जीवन की अनिश्चितताएं कब किस रूप में सामने आ जाएं, यह कोई नहीं जानता। हरियाणा के रोहतक जिले की महम तहसील के अंतर्गत आने वाले गाँव भैणी सुरजन, जिसे बाली भी कहा जाता है, में एक ऐसी ही हृदय विदारक घटना घटी जिसने एक बुजुर्ग दंपत्ति की दुनिया को पल भर में राख के ढेर में बदल दिया। यहाँ रहने वाले 70 वर्षीय रघुवीर सिंह और उनकी पत्नी, जो बकरियां चराकर और दिहाड़ी मजदूरी करके अपना और अपने मानसिक रूप से अस्वस्थ बच्चों का पेट पालते थे, एक भयानक हादसे का शिकार हो गए।
एक दिन रघुवीर सिंह जब चाय बना रहे थे, तभी गैस सिलेंडर में रिसाव होने के कारण भयानक विस्फोट हुआ और उनकी झोपड़ी में आग लग गई। देखते ही देखते उनका आशियाना, कपड़े, बिस्तर और जीवन भर की जमा-पूंजी उस आग में स्वाहा हो गई। उनके पास तन पर पहने कपड़ों के अलावा कुछ शेष नहीं बचा था।
ग्रामीणों ने मदद के लिए लगाई संत रामपाल जी महाराज से गुहार
जब इस गरीब परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूटा, तो चारों तरफ निराशा का अंधेरा था। 70 साल की वृद्धावस्था में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर इस दंपत्ति की सुध लेने वाला कोई नहीं था। गाँव के सरपंच अमित और अन्य ग्रामीणों को जब इस बात का अहसास हुआ कि सरकारी सहायता या स्थानीय मदद इस परिवार के पुनर्वास के लिए पर्याप्त नहीं होगी, तब उनकी उम्मीद की किरण केवल एक ही दिशा में थी। सरपंच और ग्रामीणों ने सुना था कि वर्तमान समय में केवल संत रामपाल जी महाराज ही ऐसे महापुरुष हैं जो निस्वार्थ भाव से गरीबों और असहायों की मदद कर रहे हैं। इसी विश्वास के साथ, गाँव के लोगों ने इस पीड़ित परिवार की व्यथा संत रामपाल जी महाराज तक पहुँचाने का निर्णय लिया। यह निर्णय उस बुजुर्ग दंपत्ति के जीवन में एक ऐसा चमत्कार लेकर आया जिसकी कल्पना उन्होंने सपने में भी नहीं की थी।
राख के ढेर पर 15 दिनों में खड़ा हुआ पक्का मकान
जैसे ही इस दुखद घटना की सूचना संत रामपाल जी महाराज तक पहुँची, उन्होंने क्षण भर की भी देरी नहीं की। संत रामपाल जी महाराज ने तुरंत अपने अनुयायियों को आदेश दिया कि इस परिवार को न केवल सहारा दिया जाए, बल्कि इनका पूरा घर नए सिरे से बसाया जाए। संत रामपाल जी महाराज की दयालुता का यह परिणाम हुआ कि जिस जगह पर कल तक राख और मलबे का ढेर था, वहां मात्र 15 दिनों के भीतर एक मजबूत और पक्का मकान बनकर खड़ा हो गया।
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रघुवीर सिंह के पास लगभग 100 से 125 गज की जमीन थी, जिस पर संत रामपाल जी महाराज की कृपा से एक सुंदर भवन का निर्माण किया गया। यह मकान कोई साधारण निर्माण नहीं है, बल्कि इसमें आधुनिक सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा गया है। मकान में दो बड़े कमरे, एक रसोईघर, स्नानघर और शौचालय का निर्माण करवाया गया है। घर की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए संत रामपाल जी महाराज ने लोहे के भारी-भरकम गेट लगवाए हैं। मुख्य द्वार के अलावा पिछले हिस्से में भी एक दरवाजा दिया गया है, क्योंकि यह मकान दो तरफ से सड़क से जुड़ा हुआ है। सुरक्षा की दृष्टि से एक दरवाजे का वजन तो लगभग 80 किलो रखा गया है, ताकि बुजुर्ग दंपत्ति सुरक्षित महसूस कर सकें।
गृहस्थी का संपूर्ण सामान और जीवन भर का राशन
संत रामपाल जी महाराज की उदारता केवल मकान बनाने तक सीमित नहीं रही। उन्होंने देखा कि आग में परिवार के बर्तन और दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी नष्ट हो चुकी थीं। इसलिए, संत रामपाल जी महाराज ने नवनिर्मित घर को पूरी तरह से सुसज्जित करके ही रघुवीर जी को सौंपा। रसोईघर में स्टील के नए बर्तन, प्लेटें, गिलास, कप और खाना पकाने के सभी आवश्यक पात्र रखवाए गए। वीडियो में यह स्पष्ट देखा जा सकता है कि बर्तनों और कपड़ों की पैकिंग तक नहीं खुली थी, जो यह दर्शाता है कि यह सब कुछ एकदम नया खरीदा गया था।
इसके अलावा, संत रामपाल जी महाराज ने परिवार के लिए सोने के लिए नई चारपाइयां और बिस्तर भी उपलब्ध कराए। घर में रोशनी के लिए बिजली की फिटिंग करवाई गई और हवा के लिए छत के पंखे भी लगवाए गए। स्नानघर में पानी की फिटिंग और शौचालय की सीट जैसी बारीक से बारीक सुविधाओं का भी ध्यान रखा गया, जो अक्सर सरकारी आवास योजनाओं में नदारद रहती हैं। संत रामपाल जी महाराज ने यह भी सुनिश्चित किया कि इस परिवार को भविष्य में कभी भूखा न सोना पड़े, इसलिए “अन्नपूर्णा मुहिम” सेवा के तहत उन्हें हर महीने आटा, दाल, आलू और अन्य खाद्य सामग्री भी नियमित रूप से दी जा रही है।
पीड़ित परिवार की जुबानी, संत रामपाल जी महाराज की मेहरबानी
बुजुर्ग रघुवीर सिंह और उनकी पत्नी की आँखों में अब आंसू तो हैं, लेकिन वे ख़ुशी और कृतज्ञता के हैं। दादी जी बताती हैं कि आग लगने के बाद उनके पास एक गिलास पानी पीने के लिए भी अपना नहीं बचा था। वे कहती हैं, “म्हारी मौज कर दी, भगवान ने ठाठ कर दी।” उनका इशारा साफ़ तौर पर संत रामपाल जी महाराज की ओर था, जिन्हें वे अब अपना भगवान मानती हैं। रघुवीर सिंह ने बताया कि पहले वे बहुत दुखी थे, बच्चे बीमार रहते थे और घर में खाने के लाले पड़े थे। आग ने रही-सही कसर भी पूरी कर दी थी। उन्होंने कहा कि कोई भी रिश्तेदार या सरकार उनकी मदद को नहीं आया, लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने वह कर दिखाया जो कोई सगा बेटा भी शायद न कर पाता।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सहायता का विवरण
नीचे दी गई तालिका में संत रामपाल जी महाराज द्वारा इस परिवार को उपलब्ध कराई गई सहायता सामग्री का विवरण दिया गया है:
| क्रमांक | सहायता का प्रकार | विवरण |
| 1 | आवास निर्माण | 100-125 गज में पक्का मकान (2 कमरे, रसोई, बरामदा) |
| 2 | सुरक्षा व्यवस्था | 80 किलो वजनी लोहे के गेट और मजबूत खिड़कियाँ |
| 3 | बिजली और पानी | बिजली की फिटिंग, छत के पंखे, पानी की पाइपलाइन, बाथरूम फिटिंग |
| 4 | रसोई का सामान | नए स्टील के बर्तन (थाली, गिलास, चम्मच, कप आदि) |
| 5 | फर्नीचर और बिस्तर | नई चारपाइयां और गद्दे/बिस्तर |
| 6 | राशन व्यवस्था | मासिक राशन (आटा, दाल, आलू, चीनी, चायपत्ती आदि) |
| 7 | निर्माण की अवधि | मात्र 15 दिन |
समाज के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण
यह घटना समाज के लिए एक दर्पण की तरह है। जहाँ एक ओर समाज में स्वार्थ और संवेदनहीनता बढ़ रही है, वहीं संत रामपाल जी महाराज मानवता की रक्षा के लिए एक ढाल बनकर खड़े हैं। रोहतक के इस छोटे से गाँव में हुआ यह निर्माण कार्य केवल ईंट-गारे का ढांचा नहीं है, बल्कि यह संत रामपाल जी महाराज की करुणा और दया का एक जीता-जागता स्मारक है। पड़ोसियों का कहना है कि जिस दीवार के सहारे रघुवीर जी की झोपड़ी थी, वह आग से काली पड़ गई थी, जो उस भयानक मंजर की गवाही देती है। लेकिन आज उसी जगह पर खड़ा यह सुंदर घर संत रामपाल जी महाराज की शक्ति और भक्ति का प्रमाण दे रहा है।
संत रामपाल जी महाराज ने साबित कर दिया है कि धर्म का वास्तविक अर्थ केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि दीन-दुखियों के आंसू पोंछना और उन्हें सम्मानजनक जीवन देना ही सच्ची भक्ति है। रघुवीर जी के मानसिक रूप से अस्वस्थ बच्चों और बुजुर्ग दंपत्ति के लिए संत रामपाल जी महाराज अब केवल एक संत नहीं, बल्कि साक्षात पालनहार बन गए हैं।
संत रामपाल जी महाराज: कलयुग में मानवता के सच्चे रक्षक और तारणहार
रोहतक के भैणी सुरजन गाँव की यह घटना इस बात का प्रबल प्रमाण है कि संत रामपाल जी महाराज ही वर्तमान समय में एकमात्र ऐसे महापुरुष हैं जो न केवल आध्यात्मिक ज्ञान दे रहे हैं, बल्कि भौतिक जगत के कष्टों से भी मानवता को मुक्त कर रहे हैं। जिस प्रकार सुदामा की गरीबी भगवान कृष्ण ने दूर की थी, ठीक उसी प्रकार संत रामपाल जी महाराज ने रघुवीर सिंह और उनके परिवार को राख के ढेर से उठाकर खुशियों के महल में बिठा दिया है।
उनकी यह निस्वार्थ सेवा और परमार्थ का कार्य युगों-युगों तक याद रखा जाएगा। संत रामपाल जी महाराज की शरण में जो भी आता है, वह कभी खाली हाथ नहीं लौटता, यह सत्य आज बहणी सुरजन गाँव की फिजाओं में गूंज रहा है। संत रामपाल जी महाराज की जय हो, जिन्होंने एक उजड़े हुए परिवार को पुनः बसाकर इंसानियत को शर्मसार होने से बचा लिया।

