजिला मकान।
- चिकित्सा – बीमार बेटी समीरा का प्रतिष्ठित प्राइवेट अस्पताल में इलाज।
- शिक्षा – सभी बच्चों का स्कूल में एडमिशन, फीस, ड्रेस, जूते, बैग और पुस्तकों का पूरा खर्च।
- राशन – जीवन भर के लिए उत्तम गुणवत्ता (Branded) वाली खाद्य सामग्री की व्यवस्था।
- अन्य सुविधाएं – गैस सिलेंडर (ताकि लकड़ी न तोड़नी पड़े), कपड़े और अन्य घरेलू सामान।
“सरकारी योजनाओं से कोसों आगे है यह मुहिम” – ग्रामीणों की प्रतिक्रिया
गांव के प्रधान श्री संदीप शास्त्री और सरपंच ने संत रामपाल जी महाराज के इस कार्य की भूरी-भूरी प्रशंसा की।
सरपंच महोदय ने कहा, “आजादी की रोशनी आज तक इन झोपड़ियों तक नहीं पहुंच पाई थी, लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने इसे संभव कर दिखाया। जिस गुणवत्ता का मकान महाराज जी ने बनवाकर दिया है, वैसा शायद मैं अपने लिए भी न बनवा पाऊं। यह किसी साधारण इंसान का काम नहीं, बल्कि एक प्रबुद्ध आत्मा का चमत्कार है।”
दिल्ली से आए डीटीसी इंस्पेक्टर मनोज कुमार ने निर्माण कार्य देखकर कहा, “मैंने अपनी जिंदगी में पहली बार ऐसा परोपकार देखा है। घर की मजबूती और फिनिशिंग देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए। संत रामपाल जी महाराज ने एक गरीब को राजाओं जैसा महल देकर सम्मानित किया है।”
जभ राजेंद्र जी से इस कार्य के ऊपर सवाल पूछा गया की, उनको कैसा लगा और संत रामपालजी महाराज से वो क्या कहना चाहते हैं, तब राजेंद्र जी की आखें नम हो गई और वो कुछ कह ना सके। मानो खुशी और कृतज्ञता ने उनके शब्द ही छीन लिए हो।
संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम
राजेंद्र जी, जो कल तक अपनी लाचारी पर आंसू बहाते थे, आज संत रामपाल जी महाराज का धन्यवाद करते नहीं थकते। उनके बच्चे अब अच्छे स्कूल में पढ़ रहे हैं और बीमार बेटी का इलाज चल रहा है।
राजेंद्र जी को दी गई सहायता कोई अकेली घटना नहीं है। यह “अन्नपूर्णा मुहिम” का हिस्सा है, जो संत रामपाल जी महाराज द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण और निरंतर बाढ़ राहत कार्य है। यह मुहिम, जो भोजन और आश्रय प्रदान करने के प्रयास के रूप में शुरू हुई थी, अब एक व्यापक मानवीय सहायता अभियान में विकसित हो गई है, जिसने 300 से अधिक गाँवों तक पहुँच बनाई है।


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Ghar banane me aaj kal logo ka sabh kuch khatam ho jata hai. Aur yahan santji Saheb Kabir ke sudama ke mahal bana rahe hain